US-Israel-Iran War: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद मिडिल-ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। इस युद्ध के कारण कई देश ऊर्जा संकट का सामना कर रहे हैं। भारत भी इस संकट से अछूता नहीं है। इस स्थिति से निपटने के लिए भारत ने एक अहम कदम उठाया है।
दरअसल, भारत ने फारस की खाड़ी के पास भारतीय नौसेना के कई युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। ये युद्धपोत भारत की ओर आने वाले व्यापारी जहाजों की सहायता के लिए स्टैंडबाय पर हैं। सूत्रों ने रविवार को इसकी पुष्टि की। सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना के युद्धपोत आवश्यकता पड़ने पर व्यापारी जहाजों को सहायता प्रदान करने के लिए तैयार हैं।
इससे पहले, एलपीजी (LPG) लेकर जा रहे दो भारतीय ध्वज वाले जहाजों को ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी गई थी। इनमें से एक शिवालिक है, जो जहाज यातायात निगरानी वेबसाइट के अनुसार आखिरी बार ओमान की खाड़ी में देखा गया था और इसके 21 मार्च तक अपने गंतव्य तक पहुंचने की उम्मीद है।
केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने शुक्रवार को फारस की खाड़ी क्षेत्र की समुद्री स्थिति और भारतीय नाविकों तथा जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में जानकारी दी। मंत्रालय के मुताबिक, फारस की खाड़ी में 24 भारतीय ध्वज वाले जहाज संचालित हो रहे थे, जिनमें 668 भारतीय नाविक मौजूद थे।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के पूर्व में तीन जहाजों पर अभी भी 76 भारतीय नाविक मौजूद हैं। मंत्रालय ने कहा कि डीजी शिपिंग जहाज मालिकों, RPSL एजेंसियों और भारतीय मिशनों के साथ समन्वय बनाए हुए है। सभी भारतीय जहाजों और उनके चालक दल की सक्रिय रूप से निगरानी की जा रही है।
दुनिया को ट्रंप पर दबाव डालना चाहिए
भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि ईरान कभी नहीं चाहता था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद किया जाए। उन्होंने कहा कि ईरान ने इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद नहीं किया है, लेकिन पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
इलाही ने कहा कि दुनिया के नेताओं को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव डालना चाहिए कि वे उनके देश के खिलाफ युद्ध रोकें, क्योंकि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण दुनिया भर के लोग प्रभावित हो रहे हैं।


