भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है मनुष्य का शरीर : महाराज

भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है मनुष्य का शरीर : महाराज

भास्कर न्यूज|कुडू बरवाटोली कुडू में चल रही साप्ताहिक श्रीमदभागवत कथा का समापन रविवार को हो गया। कथा के समापन के बाद हवन यज्ञ और भंडारा हुआ। इसमें शामिल होने वाले श्रद्धालुओं ने जयकारे भी लगाए। यज्ञाचार्य रामाकांत शास्त्री सहयोगी पवन शास्त्री ने यजमान राजाराम साहू, सुरेश्वरी देवी,मनोज महतो, उर्मिला देवी सहित गांव के लोगो ने हवन किया। हवन के दौरान रामाकांत शास्त्री ने कहा कि आत्मा को जन्म व मृत्यु के बंधन से मुक्त कराने के लिए भक्ति मार्ग से जुड़कर सत्कर्म करना होगा। कहा कि हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। दुर्गुणों की बजाय सद्गुणों के द्वार खुलते हैं। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं। भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भव सागर से पार हो जाता है। श्रीमद भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है, कथावाचक आचार्य प्रभु दास जी महाराज ने भंडारे के प्रसाद का भी वर्णन किया, उन्होंने कहा कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला प्र का अर्थ प्रभु, दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं। हर कथा या अनुष्ठान का तत्वासार होता है जो मन बुद्धि व चित को निर्मल कर देता है। मनुष्य शरीर भी भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है। जीवन में प्रसाद का अपमान करने से भगवान का ही अपमान होता है। भगवान का लगाए गए भोग का बचा हुआ शेष भाग मनुष्यों के लिए प्रसाद बन जाता है। कथा समापन के दिन रविवार को हुआ तथा सोमवार को विधिविधान से पूजा करवाई दोपहर तक हवन किया गया। बाद में प्रसाद वितरित हुआ। मौके पर लातेहार विधायक प्रकाश राम यज्ञ मंडप पहुंचे। पूजा अर्चना किया उसके बाद कथावाचक ने विधायक को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।

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