मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने फर्जी दस्तावेज बनाकर मकान हड़पने के मामले में पूर्व पार्षद मुरारी सिंह यादव सहित 17 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने कोतवाली नगर पुलिस को तीन दिन के भीतर एफआईआर दर्ज कर इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधांशु शेखर उपाध्याय ने पीड़िता मनोरमा सिंह की ओर से दायर प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद पारित किया। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपियों ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी बैनामा कराया और उनके मकान पर अवैध कब्जा करने की साजिश रची।
मनोरमा सिंह नाका हनुमानगढ़ी, कोतवाली नगर क्षेत्र की निवासी हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि उनके पति किसुन राजकुमार सिंह ने वर्ष 1963 में लाल नामक व्यक्ति से जमीन का विधिवत बैनामा कराया था। पति की मृत्यु के बाद से वह अपने परिवार के साथ उसी मकान में रह रही हैं और लगातार उसी पर उनका कब्जा है। उनके मकान की चौहद्दी दिखाकर किसी अन्य स्थान की जमीन का फर्जी बैनामा
पीड़िता के अनुसार 30 जुलाई 2025 को कुछ लोगों ने उनके मकान पर कब्जा करने का प्रयास किया। इसी दौरान उन्हें पता चला कि उनके मकान की चौहद्दी दिखाकर किसी अन्य स्थान की जमीन का फर्जी बैनामा करा लिया गया है। आरोप है कि इस बैनामे के आधार पर उनके पैतृक मकान को हड़पने की कोशिश की जा रही है। फर्जीवाड़े का मकसद उनके मकान पर अवैध कब्जा करना था
मनोरमा सिंह का कहना है कि आरोपियों ने आपस में मिलकर साजिश रची और फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इन दस्तावेजों में जमीन की ऐसी चौहद्दी दर्शाई गई, जिसका उनके मकान से कोई संबंध नहीं है। इस कथित फर्जीवाड़े का मकसद उनके मकान पर अवैध कब्जा करना था।
पीड़िता ने पहले पुलिस अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। मामले की प्रारंभिक जांच के बाद अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।
इस मामले में पूर्व पार्षद मुरारी सिंह यादव के अलावा विजय प्रताप सिंह, नीलू, मीनू सिंह, हेमंत कुमार, सुदामा सिंह, सुमित कुमार, इंद्र कुमार, किरन देवी, शंकर लाल, आनंद प्रताप, जय सिंह, विनीता, संदीप और नीरज समेत कुल 17 लोगों को आरोपी बनाया गया है। अदालत के आदेश के बाद पुलिस को निर्धारित समय के भीतर मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई करनी होगी।


