कैंसर, डेंगू पर वैज्ञानिकों ने साझा किए शोध:CSJMU में अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस, ग्लूकोमा इलाज पर भी हुई चर्चा

कैंसर, डेंगू पर वैज्ञानिकों ने साझा किए शोध:CSJMU में अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस, ग्लूकोमा इलाज पर भी हुई चर्चा

शहर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज़ में चल रही दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस सम्मेलन में देश-विदेश के 300 से ज्यादा वैज्ञानिकों, शिक्षकों और शोधार्थियों ने हिस्सा लिया और स्वास्थ्य सेवाओं में आ रहे नए बदलावों पर मंथन किया। ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिक बोले- जीन थेरेपी से संभव है ग्लूकोमा का इलाज कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया के डॉ. नितिन चित्रांशी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। उन्होंने आंखों की गंभीर बीमारी ‘ग्लूकोमा’ के आधुनिक उपचार पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में जीन थेरेपी और पेप्टाइड आधारित ड्रग डिलीवरी सिस्टम आंखों के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे। वहीं, पिलानी से जुड़े डॉ. राजीव तालियान ने दिमाग से जुड़ी बीमारियों (न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग) के लिए उन्नत आणविक उपचार रणनीतियों पर अपना व्याख्यान दिया। औषधीय पौधों से बनेगा कैंसर और डेंगू का पक्का इलाज जम्मू से आए डॉ. शशांक सिंह ने बताया कि कैसे प्राकृतिक उत्पादों और औषधीय पौधों से कैंसर जैसी घातक बीमारी की दवाएं तैयार की जा सकती हैं। इसी क्रम में लखनऊ के डॉ. च. वी. राव ने डेंगू वायरस के खिलाफ पौधों से प्राप्त नए फाइटोमॉलिक्यूल्स की एंटीवायरल क्षमता पर अपना शोध प्रस्तुत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाले ये तत्व भविष्य में डेंगू की प्रभावी दवा बनाने में मददगार साबित होंगे। तनाव और लाइफस्टाइल बीमारियों पर भी हुई चर्चा सीडीआरआई लखनऊ के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. राकेश मौर्य ने वर्तमान समय में बढ़ते तनाव और खराब जीवनशैली से होने वाले रोगों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पारंपरिक औषधीय ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़कर ही इन समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। वहीं, सीमैप (CIMAP) के डॉ. कपिल देव ने सुगंधित और औषधीय पौधों के संरक्षण और उनके औद्योगिक उपयोग पर जोर दिया। शोधार्थियों और छात्रों को मिले पुरस्कार कॉन्फ्रेंस के समापन पर शोध पत्र और पोस्टर प्रेजेंटेशन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार दिए गए। इसके अलावा छात्रों के लिए ‘फार्मा क्विज’ का भी आयोजन किया गया, जिसमें विजेताओं को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. शशि किरण मिश्रा, डॉ. निशा शर्मा और डॉ. स्वर्णाक्षी उपाध्याय की टीम ने किया।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *