सीमेंट और पेंट की तीन फैक्ट्रियां लगेंगी, 3000 करोड़ का निवेश; 42 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार बिहार में औद्योगिक निवेश को जल्द बड़ी रफ्तार मिलने वाली है। बिड़ला ग्रुप राज्य में सीमेंट और पेंट की तीन बड़ी फैक्ट्रियां लगाने की तैयारी कर रहा है। इन परियोजनाओं पर करीब 3,000 करोड़ रुपए का निवेश होगा। इससे लगभग 2,200 लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा, जबकि 40 हजार से अधिक लोगों को परोक्ष रूप से काम मिलने की संभावना है। कंपनी बांका जिले के कटोरिया में अल्ट्राटेक सीमेंट की दूसरी यूनिट स्थापित करेगी। इस परियोजना पर करीब 1,300 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके लिए 60 एकड़ जमीन पहले ही आवंटित की जा चुकी है। अल्ट्राटेक की पहली यूनिट दनियावां में पहले से संचालित है। इसके अलावा ‘मंगलम’ नाम से एक नई सीमेंट फैक्ट्री भी स्थापित की जाएगी, जिस पर लगभग 1,500 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह फैक्ट्री आवासीय परिसर के साथ विकसित की जाएगी और इसका निर्माण 40 प्रतिशत हरित क्षेत्र के साथ किया जाएगा। समूह सासाराम में पेंट की एक फैक्ट्री लगाने की भी तैयारी कर रहा है। पेंट फैक्ट्री के लिए ग्रुप की नजर स्थानीय बाजार पर है। तीनों परियोजनाओं के लिए कुल लगभग 150 एकड़ जमीन की जरूरत होगी। बिड़ला ग्रुप के अधिकारियों ने इस संबंध में उद्योग मंत्री और विभागीय अधिकारियों से मुलाकात कर परियोजनाओं पर चर्चा की है। सप्लाई कहां होगी? बिहार में बने सीमेंट को अरब और अफ्रीकी देशों में निर्यात करने की योजना है। पहले चरण में नेपाल के तराई क्षेत्र और भूटान में सप्लाई की जाएगी। इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड में भी सीमेंट भेजा जाएगा। क्या होगा फायदा? करीब 42 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। जिन क्षेत्रों में फैक्ट्री स्थापित होगी, वहां के आसपास के इलाके का तेजी से विकास होगा। बिहार का औद्योगिक विकास हो रहा उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने कहा कि बिहार के हर जिले में औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। अल्ट्राटेक सीमेंट की दूसरी यूनिट लग रही है और मंगलम सीमेंट भी अपनी फैक्ट्री स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में पहली बार पेंट बनाने की फैक्ट्री लगाई जा रही है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी। क्यों चुना गया बिहार? बिहार में कच्चा माल उपलब्ध है और श्रमशक्ति अपेक्षाकृत सस्ती है। इससे उत्पादन लागत कम होगी और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा आसान होगी। साथ ही परिवहन पर भी कम खर्च आएगा। सीमेंट और पेंट की तीन फैक्ट्रियां लगेंगी, 3000 करोड़ का निवेश; 42 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार बिहार में औद्योगिक निवेश को जल्द बड़ी रफ्तार मिलने वाली है। बिड़ला ग्रुप राज्य में सीमेंट और पेंट की तीन बड़ी फैक्ट्रियां लगाने की तैयारी कर रहा है। इन परियोजनाओं पर करीब 3,000 करोड़ रुपए का निवेश होगा। इससे लगभग 2,200 लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा, जबकि 40 हजार से अधिक लोगों को परोक्ष रूप से काम मिलने की संभावना है। कंपनी बांका जिले के कटोरिया में अल्ट्राटेक सीमेंट की दूसरी यूनिट स्थापित करेगी। इस परियोजना पर करीब 1,300 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके लिए 60 एकड़ जमीन पहले ही आवंटित की जा चुकी है। अल्ट्राटेक की पहली यूनिट दनियावां में पहले से संचालित है। इसके अलावा ‘मंगलम’ नाम से एक नई सीमेंट फैक्ट्री भी स्थापित की जाएगी, जिस पर लगभग 1,500 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह फैक्ट्री आवासीय परिसर के साथ विकसित की जाएगी और इसका निर्माण 40 प्रतिशत हरित क्षेत्र के साथ किया जाएगा। समूह सासाराम में पेंट की एक फैक्ट्री लगाने की भी तैयारी कर रहा है। पेंट फैक्ट्री के लिए ग्रुप की नजर स्थानीय बाजार पर है। तीनों परियोजनाओं के लिए कुल लगभग 150 एकड़ जमीन की जरूरत होगी। बिड़ला ग्रुप के अधिकारियों ने इस संबंध में उद्योग मंत्री और विभागीय अधिकारियों से मुलाकात कर परियोजनाओं पर चर्चा की है। सप्लाई कहां होगी? बिहार में बने सीमेंट को अरब और अफ्रीकी देशों में निर्यात करने की योजना है। पहले चरण में नेपाल के तराई क्षेत्र और भूटान में सप्लाई की जाएगी। इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड में भी सीमेंट भेजा जाएगा। क्या होगा फायदा? करीब 42 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। जिन क्षेत्रों में फैक्ट्री स्थापित होगी, वहां के आसपास के इलाके का तेजी से विकास होगा। बिहार का औद्योगिक विकास हो रहा उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने कहा कि बिहार के हर जिले में औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। अल्ट्राटेक सीमेंट की दूसरी यूनिट लग रही है और मंगलम सीमेंट भी अपनी फैक्ट्री स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में पहली बार पेंट बनाने की फैक्ट्री लगाई जा रही है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी। क्यों चुना गया बिहार? बिहार में कच्चा माल उपलब्ध है और श्रमशक्ति अपेक्षाकृत सस्ती है। इससे उत्पादन लागत कम होगी और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा आसान होगी। साथ ही परिवहन पर भी कम खर्च आएगा।


