पटना| जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव और कृषि के समक्ष चुनौतियों पर एमिटी यूनिवर्सिटी में बिहार-झारखंड रीजनल पॉलिसी डायलॉग एंड अवॉर्ड-2026 का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन सस्टेनेबिलिटी मैटर्स, इंडीएग्री और एनजीओ एक्शन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि कृषि को आकर्षक बनाने की जरूरत है, ताकि नौजवान पीढ़ी कृषि की ओर अग्रसर हो। दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करने से बेहतर है कि वे बिहार में ही कृषि के क्षेत्र में काम करें। राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि वर्ष 2019 में बिहार देश का पहला राज्य बना, जहां जल-जीवन-हरियाली के अंतर्गत सतत कृषि की अवधारणा को मूर्त रूप देने का प्रयास किया गया। पिछले 20 वर्षों में चार कृषि रोडमैप के जरिए बिहार के कृषि क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन किए गए हैं। क्लाइमेट चेंज बड़ी समस्या है। बिहार में कहीं अत्यधिक सूखा पड़ता है तो कहीं अत्यधिक बाढ़ आती है। सस्टेनेबिलिटी मैटर्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. नवनीत आनंद ने कहा कि जलवायु परिवर्तन गंभीर वैश्विक चुनौती बन चुका है और इसका सीधा असर कृषि पर पड़ रहा है। पर्यावरण के अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के लिए सरकार, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत और किसानों को मिलकर काम करना होगा। पटना| जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव और कृषि के समक्ष चुनौतियों पर एमिटी यूनिवर्सिटी में बिहार-झारखंड रीजनल पॉलिसी डायलॉग एंड अवॉर्ड-2026 का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन सस्टेनेबिलिटी मैटर्स, इंडीएग्री और एनजीओ एक्शन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि कृषि को आकर्षक बनाने की जरूरत है, ताकि नौजवान पीढ़ी कृषि की ओर अग्रसर हो। दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करने से बेहतर है कि वे बिहार में ही कृषि के क्षेत्र में काम करें। राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि वर्ष 2019 में बिहार देश का पहला राज्य बना, जहां जल-जीवन-हरियाली के अंतर्गत सतत कृषि की अवधारणा को मूर्त रूप देने का प्रयास किया गया। पिछले 20 वर्षों में चार कृषि रोडमैप के जरिए बिहार के कृषि क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन किए गए हैं। क्लाइमेट चेंज बड़ी समस्या है। बिहार में कहीं अत्यधिक सूखा पड़ता है तो कहीं अत्यधिक बाढ़ आती है। सस्टेनेबिलिटी मैटर्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. नवनीत आनंद ने कहा कि जलवायु परिवर्तन गंभीर वैश्विक चुनौती बन चुका है और इसका सीधा असर कृषि पर पड़ रहा है। पर्यावरण के अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के लिए सरकार, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत और किसानों को मिलकर काम करना होगा।


