तरनतारन सिविल अस्पताल के बाहर ही बिकती प्रतिबंधित दवाएं:राहगीरों को रोककर पूछा जाता है ‘कौन सा सामान चाहिए’, कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप

तरनतारन सिविल अस्पताल के बाहर ही बिकती प्रतिबंधित दवाएं:राहगीरों को रोककर पूछा जाता है ‘कौन सा सामान चाहिए’, कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप

सिविल अस्पताल के बाहर प्रतिबंधित दवाएं और नशीले पदार्थ खुलेआम बेचे जा रहे हैं। अस्पताल के गेट के पास कुछ लोग राहगीरों को रोककर उनसे पूछते हैं कि उन्हें ‘कौन सा सामान चाहिए’। यह सिलसिला नया नहीं है, बल्कि लंबे समय से प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा है। ये लोग भिखारी नहीं, बल्कि प्रतिबंधित गोलियां और कैप्सूल बेचने वाले हैं। यह जिला स्तरीय सिविल अस्पताल 150 बिस्तरों पर आधारित है। इसी परिसर में सिविल सर्जन कार्यालय, ड्रग इंस्पेक्टर कार्यालय, नशा मुक्ति केंद्र, डिप्टी मेडिकल अधिकारी (डीएमसी) और जिला परिवार कल्याण विभाग सहित कई अन्य अधिकारियों के कार्यालय भी स्थित हैं। जिले भर में चलाए जा रहे ओट सेंटरों और नशा मुक्ति केंद्रों के मरीजों के लिए सरकारी दवाइयों का स्टॉक यहीं से जारी किया जाता है।
कर्मचारियों की मिलीभगत से हो रही है दवाइयों की हेराफेरी सूत्रों के अनुसार, पिछले करीब छह माह से उक्त केंद्र से कुछ कर्मचारी कथित तौर पर दवाइयों की हेराफेरी कर उन्हें बाहर बेच रहे हैं। जीवन रक्षक दवाइयों की आड़ में प्रतिबंधित दवाइयां अधिक मात्रा में बाहर बेची जाती हैं। ओट सेंटर में तैनात कुछ स्टाफ कर्मी जाली आईडी के आधार पर सेंटर से दवाइयां लेकर बाहर बेचते हैं। प्रशासन की नाक के नीचे फल-फूल रहा है नशे का अवैध कारोबार अस्पताल के मुख्य गेट से लेकर पोस्टमार्टम हाउस जाने वाले रास्ते के बीच प्रतिबंधित दवाएं सरेआम बेची जाती हैं। प्रेगाबेलिन कैप्सूल का एक पत्ता 200 रुपये में, जबकि ट्रामाडोल का पत्ता 500 रुपये में हाथों-हाथ बिकता है। इस क्षेत्र में ई-रिक्शा की अधिकता के कारण भीड़ बनी रहती है, जिसका फायदा उठाकर राहगीरों को रोककर पूछा जाता है कि ‘केहड़ा सामान चाइदा’। प्रतिबंधित दवाइयों के साथ-साथ चिट्टे के नग भी 300 रुपये प्रति नग बेचे जाते हैं। कुल मिलाकर, प्रशासन की नाक के नीचे नशे का यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है, जो स्थानीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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