युद्ध में अब AI की मदद:अमेरिकी टेक कंपनियों से पेंटागन की डील, AI चैटबॉट तय करेंगे पहले किन ठिकानों पर होगा हमला, गलती हुई तो जिम्मेदार कौन… इस पर चुप्पी

युद्ध में अब AI की मदद:अमेरिकी टेक कंपनियों से पेंटागन की डील, AI चैटबॉट तय करेंगे पहले किन ठिकानों पर होगा हमला, गलती हुई तो जिम्मेदार कौन… इस पर चुप्पी

युद्ध के मैदान में अब जनरल और सिपाही ही नहीं, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन पर एआई ‘चैटबॉट्स’ भी यह तय करेंगे कि पहले किस दुश्मन पर मिसाइल गिरानी है। अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने हाल ही में एक्सएआई और ओपनएआई के साथ गुप्त सैन्य नेटवर्क में एआई इस्तेमाल के लिए डील की है। पेंटागन अब युद्ध की रणनीति में एआई को एक ‘सलाहकार’ के रूप में जोड़ रहा है। यह तकनीक अब केवल डेटा ही नहीं जुटाएगी, बल्कि इंसानों को युद्ध के दौरान यह सलाह भी देगी कि मौजूदा स्थिति और विमानों की लोकेशन के आधार पर सबसे पहले दुश्मन के किन ठिकानों को निशाना बनाया जाए। हालांकि अंतिम फैसला इंसान ही लेगा। चैटबॉट्स के साथ सीधे बातचीत से तय होगी हमलों की प्राथमिकता अब तक अमेरिकी सेना ‘मेवेन’ प्रोजेक्ट जैसी तकनीक से ड्रोन फुटेज और तस्वीरों के आधार पर लक्ष्य पहचानती थी। अब इसमें चैटजीपीटी और ग्रोक जैसे स्मार्ट चैटबॉट की नई परत जुड़ रही है। सैन्य अधिकारी के अनुसार सैनिक उनसे सीधे पूछ सकेंगे कि किन लक्ष्यों को पहले प्राथमिकता दी जाए। इससे प्रक्रिया तेज होती है, लेकिन चुनौती इन मशीनी सुझावों की सच्चाई परखना है, क्योंकि नया एआई डेटा के बजाय सीधे निष्कर्ष देता है। आर्मी ऑपरेशंस में एआई का इस्तेमाल बढ़ा अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान ही ईरान के स्कूल पर हाल ही में हुए हमले में 160 से ज्यादा लड़कियों की मौत हुई थी। हालांकि पेंटागन अभी इसकी जांच कर रहा है, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक यह हमला अमेरिकी मिसाइल से हुआ था। इस स्ट्राइक में पुराने और गलत डेटा का हाथ था। कुछ रिपोर्ट में इस लक्ष्य के फैसलों में ‘क्लॉड’ और ‘मेवेन’ तकनीक के इस्तेमाल की बात भी कही जा रही है। यही तकनीक वेनेजुएला ऑपरेशंस में भी की गई थी, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है। चुनौती यह है कि कंपनियां अपने सिस्टम पर कुछ सीमाएं लगाती हैं, लेकिन युद्ध के दौरान वे कितनी कारगर होंगी, स्पष्ट नहीं। ट्रम्प ने कुछ कंपनियों को ‘सप्लाई चेन रिस्क’ तक बताया, यानी ऐसी तकनीकी निर्भरता जो युद्ध के समय काम बंद या हैक की जा सकती है। चैटबॉट डेटा स्कैन कर लक्ष्य की प्राथमिकता तय करता है युद्ध के दौरान ड्रोन, सैटेलाइट, रडार और खुफिया स्रोतों से हर सेकेंड भारी मात्रा में डेटा आता है। इस दौरान एआई चैटबॉट डेटा को तेजी से स्कैन कर पैटर्न पहचानता है। इसके बाद यह खतरे का आकलन कर प्राथमिकता तय करता है कि कौन सा लक्ष्य तुरंत हमला कर सकता है। चैटबॉट यह सुझाव भी देता है कि किसी लक्ष्य पर कौन-सा हथियार सबसे ज्यादा प्रभावी रहेगा, ताकि कार्रवाई सटीक तरीके से हो सके। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत अंतिम मंजूरी मानव सैनिक ही देता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *