गोरखपुर के खोराबार थाना पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े एक गिरोह का फर्दाफाश करते हुए चार जालसाजों को पकड़ लिया। यह गिरोह गांव की महिलाओं को अपना निशाना बनाते थे। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर उन्हें अपने जाल में फंसाते। फिर उनके नाम से खाते खुलवाते थे। बाद में उन खातों का इस्तेमाल कर साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाते थे। इसे यह यूसडीटी और बाद में क्रिप्टो करेंसी में बदल देते थे। शनिवार की देर शाम पुलिस ने इस गिरोह को पकड़ लिया और कोर्ट में पेश किया जहां से जेल भेज दिया गया। आरोपियों के पास से 10 मोबाइल फोन, दो सिम कार्ड, एक बैंक पासबुक, एक एटीएम कार्ड और तीन एटीएम की पर्चियां बरामद हुई है। पुलिस के अनुसार, यह सभी आरोपी साइबर ठगी के गिरोह से जुड़े हुए हैं। इनका एक पूरा नेटवर्क है, जिसका पता लगाया जा रहा है। करीब 98 लाख रुपए ठिकाने लगाए
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गीडा थाना क्षेत्र के नौसड़ निवासी वंश निषाद, रामगढ़ताल इलाके के तारामंडल निवासी शोभित गौड़, एम्स थाना क्षेत्र के महादेव झारखंडी निवासी शक्ति जायसवाल और एम्स इलाके के आवास विकास कॉलोनी निवासी शिवम पटवा के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार आरोपियों का मुख्य काम खाता खुलवाकर उसकी मदद से रुपए को ठिकाने लगाना था। हर खाते और ट्रांजेक्शन के पीछे इन्हें कमीशन मिलता था। गोरखपुर में अब तक पुलिस को 16 खाते मिले हैं, जिनका आरोपियों ने जालसाजी में इस्तेमाल किया था। इनके माध्यम से करीब 98 लाख रुपए ठिकाने लगाए गए हैं। सभी आरोपी कॉलेज पास आउट या स्नातक की पढ़ाई करने वाले हैं। यहां पर वंश ही इन्हें लीड करता था। आधार लेकर सिम निकलवाते थे
पुलिस की जांच में सामने आया है कि ये आरोपी ग्रामीण क्षेत्र में जाकर महिलाओं को टारगेट करते थे। उन्हें ये सरकार की योजनाओं के बारे में बताते थे और झांसा देते थे कि खाता खुलवा लिया तो उनको भी इन योजनाओं का लाभ मिलेगा। इसके लिए उन्हें एक भी रुपये खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके बाद वह उनसे आधार और पैन कार्ड लेकर रख लेते थे। आधार की मदद से सबसे पहले सिम कार्ड निकलवाते थे। इसके बाद बैंक में खाता खुलवाकर पासबुक और एटीएम कार्ड भी रख लेते थे। म्यूल खाते की तरह करते थे इस्तेमाल
दरअसल, साइबर ठगी के बाद जालसाज उस रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। ताकि पुलिस उन्हें जल्दी ट्रेस न कर सके। इसे म्यूल खाता कहा जाता है। गोरखपुर में मिले खातों को भी म्यूल अकाउंट के तौर पर इस्तेमाल करते थे। खाते में रुपए आने के बाद उसे एटीएम के माध्यम से निकाल लेते थे। इसके बाद इसे यूएसडीटी में बदलकर क्रिप्टो करेंसी में बदल देते थे। इससे यह पैसा आसानी से देश के बाहर चला जाता था। गिरोह की एक पूरी नेटवर्क चेन है। जिसमें अलग-अलग जगहों पर बैठे जालसाज वारदात को अंजाम देने से लेकर रुपए ठिकाने लगाने का काम करते हैं। पुलिस अब इस पूरी चेन की जांच कर रही है। ऐसे पकड़ा गया मामला
खोराबार थाना क्षेत्र के मदरहवा गांव निवासी रेनू पत्नी कृष्णा की शिकायत के बाद यह मामला पकड़ा गया है। 12 मार्च को रेनू ने पुलिस को बताया था कि शक्ति और शिवम पटवा ने उसे गरीब कल्याणकारी योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता और सिलाई मशीन दिलाने का आश्वासन दिया था। इसी बहाने उन्होंने बैंक में खाता खुलवाने के लिए उसका आधार कार्ड और पैन कार्ड ले लिया। आरोप है कि दोनों युवकों ने उसके दस्तावेजों के आधार पर इंडियन बैंक में खाता खुलवाया और आधार कार्ड से एक मोबाइल सिम भी निकलवा लिया। खाता खुलने के बाद पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड अपने पास ही रख लिया। जब रेनू ने योजनाओं का लाभ मिलने के बारे में पूछा तो आरोपियों ने बताया कि खाते से संबंधित दस्तावेज अपने एक साथी वंश निषाद को दे दिए हैं और जल्द ही योजना का लाभ मिल जाएगा। कुछ समय बाद जब रेनू बैंक पहुंची और खाते की जानकारी ली तो पता चला कि उसके खाते से लाखों रुपये का लेनदेन हो चुका है। जबकि उसने न तो खाते में कोई पैसा जमा किया और न ही कोई निकासी की थी। इसके बाद उसे अपने साथ हुई धोखाधड़ी का अहसास हुआ।


