किशनगंज जिले में साल की पहली बारिश ने गुरुवार को अचानक मौसम का मिजाज बदल दिया। तेज हवाओं और झमाझम बारिश से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। इस अचानक आए मौसम परिवर्तन से लोगों को कई जगह दिक्कतों का सामना करना पड़ा, खासकर ठाकुरगंज प्रखंड में इसका व्यापक असर देखा गया। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने कई स्थानों पर नुकसान पहुंचाया। हवा की तेज रफ्तार से पेड़ों की टहनियां टूटकर गिर गईं, जिससे सड़कों और गलियों में आवागमन बाधित हो गया। कई स्थानों पर पेड़ भी धराशायी हो गए। हवा की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हुए शेड घरों के टीन के शेड, छप्पर और अस्थायी ढांचे हवा की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गए या पूरी तरह ढह गए, जिससे लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी ठप हो गई, जिससे अंधेरे में लोगों को असुविधा हुई। बारिश के कारण सड़कें और गलियां पानी से भर गईं। राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई लोगों को अपने जरूरी काम छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। खेती-किसानी पर आंधी-बारिश का बुरा असर खेती-किसानी पर भी इस आंधी-बारिश का बुरा असर पड़ा। तेज हवाओं से कई जगहों पर केले के पेड़ उखड़ गए। चाय बागानों में भी पौधों को काफी नुकसान पहुंचा। खेतों में खड़ी मक्का की फसल को भारी क्षति हुई। किसानों का कहना है कि तेज हवा से मक्का की फसलें जमीन पर गिर गईं, जिससे उत्पादन पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है। इससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया और उनकी चिंता बढ़ गई है। किशनगंज जिले में साल की पहली बारिश ने गुरुवार को अचानक मौसम का मिजाज बदल दिया। तेज हवाओं और झमाझम बारिश से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। इस अचानक आए मौसम परिवर्तन से लोगों को कई जगह दिक्कतों का सामना करना पड़ा, खासकर ठाकुरगंज प्रखंड में इसका व्यापक असर देखा गया। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने कई स्थानों पर नुकसान पहुंचाया। हवा की तेज रफ्तार से पेड़ों की टहनियां टूटकर गिर गईं, जिससे सड़कों और गलियों में आवागमन बाधित हो गया। कई स्थानों पर पेड़ भी धराशायी हो गए। हवा की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हुए शेड घरों के टीन के शेड, छप्पर और अस्थायी ढांचे हवा की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गए या पूरी तरह ढह गए, जिससे लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी ठप हो गई, जिससे अंधेरे में लोगों को असुविधा हुई। बारिश के कारण सड़कें और गलियां पानी से भर गईं। राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई लोगों को अपने जरूरी काम छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। खेती-किसानी पर आंधी-बारिश का बुरा असर खेती-किसानी पर भी इस आंधी-बारिश का बुरा असर पड़ा। तेज हवाओं से कई जगहों पर केले के पेड़ उखड़ गए। चाय बागानों में भी पौधों को काफी नुकसान पहुंचा। खेतों में खड़ी मक्का की फसल को भारी क्षति हुई। किसानों का कहना है कि तेज हवा से मक्का की फसलें जमीन पर गिर गईं, जिससे उत्पादन पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है। इससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया और उनकी चिंता बढ़ गई है।


