उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित उप-निरीक्षक (SI) नागरिक पुलिस के पदों के लिए लिखित परीक्षा प्रदेश के विभिन्न केंद्रों पर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। परीक्षा देकर बाहर निकले अभ्यर्थियों के चेहरों पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र को ‘मध्यम से कठिन’ स्तर का बताया, जबकि कुछ का मानना था कि इस बार बोर्ड ने रटने के बजाय विषयों की गहरी समझ रखने वाले अभ्यर्थियों को परखने का प्रयास किया। प्रश्नपत्र के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि ‘सेक्शन-1’ (सामान्य हिंदी) और ‘सेक्शन-2’ (मूल विधि/संविधान/सामान्य ज्ञान) में गहराई और सटीकता पर विशेष जोर दिया गया था। सामान्य हिंदी के प्रश्नों में व्याकरण के बुनियादी सवाल पूछे गए, जिनमें ‘पहाड़’ शब्द का लिंग, ‘टोपी’ का बहुवचन और ‘भारी’ का विलोम जैसे प्रश्न शामिल थे। हालांकि, साहित्य खंड ने कई अभ्यर्थियों को उलझाया, जिसमें 1975 में ‘तमस’ उपन्यास के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त करने वाले लेखक और ‘भूले-बिसरे चित्र’ उपन्यास के रचनाकार से संबंधित प्रश्न थे। इसके अतिरिक्त, ‘छाती पर मूंग दलना’ जैसे मुहावरे और ‘अतिशयोक्ति’, ‘श्लेष’ जैसे अलंकारों ने भाषा ज्ञान की भी परीक्षा ली। दूसरे खंड में मूल विधि और संविधान से जुड़े प्रश्नों का स्तर अपेक्षाकृत कठिन रहा। अभ्यर्थियों को ‘एपिस्टोलरी ज्यूरिसडिक्शन’ (पत्रात्मक क्षेत्राधिकार) जैसे कानूनी सिद्धांतों के साथ आयकर अधिनियम की धारा 270A जैसे तकनीकी प्रश्नों का सामना करना पड़ा। संविधान से जुड़े सवालों में अनुच्छेद 324 (चुनाव आयोग), अनुच्छेद 360 (वित्तीय आपातकाल) और शिक्षा के अधिकार से संबंधित 86वें संविधान संशोधन प्रमुख रहे। सामान्य ज्ञान के प्रश्नों में भूगोल से जुड़े सवाल भी शामिल थे, जिनमें ‘तस्मानिया द्वीप’ की स्थिति और फ्रांस-स्पेन के बीच प्राकृतिक सीमा बनाने वाली पर्वत श्रृंखला से संबंधित प्रश्न पूछे गए। गद्यांश खंड में स्वामी विवेकानंद और प्लेग महामारी के दौरान उनके सेवा कार्यों पर आधारित अंश दिया गया, जिससे अभ्यर्थियों की तार्किक और नैतिक समझ की भी जांच की गई।


