प्रदेश के पॉवर प्लांट्स को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानते हुए अब तक सरकारी कंपनियों से ही बीमा कराया गया। हर साल बिजली उत्पादन कंपनी आतंकी हमलों के नुकसान से बचने के लिए टेरिरिज्म कवर पॉलिसी भी अलग से लेती है। अब प्लांट्स के 41,852 करोड़ के बीमा में पहली बार निजी कंपनियों को भी शामिल कर लिया गया है। इस काम में प्राइवेट ब्रोकर को भी इन्वॉल्व किया जाएगा। राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड में ब्रोकरों की सक्रियता से तय बताया जा रहा है कि जिस कंपनी को इसकी जिम्मेदारी मिलेगी वह पहले से तय है। पूरे टेंडर प्रोसेस को निरस्त कर बदल दिया गया है। बीमा और भविष्य में क्लेम के लिए पॉवर प्लांट्स की संवेदनशील जानकारी बीमा कंपनी और ब्रोकर के साथ भी साझा करनी पड़ेगी। यह डेटा कितना सुरक्षित रहेगा इस पर भी सवाल खड़े हैं। अमरीका-ईरान युद्ध में अमरीका ने ईरान के बिजली संयंत्रों पर हमला करने की धमकी दी। इससे किसी भी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा में पावर प्लांट्स के महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है। बड़ा सवाल… 4 बार एक्सटेंड कर टेंडर बदल दिया, किसके लिए, बीमा कंपनियां या फिर ब्रोकर? हर साल कोटा, कालीसिंध, रामगढ़, धौलपुर, गिरल के एक-एक, सूरतगढ़ और छ़बड़ा के दो-दो सरकारी पावर प्लॉटों का बीमा कराया जाता है। साल 2026-27 के लिए हमेशा की तरह लिमिटेड टेंडर 20 नवंबर 2025 को निकला था। शर्त थी कि सरकारी बीमा कंपनियां ही शामिल हो सकती हैं। टेंडर की आखरी तारीख 23 दिसंबर थी। जिसे बाद में चार बार में 4 फरवरी 2026 तक बढ़ाया गया। फिर 2 फरवरी को अचानक पूरी प्रक्रिया ही निरस्त कर दी गई। ठीक अगले दिन 3 फरवरी को ओपन टेंडर निकाला गया। जिसमें निजी कंपनियां भी शामिल हुई। टेक्निकल बिड में सरकारी के साथ छह अन्य निजी कंपनियां भी योग्य मानी गई हैं। पिछली सरकार ने खारिज कर दिया था निजी कंपनियों को शामिल किए जाने का प्रस्ताव 2020-21 में भी चला था। जिसे प्लांट्स के रणनीतिक महत्व और सुरक्षा के मद्देनजर पिछली सरकार में खारिज कर दिया गया। हर साल एंटी टेरेरिज्म कवर अलग से जो काम पहले खुद करते थे, उसके लिए ब्रोकर को देंगे मोटी रकम पहली बार बीमा प्रोसेस में ब्रोकर की एंट्री हो रही है। बीमा और क्लेम की प्रक्रिया को पूरा कराना ब्रोकर के जिम्मे होगा। अब तक यह काम बिजली और बीमा कंपनी के अधिकारी ही किया करते आए हैं। इन प्लांट्स का न्यू इंडिया से 2021-22 में 42.82 करोड़ रु. में बीमा हुआ। जिसका 176.72 करोड़ रु. का क्लेम सरकारी अधिकारियों ने ही प्रोसेस किया था। नेशनल इंश्योरेंस से 2022-23 में 61.77 करोड़ रु. में बीमा के तहत 18.94 करोड़ रु. का क्लेम हुआ। 2025-26 में 63.47 करोड़ रु. बीमा के तहत 176.58 करोड़ रु. का क्लेम किया गया। आरआरवीयूएनएल ने 4 फरवरी को पहली बार इंश्योरेंस ब्रोकर के लिए भी निविदा निकाली। अमेरिकी कंपनी मार्श ने सीएमडी को रिप्रजेंटेशन दिया था। एक अन्य अमेरिकी कंपनी गैलाघर और भारतीय कंपनी सालासर ने भी रिप्रजेंटेशन दिए। भास्कर एक्सपर्ट- पी.एन. सिंघल, भूतपूर्व सीएमडी, आरवीयूएनएल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण इसीलिए सीआईएसएफ और बॉर्डर होमगार्ड के पास है पॉवर प्लांट्स की सिक्योरिटी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से हो पावर प्लांट्स बेहद महत्वपूर्ण है। इसी वजह से प्लांट की सुरक्षा सीआईएसएफ और बार्डर होमगार्ड के जिम्मे है। बीमा भी सरकारी कंपनियों से बिना ब्रोकर ही कराया जाता रहा है। गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट इंश्योरेंस होने पर प्रीमियम और क्लेम की राशि को लेकर किसी को भी अनावश्यक आपत्ति नहीं होती। निजी कंपनियों से क्लेम लेना काफी मुश्किल भरा हो सकता है। सीएमडी ने कहा- निजी कंपनियों के रिप्रजेंटेशन के चलते पहले एक्सटेंड, फिर निरस्त किया “लिमिटेड टेंडर के बाद निजी कंपनियां रिप्रजेंटेशन दे रही थी, इसलिए एक्सटेंड करते रहे। कई अन्य राज्यों में भी किया जा चुका है। ज्यादा प्रतियोगी प्रीमियम के लिए ओपन रखने का निर्णय किया। ओपन टेंडर करने के कारण टीम को मजबूत करने के लिए ब्रोकर भी रख रहे हैं।”
-देवेन्द्र शृंगी, सीएमडी, आरवीयूएनएल


