इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बदायूं स्थित मस्जिद में नमाज पढ़ने पर रोक लगाने वाले प्रशासनिक आदेश को रद कर दिया। कोर्ट ने कहा- निजी संपत्ति पर स्थित मस्जिद में नमाज पढ़ने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, और यह अधिकार मौलिक है। न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ तथा न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने अलीशेर और एक अन्य की याचिका निस्तारित करते हुए कहा कि अधिकारियों को मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोकने की अनुमति नहीं है। अगर कानून और व्यवस्था की समस्या होती है तो अधिकारियों को इसका समाधान करना होगा। याचिका में कहा-नमाज पढ़ने से रोका न जाए संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर इस याचिका में मांग की गई थी कि याची तथा मुस्लिम समुदाय को मस्जिद में नमाज पढ़ने से नहीं रोका जाए और सुरक्षा दें। मस्जिद गांव बेहट जावी तहसील बिलसी में वक्फ मस्जिद रजा के नाम से है और याची की संपत्ति पर है।
इसका खसरा नंबर 1081 (पुराना नंबर 432) है। याची के अधिवक्ता ने कहा कि निजी संपत्ति पर धार्मिक प्रार्थना सभा करने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। इस क्रम में इलाहाबाद हाई कोर्ट के मारानाथा फुल गॉस्पेल मिनिस्ट्रीज बनाम यूपी राज्य और अन्य का हवाला दिया गया। इसमें कहा गया है कि निजी संपत्ति पर धार्मिक गतिविधियों के लिए अनुमति की जरूरत नहीं है।


