गोपालगंज सदर अस्पताल में पत्रकारों के एंट्री पर रोक:अस्पताल प्रशासन ने लगाए गंभीर आरोप, गेट पर चिपकाया नोटिस

गोपालगंज सदर अस्पताल में पत्रकारों के एंट्री पर रोक:अस्पताल प्रशासन ने लगाए गंभीर आरोप, गेट पर चिपकाया नोटिस

गोपालगंज के मॉडल सदर अस्पताल में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। अस्पताल प्रशासन ने मुख्य गेट पर एक नोटिस चस्पा कर यह जानकारी दी है। इस कदम से मीडिया जगत में आक्रोश है और प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल के मुख्य द्वार पर लगे आधिकारिक नोटिस में सुरक्षा गार्डों को निर्देशित किया गया है कि बिना अनुमति के पत्रकारों का अस्पताल परिसर या वार्डों में प्रवेश वर्जित है। इसमें आपातकालीन कक्ष, प्रसव कक्ष और शल्य कक्ष विशेष रूप से शामिल हैं। सिविल सर्जन ने भी इस संबंध में गंभीर आरोप लगाए अस्पताल प्रबंधन का तर्क है कि पत्रकारों के आने से मरीजों के इलाज में बाधा उत्पन्न होती है और अस्पताल की गोपनीयता भंग होती है। सिविल सर्जन ने भी इस संबंध में गंभीर आरोप लगाए हैं। सिविल सर्जन के अनुसार, उन्हें एक अज्ञात व्यक्ति ने सूचित किया कि कुछ लोग मीडियाकर्मी का पहचान पत्र लगाकर अनाधिकृत रूप से आपातकालीन कक्ष, प्रसव कक्ष और शल्य कक्ष में प्रवेश करते हैं। ये लोग मरीजों और उनके परिजनों को गुमराह कर निजी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, और डॉक्टरों के ड्यूटी रूम में बैठकर दलाली का काम करते हैं। ”अस्पताल परिसर में कोई भी व्यक्ति बिना वैध कारण के प्रवेश न करे” सिविल सर्जन ने यह भी संज्ञान में लिया है कि निजी एम्बुलेंस बिना किसी रोक-टोक के अस्पताल में खड़ी रहती हैं, जिसे सुरक्षा कर्मियों की लापरवाही का द्योतक बताया गया है। अतः सुरक्षा गार्डों को आदेशित किया गया है कि वे बिना उपाधीक्षक एवं अधोहस्ताक्षरी की अनुमति के किसी भी मीडियाकर्मी को इन संवेदनशील क्षेत्रों में प्रवेश न दें। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि अस्पताल परिसर में कोई भी व्यक्ति बिना वैध कारण के प्रवेश न करे। भविष्य में ऐसी किसी भी सूचना के प्राप्त होने पर संबंधित सुरक्षाकर्मी का संविदा समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, जिले के पत्रकारों ने इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला और अस्पताल की बदहाली छिपाने की कोशिश करार दिया है। साथ ही अभी पत्रकारों को बदनाम किया जा रहा है। पत्रकारों का कहना है कि अस्पताल में व्याप्त भ्रष्टाचार, दवाओं की कमी और डॉक्टरों की अनुपस्थिति जैसी सच्चाई और दलालों की भरमार को जनता के सामने लाने से रोकने के लिए यह ‘तालिबानी’ फरमान जारी किया गया है। गोपालगंज के मॉडल सदर अस्पताल में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। अस्पताल प्रशासन ने मुख्य गेट पर एक नोटिस चस्पा कर यह जानकारी दी है। इस कदम से मीडिया जगत में आक्रोश है और प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल के मुख्य द्वार पर लगे आधिकारिक नोटिस में सुरक्षा गार्डों को निर्देशित किया गया है कि बिना अनुमति के पत्रकारों का अस्पताल परिसर या वार्डों में प्रवेश वर्जित है। इसमें आपातकालीन कक्ष, प्रसव कक्ष और शल्य कक्ष विशेष रूप से शामिल हैं। सिविल सर्जन ने भी इस संबंध में गंभीर आरोप लगाए अस्पताल प्रबंधन का तर्क है कि पत्रकारों के आने से मरीजों के इलाज में बाधा उत्पन्न होती है और अस्पताल की गोपनीयता भंग होती है। सिविल सर्जन ने भी इस संबंध में गंभीर आरोप लगाए हैं। सिविल सर्जन के अनुसार, उन्हें एक अज्ञात व्यक्ति ने सूचित किया कि कुछ लोग मीडियाकर्मी का पहचान पत्र लगाकर अनाधिकृत रूप से आपातकालीन कक्ष, प्रसव कक्ष और शल्य कक्ष में प्रवेश करते हैं। ये लोग मरीजों और उनके परिजनों को गुमराह कर निजी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, और डॉक्टरों के ड्यूटी रूम में बैठकर दलाली का काम करते हैं। ”अस्पताल परिसर में कोई भी व्यक्ति बिना वैध कारण के प्रवेश न करे” सिविल सर्जन ने यह भी संज्ञान में लिया है कि निजी एम्बुलेंस बिना किसी रोक-टोक के अस्पताल में खड़ी रहती हैं, जिसे सुरक्षा कर्मियों की लापरवाही का द्योतक बताया गया है। अतः सुरक्षा गार्डों को आदेशित किया गया है कि वे बिना उपाधीक्षक एवं अधोहस्ताक्षरी की अनुमति के किसी भी मीडियाकर्मी को इन संवेदनशील क्षेत्रों में प्रवेश न दें। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि अस्पताल परिसर में कोई भी व्यक्ति बिना वैध कारण के प्रवेश न करे। भविष्य में ऐसी किसी भी सूचना के प्राप्त होने पर संबंधित सुरक्षाकर्मी का संविदा समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, जिले के पत्रकारों ने इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला और अस्पताल की बदहाली छिपाने की कोशिश करार दिया है। साथ ही अभी पत्रकारों को बदनाम किया जा रहा है। पत्रकारों का कहना है कि अस्पताल में व्याप्त भ्रष्टाचार, दवाओं की कमी और डॉक्टरों की अनुपस्थिति जैसी सच्चाई और दलालों की भरमार को जनता के सामने लाने से रोकने के लिए यह ‘तालिबानी’ फरमान जारी किया गया है।  

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