दरभंगा में रसोई गैस की कमी का असर अब आम लोगों के साथ-साथ संस्थानों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। गैस की उपलब्धता कम होने के कारण एजेंसियों और गोदामों पर उपभोक्ताओं की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। लोग गैस बचाने के लिए ऑप्शनल व्यवस्था का यूज कर रहे हैं। लोग लकड़ी पर खाना बनाते नजर आए। खासकर रमजान के महीने में रोजेदारों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भास्कर रिपोर्टर ने जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों, गैस एजेंसियों, कोयला-लकड़ी दुकानों और इलेक्ट्रॉनिक दुकानों का जायजा लिया। आंगनबाड़ी केंद्रों में फिलहाल स्थिति सामान्य आंगनबाड़ी केंद्रों में फिलहाल स्थिति सामान्य दिखी। कई केंद्रों पर बच्चे पढ़ाई करते नजर आए और गैस चूल्हे पर बच्चों के लिए गुड़ की खीर (रसियाव) बनाई जा रही थी। आंगनबाड़ी सेविका रूबी कुमारी ने बताया कि फिलहाल उनके पास करीब दो महीने का गैस स्टॉक मौजूद है, इसलिए अभी किसी तरह की दिक्कत नहीं है। गैस की आपूर्ति कम गैस एजेंसियों के कर्मचारी का कहना है कि इन दिनों गैस की आपूर्ति कम हो रही है, जिसके कारण वितरण में समय लग रहा है। बिना टोकन और डीएपी कोड के गैस नहीं दी जा रही है। कुछ वेंडरों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि सिलेंडर की कमी के कारण कुछ लोग एक सिलेंडर के लिए लगभग 2000 रुपये तक देने को तैयार हो रहे हैं। भास्कर रिपोर्टर जब कोयला दुकानों पर पहुंचे, तो दुकानदार श्याम प्रसाद गुप्ता ने बताया कि फिलहाल कोयले का दाम 1800 रुपये प्रति क्विंटल है और कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। ग्राहकों की संख्या भी सामान्य ही है। इसी तरह लकड़ी दुकानदार राजेंद्र शर्मा ने बताया कि जलावन लकड़ी करीब 1000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है और मांग में भी कोई खास वृद्धि नहीं हुई है। इलेक्ट्रॉनिक दुकानों पर भी इंडक्शन चूल्हे की खरीदारी में कोई खास उछाल नहीं देखा गया। दुकानदार गोविंद गुप्ता के अनुसार सामान्य दिनों की तरह ही इक्का-दुक्का लोग इंडक्शन चूल्हा खरीद रहे हैं। दूसरी ओर शहर और जिले में गैस की किल्लत साफ नजर आ रही है। एजेंसियों और गोदामों पर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं। रमजान के कारण मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह से ही धूप में खड़े होकर अपने नंबर का इंतजार करते देखे जा रहे हैं। केवल एक दिन के लिए बचा गैस दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) में भी गैस का स्टॉक सीमित है। यहां जीविका दीदियों की ओर से रोजाना करीब 1700 लोगों के लिए भोजन तैयार किया जाता है, लेकिन उपलब्ध गैस केवल एक दिन के लिए बचे होने की जानकारी मिली है। शहर के कई रेस्टोरेंट, होटल और मैरिज हॉल संचालकों ने भी कमर्शियल गैस की कमी की बात कही है। उनका कहना है कि गैस नहीं मिलने के कारण वे इंडक्शन चूल्हे से काम चला रहे हैं और उपलब्ध गैस का सीमित उपयोग कर रहे हैं। कई होटलों में मेनू के कुछ आइटम भी कम कर दिए गए हैं। गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आम लोगों के साथ-साथ संस्थानों और कारोबारियों की परेशानी और बढ़ सकती है। दरभंगा में रसोई गैस की कमी का असर अब आम लोगों के साथ-साथ संस्थानों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। गैस की उपलब्धता कम होने के कारण एजेंसियों और गोदामों पर उपभोक्ताओं की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। लोग गैस बचाने के लिए ऑप्शनल व्यवस्था का यूज कर रहे हैं। लोग लकड़ी पर खाना बनाते नजर आए। खासकर रमजान के महीने में रोजेदारों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भास्कर रिपोर्टर ने जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों, गैस एजेंसियों, कोयला-लकड़ी दुकानों और इलेक्ट्रॉनिक दुकानों का जायजा लिया। आंगनबाड़ी केंद्रों में फिलहाल स्थिति सामान्य आंगनबाड़ी केंद्रों में फिलहाल स्थिति सामान्य दिखी। कई केंद्रों पर बच्चे पढ़ाई करते नजर आए और गैस चूल्हे पर बच्चों के लिए गुड़ की खीर (रसियाव) बनाई जा रही थी। आंगनबाड़ी सेविका रूबी कुमारी ने बताया कि फिलहाल उनके पास करीब दो महीने का गैस स्टॉक मौजूद है, इसलिए अभी किसी तरह की दिक्कत नहीं है। गैस की आपूर्ति कम गैस एजेंसियों के कर्मचारी का कहना है कि इन दिनों गैस की आपूर्ति कम हो रही है, जिसके कारण वितरण में समय लग रहा है। बिना टोकन और डीएपी कोड के गैस नहीं दी जा रही है। कुछ वेंडरों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि सिलेंडर की कमी के कारण कुछ लोग एक सिलेंडर के लिए लगभग 2000 रुपये तक देने को तैयार हो रहे हैं। भास्कर रिपोर्टर जब कोयला दुकानों पर पहुंचे, तो दुकानदार श्याम प्रसाद गुप्ता ने बताया कि फिलहाल कोयले का दाम 1800 रुपये प्रति क्विंटल है और कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। ग्राहकों की संख्या भी सामान्य ही है। इसी तरह लकड़ी दुकानदार राजेंद्र शर्मा ने बताया कि जलावन लकड़ी करीब 1000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है और मांग में भी कोई खास वृद्धि नहीं हुई है। इलेक्ट्रॉनिक दुकानों पर भी इंडक्शन चूल्हे की खरीदारी में कोई खास उछाल नहीं देखा गया। दुकानदार गोविंद गुप्ता के अनुसार सामान्य दिनों की तरह ही इक्का-दुक्का लोग इंडक्शन चूल्हा खरीद रहे हैं। दूसरी ओर शहर और जिले में गैस की किल्लत साफ नजर आ रही है। एजेंसियों और गोदामों पर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं। रमजान के कारण मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह से ही धूप में खड़े होकर अपने नंबर का इंतजार करते देखे जा रहे हैं। केवल एक दिन के लिए बचा गैस दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) में भी गैस का स्टॉक सीमित है। यहां जीविका दीदियों की ओर से रोजाना करीब 1700 लोगों के लिए भोजन तैयार किया जाता है, लेकिन उपलब्ध गैस केवल एक दिन के लिए बचे होने की जानकारी मिली है। शहर के कई रेस्टोरेंट, होटल और मैरिज हॉल संचालकों ने भी कमर्शियल गैस की कमी की बात कही है। उनका कहना है कि गैस नहीं मिलने के कारण वे इंडक्शन चूल्हे से काम चला रहे हैं और उपलब्ध गैस का सीमित उपयोग कर रहे हैं। कई होटलों में मेनू के कुछ आइटम भी कम कर दिए गए हैं। गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आम लोगों के साथ-साथ संस्थानों और कारोबारियों की परेशानी और बढ़ सकती है।


