इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल की गोसिया मस्जिद में नमाजियों की संख्या 20 तक सीमित करने के मामले में संभल के डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया और एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने उन्हें संभल से बाहर तबादला करने या इस्तीफा देने की टिप्पणी की। इस मामले में अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी। इस घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी के संभल सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस रुख का स्वागत किया है। उन्होंने रविवार रात 09:30 बजे अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश का संविधान हर नागरिक को अपनी धार्मिक स्वतंत्रता के साथ इबादत करने का अधिकार देता है। सांसद बर्क ने जोर देकर कहा कि किसी भी अधिकारी को इन संवैधानिक अधिकारों में अनावश्यक दखल देने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए होती है, न कि इबादत पर रोक लगाने के लिए। उन्होंने ऐसी पाबंदियों को नागरिकों की धार्मिक आजादी का सीधा हनन बताया। बर्क के अनुसार, हाईकोर्ट का यह फैसला स्पष्ट करता है कि संविधान से मिले अधिकारों को सीमित नहीं किया जा सकता और किसी भी अधिकारी को धार्मिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। सपा सांसद ने कहा कि यदि कोई अधिकारी इस तरह की कार्रवाई करता है, तो जिले के डीएम और एसपी की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे आदेशों को रद्द करें और संविधान के अनुरूप व्यवस्था बहाल करें। उन्होंने एसडीएम, सीओ, इंस्पेक्टर और तहसीलदार जैसे निचले स्तर के अधिकारियों द्वारा मनमाने ढंग से पाबंदी लगाने को संविधान के खिलाफ बताया। बर्क ने उम्मीद जताई कि हाईकोर्ट के इस निर्णय से केवल संभल ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि किसी भी धर्म की आजादी पर पाबंदी लगाने से पहले संविधान और कानून का पूरा ध्यान रखना होगा।


