Harish Rana : इच्छा मृत्यु वाले हरीश राणा को ‘जिंदा’ करने पहुंचे बाबा, 41 साल के अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर ने बताया दावे का सच

Harish Rana : इच्छा मृत्यु वाले हरीश राणा को ‘जिंदा’ करने पहुंचे बाबा, 41 साल के अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर ने बताया दावे का सच

Harish Rana Passive Euthanasia Case : “हरीश राणा जैसे युवा को भला कौन मरता देखना चाहता होगा! जो भी खबर सुनता होगा, जीने की दुआएं करता होगा। ऐसे में आयुर्वेदिक इलाज को आजमाने में क्या हर्ज है…।” ये बात वैद्यारत्नम डॉ. राकेश अग्रवाल (41 वर्ष का अनुभव) ने पत्रिका के साथ बातचीत में कही। दरअसल, राजस्थान के एक बाबा हरीश राणा का जड़ी-बूटी से इलाज करने गाजियाबाद पहुंचे और इच्छा मृत्यु वाले हरीश को फिर से ‘जिंदा’ करने का दावा किया। इस बात की सच्चाई जानने के लिए हमने प्रसिद्ध आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. अर्जुन राज और डॉ. अग्रवाल से बात की। आइए, जानते हैं कि क्या आयुर्वेद में ब्रेन डेड मरीज को जिंदा करना संभव है क्या?

जड़ी-बूटियों से जी सकता है हरीश राणा – अखंडानंद बाबा

भीलवाड़ा से 62 साल के अखंडानंद बाबा गाजियाबाद पहुंचे। उनका कहना है कि उनके पास जड़ी-बूटियों से बनी पुड़ियां हैं। बाबा का दावा है कि इन दवाओं को एम्स के डॉक्टर से चेक करा लें और उसके बाद हरीश को दें। इससे नसें और मृत अंग काम करना शुरू कर सकते हैं।

हरीश राणा को जिंदा करने के दावा पर आयुर्वेदिक डॉक्टर की राय

डॉ. अग्रवाल के मुताबिक, वो बाबा किस दवा या जड़ी की बात कर रहे हैं वो हमें पता नहीं। हां, लेकिन हमारे भारत भूमि की कई जड़ियां जीवनदायिनी हैं। आयुर्वेद में पंचकर्म से लेकर ऐसे कई इलाज हैं जिनके जरिए कोमा में पड़े शख्स का इलाज किया जा सकता है।

ब्रेन डेड को भी जिंदा कर सकता है आयुर्वेदिक इलाज- डॉ. राज

डॉ. राज कहते हैं, मस्तिष्क कोशिका रसायन चिकित्सा, पंचकर्म विशेषकर नस्यम विधि से सालों से कोमा में पड़े मरीज को स्वस्थ किया जा सकता है। इस विधि से इलाज में भी समय लगता है। ये बात मरीज की अवस्था पर निर्भर करता है। ये बात सही है कि आयुर्वेद में कोमा में पड़े व्यक्ति का इलाज संभव है।

उदाहरण के तौर पर केरल के कई आयुर्वेद अस्पताल में चोट के बाद कोमा में पहुंचे व्यक्ति का पंचकर्मा से इलाज किया जाता है। ऐसे कितने मरीज हैं जो आयुर्वेदिक चिकित्सा से स्वस्थ हो रहे हैं।

हरीश के पिता को कोई उम्मीद नहीं!

Harish Rana father emotional no hope for son

हालांकि, हरीश के पिता अशोक राणा ने ये साफ कर दिया है कि वो दवा-दुआ हर कुछ करा चुके हैं। इसके बावजूद भी कोई असर नहीं हुआ। एम्स, नई दिल्ली के डॉक्टरों ने कहा है कि उनके बेटे की दिमाग की नसें मर चुकी हैं। अब वो बेटे के अंतिम पल का इंतजार कर रहे हैं। यहां तक कि हरीश के माता-पिता ने बेटे के अंगों को दान करने का भी फैसला ले लिया है।

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