गोपालगंज के व्यवहार न्यायालय के एडीजे 12 धीरज कुमार मिश्र की अदालत ने लगभग 11 वर्ष पुराने दहेज हत्या के एक मामले में पति, सास और ससुर को दोषी ठहराते हुए कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद सुनाया गया। दरअसल, यह मामला यूपी के कुशीनगर जिले के कसेया थाने के सिसवा महंथ गांव निवासी महेंद्र कुशवाहा की भतीजी कीर्ति कुमारी से जुड़ा है। कीर्ति की शादी भोरे थाने के छठियांव गांव निवासी रामकुमार भगत के बेटे सुनील कुमार कुशवाहा से हुई थी। शादी के बाद कीर्ति को उसके पति, सास और ससुर द्वारा दहेज की मांग को लेकर लगातार प्रताड़ित किया जाने लगा। भोरे थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी इसी बीच, 23 अप्रैल 2015 को कीर्ति कुमारी की उसके ही घर में हत्या कर दी गई। इस घटना के संबंध में मृतका के चाचा महेंद्र कुशवाहा ने भोरे थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें कीर्ति के पति सुनील कुमार कुशवाहा, ससुर राम कुंवर भगत और सास चानमति देवी को नामजद आरोपी बनाया गया था। मामले की सुनवाई सत्र न्यायालय में चल रही थी। अभियोजन पक्ष से एपीपी हरेन्द्र प्रताप सिंह और बचाव पक्ष से अधिवक्ता जितेंद्र कुमार सिंह ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के आधार पर सत्र न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषी पाया। सभी दोषियों को चनावे मंडलकारा भेज दिया गया अदालत ने मृतका के पति सुनील कुमार कुशवाहा को 14 वर्ष के कारावास, ससुर राम कुंवर भगत को दस वर्ष के कारावास और सास चानमति देवी को सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के बाद सभी दोषियों को चनावे मंडलकारा भेज दिया गया है। गोपालगंज के व्यवहार न्यायालय के एडीजे 12 धीरज कुमार मिश्र की अदालत ने लगभग 11 वर्ष पुराने दहेज हत्या के एक मामले में पति, सास और ससुर को दोषी ठहराते हुए कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद सुनाया गया। दरअसल, यह मामला यूपी के कुशीनगर जिले के कसेया थाने के सिसवा महंथ गांव निवासी महेंद्र कुशवाहा की भतीजी कीर्ति कुमारी से जुड़ा है। कीर्ति की शादी भोरे थाने के छठियांव गांव निवासी रामकुमार भगत के बेटे सुनील कुमार कुशवाहा से हुई थी। शादी के बाद कीर्ति को उसके पति, सास और ससुर द्वारा दहेज की मांग को लेकर लगातार प्रताड़ित किया जाने लगा। भोरे थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी इसी बीच, 23 अप्रैल 2015 को कीर्ति कुमारी की उसके ही घर में हत्या कर दी गई। इस घटना के संबंध में मृतका के चाचा महेंद्र कुशवाहा ने भोरे थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें कीर्ति के पति सुनील कुमार कुशवाहा, ससुर राम कुंवर भगत और सास चानमति देवी को नामजद आरोपी बनाया गया था। मामले की सुनवाई सत्र न्यायालय में चल रही थी। अभियोजन पक्ष से एपीपी हरेन्द्र प्रताप सिंह और बचाव पक्ष से अधिवक्ता जितेंद्र कुमार सिंह ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के आधार पर सत्र न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषी पाया। सभी दोषियों को चनावे मंडलकारा भेज दिया गया अदालत ने मृतका के पति सुनील कुमार कुशवाहा को 14 वर्ष के कारावास, ससुर राम कुंवर भगत को दस वर्ष के कारावास और सास चानमति देवी को सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के बाद सभी दोषियों को चनावे मंडलकारा भेज दिया गया है।


