महाराष्ट्र की राजनीति में बारामती विधानसभा सीट के उपचुनाव को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के दिग्गज नेता अजित पवार के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर उनकी पत्नी और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के निर्विरोध चुने जाने की संभावना है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कहा कि बारामती और राहुरी विधानसभा सीट पर उपचुनाव आम सहमति से निर्विरोध कराए जाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा, लेकिन अगर मुकाबला होता भी है तो भाजपा इसके लिए तैयार है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने रविवार को घोषणा की कि अजित पवार के निधन के कारण खाली हुई पुणे की बारामती सीट और भाजपा विधायक शिवाजी कर्डिले के निधन के कारण रिक्त अहिल्यानगर की राहुरी सीट पर उपचुनाव 23 अप्रैल को होंगे। जबकि मतगणना 4 मई को होगी।
प्लेन क्रैश में अजित पवार का निधन
66 वर्षीय अजित पवार का इसी साल 28 जनवरी को निधन हो गया था। वह एक चार्टर्ड बिजनेस विमान से मुंबई से बारामती जा रहे थे। लेकिन बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति के बेहद प्रभावशाली नेता थे। वह बारामती से लगातार आठ बार विधायक चुने गए थे और राज्य के छह बार उपमुख्यमंत्री रह चुके थे। उनके निधन से बारामती ही नहीं बल्कि राज्य की राजनीति में भी एक बड़ा खालीपन पैदा हो गया।
सुनेत्रा पवार ने संभाली कमान
अजित पवार के निधन के बाद 30 जनवरी को सुनेत्रा पवार को एनसीपी विधायक दल का नेता चुना गया और भाजपा नेतृत्व वाली महायुति सरकार में उन्हें उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इसके बाद 26 फरवरी को पार्टी ने सर्वसम्मति से सुनेत्रा पवार को एनसीपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी चुन लिया।
हालांकि वर्तमान में वह न तो विधायक और न ही विधान परिषद सदस्य (MLC) हैं। जबकि उन्हें उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के छह महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी है। इसी कारण वह बारामती से उपचुनाव लड़ने जा रही हैं। इसके लिए वह राज्यसभा की अपनी सीट से इस्तीफा देंगी।
विपक्ष नहीं उतारेगा उम्मीदवार?
बारामती उपचुनाव को लेकर विपक्ष की ओर से भी बड़ा संकेत मिला है। शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) जो विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी (MVA) का हिस्सा है, पहले ही संकेत दे चुकी है कि वह इस चुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारेगी।
एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने खुद सभी राजनीतिक दलों से अपील की थी कि सुनेत्रा पवार को बारामती से निर्विरोध चुना जाए। शरद गुट के नेता रोहित पवार ने पिछले महीने कहा था, “सभी राजनीतिक नेताओं और राजनीतिक दलों से मेरा अनुरोध है कि वे यह सुनिश्चित करें कि सुनेत्रा पवार बारामती से निर्विरोध चुनी जाएं… मैं यह अनुरोध अपनी पार्टी से चर्चा किए बिना कर रहा हूं, जिसके लिए मैं क्षमा चाहता हूं… हालांकि, यह सबकी इच्छा है।”
बारामती पर अजित पवार की मजबूत पकड़
बारामती विधानसभा सीट लंबे समय से अजित पवार का गढ़ रही है। उन्होंने 1991, 1995, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 में यह सीट जीती थी।
2024 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने अपने भतीजे और एनसीपी (एसपी) उम्मीदवार युगेंद्र पवार को 1,00,899 वोटों से हराया था। उस चुनाव में अजित पवार को 1,81,132 वोट मिले थे, जबकि युगेंद्र पवार को 80,233 वोट मिले थे।
क्या निर्विरोध होगा चुनाव?
राजनीतिक संकेतों और विपक्ष की नरम भूमिका को देखते हुए माना जा रहा है कि बारामती का उपचुनाव औपचारिकता बन सकता है और सुनेत्रा पवार निर्विरोध विधायक चुनी जा सकती हैं।
रविवार को मुंबई में पत्रकारों से सीएम फडणवीस ने कहा, “हमारा हर संभव प्रयास रहेगा कि आम सहमति से निर्णय लिया जाए और दोनों सीटों पर उपचुनाव निर्विरोध कराए जाएं। हालांकि, अगर हम पर (महायुति पर) चुनाव थोपे जाते हैं तो हम चुनाव लड़ने के लिए भी तैयार हैं।“


