सपा की पॉलिटिक्स में मुस्लिम-यादव के बाद ब्राह्मण:यूपी में नेता कह रहे- अखिलेश CM बने तो ब्राह्मणों को खोया सम्मान फिर मिलेगा

सपा की पॉलिटिक्स में मुस्लिम-यादव के बाद ब्राह्मण:यूपी में नेता कह रहे- अखिलेश CM बने तो ब्राह्मणों को खोया सम्मान फिर मिलेगा

‘सरकार के तानाशाही रवैये से ब्राह्मण भयभीत हैं। ब्राह्मणों को एकजुट होकर 2027 में अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना चाहिए, इससे ब्राह्मणों का खोया हुआ सम्मान दोबारा वापस मिल सकेगा।’ – माता प्रसाद पांडेय, नेता प्रतिपक्ष, 9 मार्च, अयोध्या ‘19 अप्रैल को परशुराम जंयती पर छुट्‌टी करनी चाहिए। अखिलेश यादव ने इस दिन राजकीय अवकाश घोषित किया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने निरस्त कर दिया है। इससे ब्राह्मण समाज में नाराजगी है।’ – कमाल अख्तर, सपा विधायक, 20 फरवरी, विधानसभा ये दो बयान जताने के लिए काफी हैं कि सपा की पॉलिटिक्स की धुरी में M-Y यानी मुस्लिम-यादव फैक्टर के साथ ब्राह्मण वोटर भी आ चुके हैं। पहले UGC गाइडलाइंस, फिर माघ मेला में शंकराचार्य के अपमान से ब्राह्मणों की नाराजगी सबके सामने आ चुकी है। यही वजह है कि सपा सांसद-विधायक विधानसभा से लेकर जिलों के दौरों में ब्राह्मण अधिकारों की बातें करने लगे हैं। इसकी 2 वजह समझ आती हैं। तो क्या वाकई ब्राह्मण वोटर भाजपा से खिसक सकते हैं? क्या ब्राह्मण अखिलेश यादव का साथ दे सकते हैं? क्या पिछले वोटर की राजनीति करने वाली सपा को नुकसान हो सकता है? इन सब सवालों के जवाब इस खबर में तलाशेंगे। पढ़िए रिपोर्ट… PDA की सियासत से सपा फायदे में रही
यूपी में 2022 के विधानसभा चुनाव से ही सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक की राजनीति करते आ रहे हैं। इसका उन्हें विधानसभा चुनाव 2022 में फायदा भी हुआ। इसे दो तरह से समझते हैं… 1. सीटों में फायदा यानी सपा ने 78 सीटों का सीधा फायदा हासिल किया और प्रदेश में मजबूत विपक्ष बन गई। 2. वोट शेयर में बढ़ोतरी सपा का वोट शेयर करीब 32% के आसपास पहुंच गया, जबकि 2017 में सपा को 21.8% वोट मिले थे। यह बढ़ोतरी ओबीसी और मुस्लिम वोटों के साथ दलित वोटों के शिफ्ट होने से हुई मानी गई थी। अब लोकसभा चुनाव में सपा का ग्राफ कैसे बढ़ा, ये जानिए सपा क्यों स्ट्रैटजी बदल रही, ये पढ़िए
सपा ने लोकसभा चुनाव-2024, PDA और संविधान बदलाव रोकने की स्ट्रैटजी के साथ लड़ा और फायदे में रही। मगर, यूपी में 18 जनवरी, 2026 को माघ मेला के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को जब प्रशासन ने गंगा घाट तक पालकी से जाने पर रोक दिया। इसके बाद धक्का-मुक्की और प्रदर्शन हुए, शंकराचार्य खुद ही धरने पर बैठ गए। पुलिस ने बटुकों को खींचकर अलग किया। एक बटुक की चोटी पकड़कर खींचते हुए तस्वीरें सामने आईं। यहीं, वो घटनाक्रम था, जिसने सपा को रणनीति में बदलाव करने पर मजबूर किया। क्योंकि, इससे पहले UGC के नियमों में हुए बदलाव से सवर्ण वोटर नाराज था। UGC मामले में अखिलेश यादव के नपे-तुले बयान आए, क्योंकि वो OBC वोटर को नाराज नहीं करना चाहते थे। मगर, शंकराचार्य के मामले में उन्होंने खुद अविमुक्तेश्वरानंद से बात की। उनके सांसद, विधायक योगी सरकार पर लगातार हमलावर हो रहे हैं। एक्सपर्ट व्यू. क्या रंग लाएगा ब्राह्मण समीकरण?
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीति के मामलों के विशेषज्ञ राजेंद्र कुमार कहते हैं- ये बात बिल्कुल सही है कि शंकराचार्य और UGC, इन दोनों मामलों पर ब्राह्मण वोटर भाजपा से नाराज है। UGC की गाइडलाइन को लेकर सवर्ण समाज के युवा भाजपा को दोषी मान रहे हैं, क्योंकि इससे सवर्ण बच्चों का करियर दांव पर लगने की बातें कहीं जा रही हैं। वहीं, जो व्यवहार शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुआ, उसको ब्राह्मण समाज अनुचित मानता है। कहीं न कहीं ये मैसेज भी लोगों के बीच जा चुका है कि ये सब राजनीति के तहत किया जा रहा है। मगर फिर सनानत को क्यों बदनाम किया जा रहा है? ये सवाल भी लोगों के जेहन में है। आप ये भी देखिए कि कुटुंब परिवार के नाम पर पहले ठाकुर सांसद-विधायकों की मीटिंग हुई, बाद में ब्राह्मण विधायकों की भी मीटिंग हुई। देखा जाए तो विवाद ब्राह्मण समाज के नेताओं के जुटने के बाद हुआ। एक और फैक्टर भी काम कर रहा है, वो ये कि भाजपा में ब्राह्मण नेताओं को हाशिए पर डाला गया है। यही वजह है कि सवर्ण वोटर्स में अंदर ही अंदर नाराजगी है। इसको भुनाने की कोशिश में सिर्फ सपा नहीं है, बल्कि बसपा भी प्रयास कर रही है। राजेंद्र कुमार बताते हैं- अब लोगों को सपा के सांसद और विधायक याद दिला रहे हैं कि सपा ने कभी ब्राह्मणों को अपमानित नहीं किया। मुलायम सिंह ने जनेश्वर मिश्र का हमेशा सम्मान किया। मौजूदा दौर में माता प्रसाद पांडेय के सम्मान में कोई कमी अखिलेश की ओर से नहीं की जा रही है। चुनाव के नतीजे कहते हैं, ब्राह्मण कभी सपा के साथ नहीं गए
सपा का कोर वोटर मुस्लिम-यादव (M-Y) रहा है। ब्राह्मण वोटरों ने कभी भी सपा को वोट नहीं किया, यूपी में 10 से 12% भागीदारी वाला ब्राह्मण वोटर 2009 तक कांग्रेस और फिर भाजपा के साथ मजबूती से खड़ा रहा। 2012 में सत्ता में आने के बाद अखिलेश यादव ने राजाराम पांडेय, ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी, मनोज पांडेय, विजय मिश्रा, अभिषेक मिश्रा, शिवकांत ओझा को मंत्रिमंडल में जगह दी। मौजूदा वक्त में विधानसभा अध्यक्ष भी ब्राह्मण समाज के माता प्रसाद पांडेय को बनाया है। ये पद विपक्ष में रहते हुए भी कैबिनेट मंत्री के बराबर माना जाता है। लखनऊ में सबसे बड़ा पार्क जनेश्वर मिश्र के नाम पर बनवाया। इसके बावजूद ब्राह्मण वोटर कभी भी भाजपा से छिटका नहीं, ये इन आंकड़ों से समझिए…
शंकराचार्य के साथ माघ मेला में क्या हुआ, ये डिटेल में पढ़िए…
प्रयागराज माघ मेले में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के स्नान के लिए आए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी पुलिस ने रोक दी थी। पुलिस ने उनसे पैदल संगम जाने को कहा। शंकराचार्य के शिष्य नहीं माने और पालकी लेकर आगे बढ़ने लगे। इस पर शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने एक साधु को चौकी में पीटा। इससे शंकराचार्य नाराज हो गए और शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए। अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, हाथ जोड़े, लेकिन वे नहीं माने। करीब 2 घंटे तक गहमा-गहमी रही। इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के कई और समर्थकों को हिरासत में ले लिया। शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से 1 किमी दूर ले जाया गया। इस दौरान पालकी का क्षत्रप भी टूट गया। शंकराचार्य स्नान भी नहीं कर पाए थे। इसके बाद वो धरने पर रहे। प्रशासन ने उन्हें स्नान करने के लिए कहा। हालांकि बाद में वो बिना स्नान किए, काशी में अपने मठ पर लौट गए थे। 2 फोटो देखिए… UGC के नए नियमों का विरोध क्यों हुआ?
UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इसका नाम है- ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026।’ इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए थे। ये टीमें खासतौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना था कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए। हालांकि नियमों को जनरल कैटेगरी के खिलाफ बताकर विरोध हो रहा था। आलोचकों का कहना था कि सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं। जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स का कहना है कि नए नियम कॉलेज या यूनिवर्सिटी कैंपसों में उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी। विरोध को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को इस नोटिफिकेशन में बदलाव करने के लिए कहा था। ……
ये पढ़ें- आशुतोष महाराज की नाक काटने की कोशिश करने वाला कहां?:ट्रेन में यात्रियों को पता नहीं, CCTV में दिखा नहीं; जिम्मेदारी लेने वाली ID फेक शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर 2 बटुकों से यौन उत्पीड़न का केस दर्ज करवाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी पर ट्रेन में हमला हुआ। नाक और बाएं हाथ पर चोट आई। आशुतोष ने इस हमले की साजिश के पीछे अविमुक्तेश्वरानंद को बताया। अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। घटना के कुछ घंटे बाद फेसबुक पर डॉ. स्वाति अघोरी ने हमले की जिम्मेदारी ली। उनकी प्रोफाइल में लिखा था- ‘काल भैरव युवा वाहिनी’ की राष्ट्रीय अध्यक्ष। पढ़िए पूरी खबर…

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