‘मैं भी एक इंसान ही हूं…, T20 वर्ल्डकप जीतने के बावजूद संजू सैमसन की ये ख्वाहिश नहीं हुई पूरी, खोला राज़

‘मैं भी एक इंसान ही हूं…, T20 वर्ल्डकप जीतने के बावजूद संजू सैमसन की ये ख्वाहिश नहीं हुई पूरी, खोला राज़

Sanju Samson: टी20 वर्ल्ड कप 2026 में टीम इंडिया की जीत के सबसे बड़े हीरो रहे संजू सैमसन ने अपने शतकों को लेकर चल रही चर्चा पर पहली बार दिल खोलकर बात की है। इस टूर्नामेंट में संजू ने बतौर ओपनर 5 परियों में 321 रन बनाए है और ‘प्लेयर ऑफ थे टूर्नामेंट’ का खिताब भी अपने नाम किया। लेकिन, फैंस के मन के एक बात खटक रही है कि संजू एक नहीं, बल्कि तीन बार शतक के बेहद करीब आकर चूक गए।

तीन बार शतक से चूके

संजू सैमसन के पास इस वर्ल्ड कप में सुरेश रैना के बाद शतक लगाने वाला दूसरा भारतीय बनने के तीन मौके थे। सबसे पहले वेस्टइंडीज के खिलाफ नाबाद 97 रन ठोके तब, फिर सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 89 रन बनाए तब, तीसरी बार फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भी 89 रन जड़े तब। हर बार संजू शतक के करीब थे, लेकिन वो तीन जादुई अंकों तक नहीं पहुंच पाए। इसी को लेकर अब उन्होंने अपनी चुप्पी तोड़ी है।

इंसान हूं, मन में तो आता ही है…

संजू ने इंडिया टुडे से बात करते हुए बड़ी ईमानदारी से कहा, ‘मैं यह बिल्कुल नहीं कहूंगा कि मैंने 100 के बारे में सोचा ही नहीं। एक इंसान होने के नाते मन में आ ही जाता है कि यार, एक 100 लग जाए तो मजा आ जाएगा। तो ख्याल तो जरूर आया, लेकिन फिर मैंने खुद से कहा, ‘संजू, तेरे रन अभी तक बने कैसे हैं? जब तूने खेलना शुरू किया था, तब तो 100 के बारे में नहीं सोचा था।’ संजू ने आगे कहा कि भले ही लोग कह रहे हैं कि मैं तीन शतक चूक गया, लेकिन मुझे लगता है कि ‘नहीं यार, उससे बहुत बड़ा काम हुआ है।’ मैं अपने योगदान से बहुत खुश हूं क्योंकि मैंने उस प्रोसेस पर भरोसा किया जिससे रन बन रहे थे।

नो पर्सनल माइलस्टोन – गंभीर

संजू ने टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर की फिलॉसफी को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि गंभीर भाई और सूर्या ने श्रीलंका सीरीज से ही यह साफ कर दिया था कि टीम में पर्सनल माइलस्टोन के लिए कोई जगह नहीं है। संजू बोले, ‘हमारी टीम मीटिंग्स में यह बात साफ होती है कि चाहे स्कोर 80 हो या 90, आपको बस यह देखना है कि टीम को इस वक्त क्या चाहिए। हम सबने इसी को अपनाया है और इसी ने हमारा कैरेक्टर बनाया है।’

इस कारनामे से संजू का मैसेज

संजू ने साफ कर दिया कि उनके लिए टीम की जीत और अपना योगदान किसी भी शतक से ऊपर है। 31 साल के इस खिलाड़ी ने दिखा दिया कि जब आप अपने देश के लिए खेलते हैं, तो स्कोरबोर्ड पर आपके नाम के आगे 90 हो या 100, अगर टीम जीत रही है तो वही सबसे बड़ी उपलब्धि है।

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