आज पापमोचनी एकादशी, साल की अंतिम एकादशी:श्रवण नक्षत्र और द्विपुष्कर योग का शुभ संयोग, परिघ योग में व्रत-पूजा का विशेष महत्व

आज हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से साल की आखिरी एकादशी है। चैत्र कृष्ण पापमोचनी एकादशी का पर्व आज श्रवण नक्षत्र और परिघ योग के शुभ संयोग में मनायी जाएगी। पुराणों के अनुसार, किसी जातक से जाने-अनजाने में किए गये पापों का प्रायश्चित करने के लिए पापमोचनी एकादशी सबसे उत्तम व्रत है। इस व्रत को करने से साधक को उसके सभी पापों से मुक्त कर उसके लिए मोक्ष के मार्ग खुल जाता है। आज के दिन भगवान श्रीहरि की चतुर्भुज रूप में पूजा, विष्णु सहस्त्रनाम पाठ, गजेन्द्रमोक्ष, श्रीमद्भागवत, जाप करना शुभ रहेगा। पापमोचिनी एकादशी व्रत की महिमा ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि, ‘पापमोचिनी एकादशी व्रत करने से सहस्त्र गौदान का पुण्य के अलावे ब्रह्म हत्या, सुवर्ण चोरी, सुरापान और गुरुपत्नी गमन जैसे महापाप भी इस व्रत के प्रभाव से दूर हो जाते हैं। पद्म पुराण के अनुसार, पापमोचिनी एकादशी का व्रत करने से सर्व पाप स्वतः नष्ट हो जाते है। सुख-समृद्धि का वास होता है। द्विपुष्कर योग का बना संयोग ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि, ‘पापमोचनी एकादशी पर आज रविवार को शुभकारी द्विपुष्कर योग का उत्तम संयोग बन रहा है। आज सुबह 08:47 बजे तक परिघ योग भी इसके बाद पूरे दिन शिव योग रहेगा।’ पापमोचनी एकादशी की कथा पदम् पुराण के अनुसार, राजा मंदता अपने पापों के कारण अत्यंत दुखी थे। उन्होंने ऋषि वशिष्ठ से मार्गदर्शन लेकर पापमोचनी एकादशी का व्रत किया। फिर राजा पाप मुक्त हो गए और उनका राज्य पुनः समृद्ध हो गया। इसके अलावा एक और कथा है कि भगवान विष्णु ने इस दिन दानव ‘पाप’ का विनाश किया, जिससे उनके अनुयायी पापों के भार से मुक्त हो गए। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस एकादशी कि महिमा के बारे बताया और कहा कि, इस व्रत के पालन से सबसे गंभीर पाप भी समाप्त हो जाते हैं। पापमोचनी एकादशी का महत्व पंडित झा के अनुसार, पापमोचनी एकादशी व्रत के महात्म्य भविष्योत्तर पुराण और हरिवासर पुराण में मिलता है। इस एकादशी के व्रत को करने मात्र से श्रद्धालु के सभी पापों के प्रभाव से छुटकारा मिल जाता है। पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से तीर्थ स्थानों पर विद्या ग्रहण एवं गौदान करने से भी अधिक पुण्य मिलता है। इस व्रत के प्रभाव से सभी सांसारिक सुखों का आनंद तथा अंत में श्रीहरि के स्वर्गिक साम्राज्य वैकुंठ में वास होता है। आज हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से साल की आखिरी एकादशी है। चैत्र कृष्ण पापमोचनी एकादशी का पर्व आज श्रवण नक्षत्र और परिघ योग के शुभ संयोग में मनायी जाएगी। पुराणों के अनुसार, किसी जातक से जाने-अनजाने में किए गये पापों का प्रायश्चित करने के लिए पापमोचनी एकादशी सबसे उत्तम व्रत है। इस व्रत को करने से साधक को उसके सभी पापों से मुक्त कर उसके लिए मोक्ष के मार्ग खुल जाता है। आज के दिन भगवान श्रीहरि की चतुर्भुज रूप में पूजा, विष्णु सहस्त्रनाम पाठ, गजेन्द्रमोक्ष, श्रीमद्भागवत, जाप करना शुभ रहेगा। पापमोचिनी एकादशी व्रत की महिमा ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि, ‘पापमोचिनी एकादशी व्रत करने से सहस्त्र गौदान का पुण्य के अलावे ब्रह्म हत्या, सुवर्ण चोरी, सुरापान और गुरुपत्नी गमन जैसे महापाप भी इस व्रत के प्रभाव से दूर हो जाते हैं। पद्म पुराण के अनुसार, पापमोचिनी एकादशी का व्रत करने से सर्व पाप स्वतः नष्ट हो जाते है। सुख-समृद्धि का वास होता है। द्विपुष्कर योग का बना संयोग ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि, ‘पापमोचनी एकादशी पर आज रविवार को शुभकारी द्विपुष्कर योग का उत्तम संयोग बन रहा है। आज सुबह 08:47 बजे तक परिघ योग भी इसके बाद पूरे दिन शिव योग रहेगा।’ पापमोचनी एकादशी की कथा पदम् पुराण के अनुसार, राजा मंदता अपने पापों के कारण अत्यंत दुखी थे। उन्होंने ऋषि वशिष्ठ से मार्गदर्शन लेकर पापमोचनी एकादशी का व्रत किया। फिर राजा पाप मुक्त हो गए और उनका राज्य पुनः समृद्ध हो गया। इसके अलावा एक और कथा है कि भगवान विष्णु ने इस दिन दानव ‘पाप’ का विनाश किया, जिससे उनके अनुयायी पापों के भार से मुक्त हो गए। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस एकादशी कि महिमा के बारे बताया और कहा कि, इस व्रत के पालन से सबसे गंभीर पाप भी समाप्त हो जाते हैं। पापमोचनी एकादशी का महत्व पंडित झा के अनुसार, पापमोचनी एकादशी व्रत के महात्म्य भविष्योत्तर पुराण और हरिवासर पुराण में मिलता है। इस एकादशी के व्रत को करने मात्र से श्रद्धालु के सभी पापों के प्रभाव से छुटकारा मिल जाता है। पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से तीर्थ स्थानों पर विद्या ग्रहण एवं गौदान करने से भी अधिक पुण्य मिलता है। इस व्रत के प्रभाव से सभी सांसारिक सुखों का आनंद तथा अंत में श्रीहरि के स्वर्गिक साम्राज्य वैकुंठ में वास होता है।  

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