खगड़िया में गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें:पुलिस निगरानी में सिलेंडर बंटा, होटल-रेस्टोरेंट कोयले और लकड़ी का ले रहे सहारा

खगड़िया में गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें:पुलिस निगरानी में सिलेंडर बंटा, होटल-रेस्टोरेंट कोयले और लकड़ी का ले रहे सहारा

अमेरिका, इजराइल और इरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। एलपीजी गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से कई राज्यों में उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसका असर बिहार के जिलों में भी साफ नजर आ रहा है। खगड़िया जिले में गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं और लोगों को घंटों इंतजार के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। कई जगहों पर पुलिस की निगरानी में गैस सिलेंडर का वितरण कराया जा रहा है, ताकि भीड़ और अफरातफरी की स्थिति उत्पन्न न हो। परबत्ता गैस एजेंसी पर सुबह से लगी लंबी लाइन जिले के परबत्ता क्षेत्र स्थित गैस एजेंसी पर शनिवार सुबह से ही उपभोक्ताओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। लोग खाली सिलेंडर लेकर एजेंसी के बाहर कतार में खड़े दिखाई दिए। कई लोग सुबह-सुबह ही एजेंसी पहुंच गए, ताकि उन्हें जल्दी सिलेंडर मिल सके, लेकिन भीड़ इतनी अधिक थी कि घंटों इंतजार करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से गैस की आपूर्ति कम हो रही है, जिसके कारण एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है। सिलेंडर मिलने की अनिश्चितता के कारण लोग पहले से ही लाइन में लग जा रहे हैं। प्रशासन की नजर, अधिकारियों ने किया निरीक्षण स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क हो गया है। बीती रात गोगरी अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार और परबत्ता प्रखंड विकास पदाधिकारी संतोष कुमार पंडित ने गैस गोदाम और एजेंसी का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने एजेंसी संचालकों से आपूर्ति की स्थिति की जानकारी ली और उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके बाद शनिवार सुबह से परबत्ता थाना अध्यक्ष की निगरानी में गैस सिलेंडर का वितरण कराया जा रहा है, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। गैस नहीं मिलने से बढ़ी लोगों की परेशानी गैस की कमी का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ने लगा है। कई परिवारों को खाना बनाने में परेशानी हो रही है। स्थानीय आंगनवाड़ी केंद्र से गैस सिलेंडर भरवाने आए प्रियम कुमार ने बताया कि केंद्र पर बच्चों के लिए खाना बनाने के लिए गैस उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन दिनों से लगातार एजेंसी के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक सिलेंडर नहीं मिल पाया है। इससे आंगनवाड़ी केंद्र में भोजन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। वहीं नयागांव निवासी अंशुमान कुमार ने बताया कि उन्होंने चार दिन पहले ही गैस की बुकिंग कराई थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सिलेंडर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि रोज एजेंसी का चक्कर लगा रहे हैं और घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। लकड़ी और कोयले का सहारा लेने लगे लोग एलपीजी गैस की कमी का असर अब बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ छोटे व्यवसायियों और होटल संचालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एलपीजी उपलब्ध नहीं होने के कारण लोग विकल्प के तौर पर लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल करने लगे हैं। इससे बाजार में इनकी मांग बढ़ गई है और कीमतों में भी इजाफा देखा जा रहा है। होटल-रेस्टोरेंट में कोयले की भट्टी पर बन रहा खाना गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय पर पड़ा है। कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिलने से कई होटल संचालकों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है। स्थानीय रेस्टोरेंट संचालक सुमित कुमार ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से कॉमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि मजबूरी में होटल में कोयले की भट्टी लगाकर खाना बनाया जा रहा है। इससे काम भी धीमा हो गया है और खर्च भी बढ़ गया है। आपूर्ति सामान्य होने का इंतजार गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि आपूर्ति में कमी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। जैसे ही एलपीजी की सप्लाई सामान्य होगी, स्थिति भी धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी। फिलहाल प्रशासन की निगरानी में सीमित मात्रा में सिलेंडर का वितरण किया जा रहा है, ताकि सभी उपभोक्ताओं को किसी न किसी तरह राहत मिल सके। वहीं उपभोक्ता उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य होगी और उन्हें इस परेशानी से छुटकारा मिलेगा। अमेरिका, इजराइल और इरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। एलपीजी गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से कई राज्यों में उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसका असर बिहार के जिलों में भी साफ नजर आ रहा है। खगड़िया जिले में गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं और लोगों को घंटों इंतजार के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। कई जगहों पर पुलिस की निगरानी में गैस सिलेंडर का वितरण कराया जा रहा है, ताकि भीड़ और अफरातफरी की स्थिति उत्पन्न न हो। परबत्ता गैस एजेंसी पर सुबह से लगी लंबी लाइन जिले के परबत्ता क्षेत्र स्थित गैस एजेंसी पर शनिवार सुबह से ही उपभोक्ताओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। लोग खाली सिलेंडर लेकर एजेंसी के बाहर कतार में खड़े दिखाई दिए। कई लोग सुबह-सुबह ही एजेंसी पहुंच गए, ताकि उन्हें जल्दी सिलेंडर मिल सके, लेकिन भीड़ इतनी अधिक थी कि घंटों इंतजार करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से गैस की आपूर्ति कम हो रही है, जिसके कारण एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है। सिलेंडर मिलने की अनिश्चितता के कारण लोग पहले से ही लाइन में लग जा रहे हैं। प्रशासन की नजर, अधिकारियों ने किया निरीक्षण स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क हो गया है। बीती रात गोगरी अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार और परबत्ता प्रखंड विकास पदाधिकारी संतोष कुमार पंडित ने गैस गोदाम और एजेंसी का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने एजेंसी संचालकों से आपूर्ति की स्थिति की जानकारी ली और उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके बाद शनिवार सुबह से परबत्ता थाना अध्यक्ष की निगरानी में गैस सिलेंडर का वितरण कराया जा रहा है, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। गैस नहीं मिलने से बढ़ी लोगों की परेशानी गैस की कमी का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ने लगा है। कई परिवारों को खाना बनाने में परेशानी हो रही है। स्थानीय आंगनवाड़ी केंद्र से गैस सिलेंडर भरवाने आए प्रियम कुमार ने बताया कि केंद्र पर बच्चों के लिए खाना बनाने के लिए गैस उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन दिनों से लगातार एजेंसी के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक सिलेंडर नहीं मिल पाया है। इससे आंगनवाड़ी केंद्र में भोजन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। वहीं नयागांव निवासी अंशुमान कुमार ने बताया कि उन्होंने चार दिन पहले ही गैस की बुकिंग कराई थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सिलेंडर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि रोज एजेंसी का चक्कर लगा रहे हैं और घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। लकड़ी और कोयले का सहारा लेने लगे लोग एलपीजी गैस की कमी का असर अब बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ छोटे व्यवसायियों और होटल संचालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एलपीजी उपलब्ध नहीं होने के कारण लोग विकल्प के तौर पर लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल करने लगे हैं। इससे बाजार में इनकी मांग बढ़ गई है और कीमतों में भी इजाफा देखा जा रहा है। होटल-रेस्टोरेंट में कोयले की भट्टी पर बन रहा खाना गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय पर पड़ा है। कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिलने से कई होटल संचालकों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है। स्थानीय रेस्टोरेंट संचालक सुमित कुमार ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से कॉमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि मजबूरी में होटल में कोयले की भट्टी लगाकर खाना बनाया जा रहा है। इससे काम भी धीमा हो गया है और खर्च भी बढ़ गया है। आपूर्ति सामान्य होने का इंतजार गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि आपूर्ति में कमी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। जैसे ही एलपीजी की सप्लाई सामान्य होगी, स्थिति भी धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी। फिलहाल प्रशासन की निगरानी में सीमित मात्रा में सिलेंडर का वितरण किया जा रहा है, ताकि सभी उपभोक्ताओं को किसी न किसी तरह राहत मिल सके। वहीं उपभोक्ता उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य होगी और उन्हें इस परेशानी से छुटकारा मिलेगा।  

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