Ahmedabad. शहर के सिविल अस्पताल में एक बार फिर मानवता की प्रेरक मिसाल देखने को मिली। एक सप्ताह में हुए दो अलग-अलग अंगदान के चलते चार लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगी है। रांची के 21 वर्षीय युवक के ब्रेनडेड होने पर उसके चार अंगों का दान किया गया। दूसरे मामले में अहमदाबाद के प्रौढ़ के निधन पर परिजनों ने उसकी दोनों आंखें और त्वचा का दान कर संवेदनशीलता का उदाहरण पेश किया।
पावागढ़ के पास हालोल स्थित एक निजी कंपनी में कार्यरत झारखंड निवासी राहुल मुंडा का ब्रेन हेमरेज होने पर उन्हें 12 मार्च को अहमदाबाद सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगले दिन डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इस कठिन समय में अस्पताल की अंगदान टीम के डॉ. मोहित चंपावत ने राहुल के परिवार को स्थिति की जानकारी दी और अंगदान के महत्व के बारे में समझाया। बेटे को खोने के बावजूद पिता रामूभाई ने मानवता का परिचय देते हुए राहुल के अंगदान का निर्णय किया। जिसके चलते राहुल का एक लीवर, एक पैंक्रियाज और दो किडनी प्राप्त हुई हैं, जिनसे चार जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिलेगा। इन अंगों का प्रत्यारोपण सिविल मेडिसिटी कैंपस स्थित किडनी अस्पताल में किया जाएगा।
उधर अहमदाबाद के गीता मंदिर क्षेत्र के जयेश चावड़ा (52) का उपचार के दौरान निधन हो गया। दुख की इस घड़ी में भी परिवार ने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए उनकी दोनों आंखें और त्वचा दान करने का निर्णय लिया। सिविल अस्पताल के काउंसलर जितेंद्र पुवार के मार्गदर्शन में परिवार ने इस मानवीय कार्य के लिए सहमति दी। 12 मार्च को सफलतापूर्वक आंखों और त्वचा का दान लिया गया, जिससे कई मरीजों को लाभ मिलेगा।
अब तक दान में मिले 989 अंगसिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि अंगदान, आंखों व त्वचा के दान से कई मरीजों के लिए जीवन की नई किरण पैदा हुई है। अस्पताल में अब तक 421 किडनी, 203 लिवर, 73 हृदय, 34 फेफड़े, 19 पैंक्रियाज, 2 छोटी आंत, 6 हाथ, 41 त्वचा और 190 आंखें मिलाकर कुल 989 अंग और पेशियों का दान प्राप्त हो चुका है। अस्पताल द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम समाज में देखने को मिल रहे हैं।


