प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर परिवर्तन यात्रा और एसआइआर से संबंधित हमले किए जाने का आरोप लगाया और कहा कि लोगों का टीएमसी के प्रति रुख अब जनता की राय से जनता के गुस्से में बदल चुका है। बंगाल की जनता किसी भी हमले या बंटवारे के सामने सिर नहीं झुका सकती।
संवाददाता सम्मलेन में कहा
कोलकाता. प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर परिवर्तन यात्रा और एसआइआर से संबंधित हमले किए जाने का आरोप लगाया और कहा कि लोगों का टीएमसी के प्रति रुख अब जनता की राय से जनता के गुस्से में बदल चुका है। बंगाल की जनता किसी भी हमले या बंटवारे के सामने सिर नहीं झुका सकती। शमीक ने यह भी कहा कि टीएमसी इस चुनाव में बाहर हो चुकी है, वे पश्चिम बंगाल के लोगों के दिल और दिमाग में नहीं हैं, और भाजपा को यह नहीं लगता कि टीएमसी के हर प्रतिक्रिया का जवाब देना जरूरी है क्योंकि राजनीतिक पार्टियां जनता द्वारा चलायी जाती हैं, लेकिन जनता ने टीएमसी से रुचि खो दी है।
लोगों ने दिल से स्वागत किया
राज्यसभा सांसद शमीक भट्टाचार्य ने साल्ट लेक पार्टी कार्यालय में शुक्रवार को आयोजित संवाददाता सम्मलेन में पत्रकारों से कहा कि 237 विधानसभा क्षेत्रों से भाजपा की परिवर्तन यात्रा गुजरी। उन्होंने बताया कि 2011 के बाद कुछ विधानसभा क्षेत्रों में जहां सत्ताधारी पार्टी का वोटबैंक है, वहां भी लोगों ने इस यात्रा का दिल से स्वागत किया। उनकी मुख्य मांग यह है कि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से और गिनती निष्पक्ष तरीके से हो।
विभाजनकारी राजनीति का प्रदर्शन किया
भाजपा नेता ने कहा, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सबसे उच्च स्तर की विभाजनकारी राजनीति का प्रदर्शन किया है। टीएमसी जो राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रही है, वह एलपीजी से संबंधित है, जबकि केंद्र सरकार पहले ही इसके लिए दिशा-निर्देश दे चुकी है। राज्य की जनता जानती है कि मध्य-पूर्व में क्या हो रहा है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहले ही कहा था कि प्रधानमंत्री ने कूटनीतिक तरीके से एक वैकल्पिक रास्ता निकाला है, जिसके माध्यम से पेट्रोलियम और गैस भारत लाए जाएंगे। उन्होंने राज्य में आलू उत्पादकों की खराब स्थिति की आलोचना की और कहा कि राज्य में आलू उत्पादक लगातार आत्महत्या कर रहे हैं। इसके बावजूद मुख्यमंत्री कह रही हैं कि किसानों को तीन गुना भुगतान बढ़ा दिया गया है। अगर स्थिति ऐसी है तो क्यों गांव-गांव में पुरुषों की कमी हो रही है?


