मुजफ्फरपुर में बाल श्रम उन्मूलन पर कार्यशाला आयोजित:राज्य रणनीति-काम योजना 2025 पर हुई चर्चा; बच्चों के देखभाल का निरीक्षण करती संस्था

मुजफ्फरपुर में बाल श्रम उन्मूलन पर कार्यशाला आयोजित:राज्य रणनीति-काम योजना 2025 पर हुई चर्चा; बच्चों के देखभाल का निरीक्षण करती संस्था

मुजफ्फरपुर के संयुक्त श्रम भवन, गन्निपुर स्थित उप श्रम आयुक्त कार्यालय के सभागार में बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन और पुनर्वास पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य रणनीति और कार्य योजना 2025 पर विस्तृत चर्चा करना था। इस प्रमंडल स्तरीय कार्यक्रम में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, वैशाली, शिवहर, पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) और पश्चिमी चंपारण (बेतिया) जिलों में पदस्थापित सभी प्रखंडों के श्रम प्रवर्तन अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यशाला के संयोजक, उप श्रम आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर ने प्रतिभागियों को बताया कि बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन के लिए राज्य कार्य योजना 2025 लागू की गई है। इस योजना के तहत बाल और किशोर श्रम से संबंधित कार्यों के लिए 18 विभागों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। संशोधित 2016 के बारे में विस्तार से बताया कार्यशाला में राज्य कार्य योजना 2025 में दिए गए प्रावधानों और बाल एवं किशोर श्रम से संबंधित विभिन्न कानूनों की विस्तृत जानकारी सभी हितधारकों को प्रदान की गई। उप श्रमायुक्त ने विशेष रूप से बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 और यथा संशोधित 2016 के बारे में विस्तार से बताया। उप श्रम आयुक्त ने बताया कि बच्चों का स्थान स्कूल में है, खेल के मैदान में है ना कि किसी होटल, ढाबा, मोटर गैरेज, फैक्ट्री आदि में, शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत 14 साल तक के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा का अधिकार हासिल है और हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है कि सभी बच्चों को शिक्षा प्राप्त हो और उनका बचपन सुरक्षित रहे ताकि वो आगे चलकर इस देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनें और देश एवं समाज के विकास में अपनी भागीदारी दें। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉक्टर रश्मि राज, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, मुरौल की ओर से किया गया। अध्यक्ष/सदस्य बाल कल्याण समिति की ओर से बताया गया कि बाल कल्याण समिति किशोर न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत गठित एक जिला-स्तरीय वैधानिक संस्था है। इसका मुख्य कार्य जरूरतमंद बच्चों (अनाथ, परित्यक्त, दुर्व्यवहार के शिकार) के कल्याण, पुनर्वास, सुरक्षा और उनके सर्वाेत्तम हितों की रक्षा करना है। बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए सीडब्ल्यूसी जरूरतमंद बच्चों के मामलों की जांच करती है, उन्हें बाल देखभाल संस्थानों, फोस्टर केयर (पालक देखभाल), या गोद लेने के लिए योग्य घोषित कर पुनर्वास करती है। बच्चों को आश्रय देना समिति बच्चों के लिए तत्काल सुरक्षा और आश्रय, शिक्षा, स्वास्थ्य, और भावनात्मक सहयोग सुनिश्चित करती है। परिदृश्य का मूल्यांकन और निर्णयरू बच्चे के परिवार की सामाजिक जांच रिपोर्ट के आधार पर, यह निर्धारित करना कि बच्चा परिवार के साथ रहने के लिए सुरक्षित है या उसे संस्थागत देखभाल की आवश्यकता है। संस्थानों का नियमित निरीक्षण करती है संस्थाओं की निगरानी बाल कल्याण समिति अपने जिले के सभी बच्चों के देखभाल संस्थानों का नियमित निरीक्षण करती है ताकि बच्चों के साथ दुर्व्यवहार न हो। परिवार में पुनर्मिलन यदि संभव हो तो, जांच के बाद बच्चे को उसके माता-पिता या रिश्तेदारों के साथ पुनर्मिलन कराना, यह सुनिश्चित करने के बाद कि वह वहां सुरक्षित है। गोद लेने की प्रक्रियारू परित्यक्त बच्चों को कानूनी रूप से गोद लेने के लिए स्वतंत्र घोषित करना। मुजफ्फरपुर के संयुक्त श्रम भवन, गन्निपुर स्थित उप श्रम आयुक्त कार्यालय के सभागार में बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन और पुनर्वास पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य रणनीति और कार्य योजना 2025 पर विस्तृत चर्चा करना था। इस प्रमंडल स्तरीय कार्यक्रम में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, वैशाली, शिवहर, पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) और पश्चिमी चंपारण (बेतिया) जिलों में पदस्थापित सभी प्रखंडों के श्रम प्रवर्तन अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यशाला के संयोजक, उप श्रम आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर ने प्रतिभागियों को बताया कि बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन के लिए राज्य कार्य योजना 2025 लागू की गई है। इस योजना के तहत बाल और किशोर श्रम से संबंधित कार्यों के लिए 18 विभागों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। संशोधित 2016 के बारे में विस्तार से बताया कार्यशाला में राज्य कार्य योजना 2025 में दिए गए प्रावधानों और बाल एवं किशोर श्रम से संबंधित विभिन्न कानूनों की विस्तृत जानकारी सभी हितधारकों को प्रदान की गई। उप श्रमायुक्त ने विशेष रूप से बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 और यथा संशोधित 2016 के बारे में विस्तार से बताया। उप श्रम आयुक्त ने बताया कि बच्चों का स्थान स्कूल में है, खेल के मैदान में है ना कि किसी होटल, ढाबा, मोटर गैरेज, फैक्ट्री आदि में, शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत 14 साल तक के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा का अधिकार हासिल है और हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है कि सभी बच्चों को शिक्षा प्राप्त हो और उनका बचपन सुरक्षित रहे ताकि वो आगे चलकर इस देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनें और देश एवं समाज के विकास में अपनी भागीदारी दें। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉक्टर रश्मि राज, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, मुरौल की ओर से किया गया। अध्यक्ष/सदस्य बाल कल्याण समिति की ओर से बताया गया कि बाल कल्याण समिति किशोर न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत गठित एक जिला-स्तरीय वैधानिक संस्था है। इसका मुख्य कार्य जरूरतमंद बच्चों (अनाथ, परित्यक्त, दुर्व्यवहार के शिकार) के कल्याण, पुनर्वास, सुरक्षा और उनके सर्वाेत्तम हितों की रक्षा करना है। बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए सीडब्ल्यूसी जरूरतमंद बच्चों के मामलों की जांच करती है, उन्हें बाल देखभाल संस्थानों, फोस्टर केयर (पालक देखभाल), या गोद लेने के लिए योग्य घोषित कर पुनर्वास करती है। बच्चों को आश्रय देना समिति बच्चों के लिए तत्काल सुरक्षा और आश्रय, शिक्षा, स्वास्थ्य, और भावनात्मक सहयोग सुनिश्चित करती है। परिदृश्य का मूल्यांकन और निर्णयरू बच्चे के परिवार की सामाजिक जांच रिपोर्ट के आधार पर, यह निर्धारित करना कि बच्चा परिवार के साथ रहने के लिए सुरक्षित है या उसे संस्थागत देखभाल की आवश्यकता है। संस्थानों का नियमित निरीक्षण करती है संस्थाओं की निगरानी बाल कल्याण समिति अपने जिले के सभी बच्चों के देखभाल संस्थानों का नियमित निरीक्षण करती है ताकि बच्चों के साथ दुर्व्यवहार न हो। परिवार में पुनर्मिलन यदि संभव हो तो, जांच के बाद बच्चे को उसके माता-पिता या रिश्तेदारों के साथ पुनर्मिलन कराना, यह सुनिश्चित करने के बाद कि वह वहां सुरक्षित है। गोद लेने की प्रक्रियारू परित्यक्त बच्चों को कानूनी रूप से गोद लेने के लिए स्वतंत्र घोषित करना।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *