NEET छात्रा रेप-मौत मामले में बेउर जेल में बंद मनीष रंजन की जमानत याचिका पर लगातार दो दिन सुनवाई हुई। आज शुक्रवार को पटना की पोक्सो कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी। आज स्पष्ट होगा कि शम्भू गर्ल्स हॉस्टल की बिल्डिंग का मालिक मनीष रंजन को जमानत मिलेगी या उसे अभी जेल में ही रहना पड़ेगा। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। मनीष रंजन को सुनवाई के लिए जेल से कोर्ट में लाया गया था। जमानत याचिका पर करीब 4 घंटे सुनवाई चली। इसमें करीब दो घंटे की सुनवाई जज के चेंबर में हुई। सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष के वकील ने पटना हाईकोर्ट के फूल बेंच जजमेंट हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया। इस पर मनीष रंजन के वकील ने आपत्ति जताई। हालांकि, कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मनीष रंजन की जमानत पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। वहीं, NEET छात्रा की मां ने आरोप लगाया कि CBI और SIT सभी मिलकर लीपापोती कर रहे हैं। मनीष रंजन का कोई नाम तक नहीं ले रहा है। सिर्फ हमें झूठा बनाया जा रहा है। कोर्ट ने तत्कालीन थानेदार रौशनी कुमारी कई सवाल पूछे कोर्ट ने सबसे पहले केस की पहली IO रही चित्रगुप्त नगर की तत्कालीन थानेदार रौशनी कुमारी कई सवाल पूछे। कोर्ट ने पूछा, मुख्य गवाह और मेड के साथ नीट छात्रा के कमरे में जाने वाली उसकी सहपाठी से आपने पूछताछ की तो कैमरे पर उसका रिकॉर्डिंग क्यों नहीं किया? मनीष रंजन आपके पास कब आया? रौशनी ने बताया कि 10 जनवरी को थाने पर आया था। कोर्ट ने पूछा वो क्यों आया था? आपने उससे पूछताछ की? रौशनी ने जवाब दिया, ‘नहीं।’ कोर्ट ने पूछा- आपने किस अपराध में मनीष को गिरफ्तार किया? उस टाइम पर क्या रिकॉर्ड किया? पूछताछ में उसने क्या बताया? पूछताछ के दौरान आप वहां थीं? आपने गिरफ्तार किया, लेकिन केस में इसका क्या रोल है, आपने जांच नहीं किया। कोर्ट के कानूनी सवालों का संतोषजनक जवाब रौशनी के पास नहीं था। फिर कोर्ट ने स्पेशल पीपी से पूछा पुलिस ने क्या जांच की? मनीष का क्या रोल है? पीपी ने बताया कि ये केस का मास्टरमाइंड है। हॉस्टल बिल्डिंग का मालिक होने के साथ ही शम्भू गर्ल्स हॉस्टल का सह संचालक है। कोर्ट ने CBI से पूछा- पीड़िता की मोबाइल की जांच क्यों नहीं की इसके बाद कोर्ट ने CBI के ASP पवन श्रीवास्तव से पूछा- पीड़िता का मोबाइल कहां है। इसके जवाब में CBI ने कहा कि SIT से मिला तो सीज कर दिया। फिर कोर्ट ने पूछा आपने उसके मोबाइल की जांच की? CBI ने कहा, ‘नहीं।’ कोर्ट ने पूछा कि आपने मनीष के मोबाइल की जांच की? CBI ने कहा, ‘नहीं।’ तब कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि, ‘जब मोबाइल की जांच नहीं की तो उसे सीज क्यों किया? कोर्ट ने CBI अधिकारी से सवाल किया कि अब तक आपने कितने लोगों के मोबाइल को सीज किया? CBI ने बताया कि 8 लोगों का। कोर्ट ने पूछा- इनमें कितने की जांच की? CBI ने बताया कि अभी जांच नहीं की है। मालखाना में जमा है। कोर्ट ने सवाल किया कि आपने अटेम्प्ट टू मर्डर का केस दर्ज किया है, क्या ये मर्डर में कन्वर्ट होगा? आपने इस बारे में पता किया? CBI ने कहा ‘नहीं।’ कोर्ट ने फिर पूछा कि आपने मौत का कारण पता लगाया? CBI ने कहा ‘नहीं।’ कोर्ट ने पूछा- आपने मर्डर का केस दर्ज क्यों नहीं किया? कोर्ट ने पूछा कि आपने केस दर्ज किया, तब तक लड़की मर चुकी थी, तब आपने मर्डर का केस दर्ज क्यों नहीं किया? इस बारे में क्यों नहीं पता किया? आपने जो जांच किया, वही बता दीजिए। हॉस्टल में जो व्यक्ति रहता था, आपने उसकी जांच क्यों नहीं की? कोर्ट के इन सवालों का CBI जवाब नहीं दे पाई। कोर्ट ने पूछा आपने मनीष का स्टेटमेंट रिकॉर्ड नहीं किया, फिर भी लगता है कि आपको उसकी जरूरत नहीं है। CBI के अधिकारी ने इस पर सिर्फ सिर हिलाया। CBI से कोर्ट ने पूछा कि आपने वार्डेन का स्टेटमेंट लिया तो पीड़िता के रूम में 6 जनवरी के बाद कौन-कौन गया? इसका जवाब देते हुए CBI ने बताया कि एक सफाई कर्मचारी, एक वार्डन और एक फ्रेंड गई थी। तब कोर्ट ने पूछा कि वार्डन का नाम बताइए? यहां पर CBI वार्डन का नाम गलत बताया। कोर्ट ने पूछा आपने मेड का बयान लिया? CBI ने कहा कि नहीं, वो अनपढ़ है। तब कोर्ट ने कहा वो बोल भी नहीं सकती है? आप उसके बयान को रिकॉर्ड कर सकते थे? इसके बाद CBI की महिला वकील ने आपत्ति जताई। कोर्ट से कहा कि मामला अतिसंवेदनशील है। ओपन कोर्ट में जांच की जानकारी नहीं दे सकते हैं। इसके बाद आगे की सुनवाई जज के चेंबर हुई। पीड़िता की मां बोली- सरकार में गरीबों की सुनाई नहीं, पुलिस मिली हुई है कोर्ट के बाहर मीडिया से बात करते हुए पीड़िता की मां रो पड़ी। मां ने कहा, ‘बिहार पुलिस मामले में लीपापोती कर रही है। मनीष रंजन को कहीं केस में नाम नहीं लिया गया है। मेरी बेटी तो चली गई, वैसी कितनी बेटियां हैं जो अब भी ऐसे दरिंदों के हाथों में है। मुझे कोर्ट पर पूरा भरोसा है, इसलिए मैं यहां खड़ी हूं। हॉस्टल में बेटी को विश्वास के साथ भेजा था। वहां बड़े-बड़े मंत्री और विधायकों के बेटे आते थे। बड़ी-बड़ी गाड़ियां लगती थीं। उन लोगों ने मेरी बेटी को मार डाला। पुलिस ने एक मां को झूठा बना दिया है। सरकार बोलती है बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ। गरीब की बेटी नहीं पढ़ेगी क्या। सरकार सोई है। नीतीश कुमार सोए हुए हैं। गरीब की कहीं कोई सुनवाई नहीं है।’ ये कहते हुए पीड़िता की मां बेहोश हो गई। एक दिन पहले ढाई घंटे चली कोर्ट की हियरिंग दरअसल, पॉक्सो कोर्ट में बुधवार को CBI 4 बंडलों में अपनी जांच रिपोर्ट और केस से जुड़े दस्तावेज लेकर पहुंची थी। करीब ढाई घंटे चली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने फिर CBI को फटकार लगाते हुए पूछा, 20 दिनों से CBI मूकदर्शक बनी है। इस दौरान कोर्ट ने पटना पुलिस की SIT और CBI से कई सवाल पूछे। जवाबों से संतुष्ट नहीं होने पर कोर्ट ने अपनी नाराजगी भी जाहिर की। फिर से कोर्ट ने पहले CBI और बाद में SIT से पूछा कि क्या आपको मनीष रंजन की जरूरत है? इस पर दोनों के अधिकारियों ने कहा- नहीं, अभी इनकी कोई जरूरत नहीं है। जब आपको केस हैंडओवर किया गया, तब आपको इसकी जानकारी थी या नहीं कि मनीष कस्टडी में है? ये क्यों नहीं माना जाए कि आपकी लापरवाही की वजह से वो 14 फरवरी से 11 मार्च तक गैरकानूनी तरीके से जेल में है? इसका कॉम्पनसेशन कौन देगा? कोर्ट ने मनीष से पूछा- घटना की जानकारी किसने दी? कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा, लड़की के मौत को दो महीने हो गए हैं और अब तक कारण पता नहीं है। केस की पहली IO रौशनी का बयान SIT से मैच नहीं कर रहा है। इन दोनों का बयान CBI से मैच नहीं कर रहा है। 5-6 जनवरी को मनीष कहां था? जांच एजेंसी की जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर कोर्ट ने सीधे मनीष रंजन से पूछ लिया कि आपको घटना की जानकारी किसने दी? इसके जवाब में मनीष ने बताया कि 5 जनवरी की सुबह 10 बजे मैं बेटी को लेकर पावापुरी मेडिकल कॉलेज गया था। फिर उसी दिन रात के 8 बजे वापस लौटा। 6 जनवरी की सुबह 10:30 बजे अपने ऑफिस के लिए निकल गया। 7 जनवरी की सुबह उसे हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल ने घटना की जानकारी दी थी। दूसरी तरफ SIT ने नीलम का बयान पढ़ा और बताया कि मनीष को वार्डन से जानकारी हुई होगी। हमने नहीं बताया है। कोर्ट ने पटना पुलिस से पूछा कि मनीष रंजन को कस्टडी में लेने के बाद उससे पूछताछ हुई या नहीं? इसपर SIT ने बताया कि 4 फरवरी को जेल में उससे पूछताछ हुई थी। फिर पूछताछ में क्या मिला? आज कोर्ट में पीड़िता के वकील ने एक ऑडियो सुनाया। उन्होंने दावा किया कि गवाहों को धमकाया जा रहा है। कोर्ट ने CBI से पूछा- मनीष को बेल दे दी जाए, कोई दिक्कत? कोर्ट ने फिर CBI से पूछा कि, चित्रगुप्त नगर थाना का केस नंबर 14/2026 की जांच आप कर रहे हैं या नहीं? मनीष रंजन से आपको कोई मतलब है या नहीं? मनीष को बेल दे दी जाए, आपको कोई दिक्कत? इस पर CBI के ASP ने कहा कि नहीं, अभी कोई मतलब नहीं है। कोर्ट ने SIT इंचार्च से किया सवाल कोर्ट ने पटना पुलिस के SIT इंचार्ज और SDPO सचिवालय डॉ. अन्नु कुमारी से सवाल किया। आप इस केस की जांच कर रही हैं या नहीं? मनीष को बेल देने से आपको कोई फर्क पड़ेगा? तब SIT ने जवाब दिया- नहीं। कोर्ट ने मेडिसिन स्ट्रिप के बारे में पूछा, जो शुरुआती जांच में SIT को मिले थे। एविडेंस में 3 स्ट्रिप ही दिखाया गया। इस पर सवाल पूछा कि जब 6 स्ट्रिप मिले तो एविडेंस में 3 ही क्यों है? ये किस तारीख को मिला था? इस पर SIT ने जवाब दिया कि 6 जनवरी को छात्रा के कमरे में मिला था। फिर वापस कमरे में ही रख दिया और 7 जनवरी को वहां से उठाया। स्पेशल पीपी ने मनीष रंजन की जमानत का विरोध किया सुनवाई के दौरान स्पेशल पीपी सुरेश चंद्र प्रसाद ने मनीष रंजन की जमानत का विरोध किया। कहा कि मनीष ही इस केस का मास्टरमाइंड है। इसके कस्टडी में रहने पर बहुत सारी बातें सामने आएंगी। इसपर कोर्ट ने पूछा कि हम किस ग्राउंड पर रखेंगे? इसके बाद पीड़िता के वकील एसके पांडेय ने अपना पक्ष रखते हुए महाराष्ट्र और कर्नाटक हाइकोर्ट के पोक्सो केस में दिए गए गाइडलाइन का हवाला दिया। स्पेशल पीपी के अनुसार, इस केस में पीड़िता की मां, पिता और एक नर्स की BNSS की धारा-183 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज करवाने के लिए आवेदन दिया गया है। इसे केस के IO ही करवाएंगे। जांच एजेंसियां केस में लिपापोती कर रही हैं पीड़ित परिवार के वकील एसके पांडेय ने कहा, ‘ये लिपापोती है। सोची समझी सुनियोजित साजिश है। किसी के बयान मैच नहीं हो रहे हैं। इस केस में फांसी तक की सजा है, लेकिन इस मामले में इंवेस्टिगेशन को मार दिया गया है।’ उन्होंने आगे कहा कि, ‘सीबीआई ने दूसरी FIR की, लेकिन पॉक्सो नहीं लगाई। ये कैसे संभव है। 2 माह में भी मौत का कारण पता नहीं चला है, ये लोग पता लगाने की कोशिश ही नहीं किए।’ जिन डॉक्टर ने अटॉप्सी की, उनकी पेपरर्स नहीं दिखाए गए। प्रभात हॉस्पिटल की डॉ ने कहा, बच्ची के साथ कोई सेक्सुअल असॉल्ट नहीं हुआ, जबकि अटॉप्सी में इसकी पुष्टि हुई। ये केस रहस्य बना दिया गया। इस केस में जानबूझकर SIT, CBI, CID सबने मिलकर लिपापोती की है। मनीष रंजन प्रभावसाली आदमी है, ये एक हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट चलाता है। लड़कियां को नशा खिलाया जाता है और रसूखदारों के पास भेजा जाता है। जांच एजेंसी ने कहा, लड़की ने खाना नहीं खाया था, जबकि उसने घर पर बताया था कि रात में खाना खाया है। सारे बयान एक दूसरे के विरोधाभासी हैं। सरासर झूठ बोला जा रहा है। NEET छात्रा रेप-मौत मामले में बेउर जेल में बंद मनीष रंजन की जमानत याचिका पर लगातार दो दिन सुनवाई हुई। आज शुक्रवार को पटना की पोक्सो कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी। आज स्पष्ट होगा कि शम्भू गर्ल्स हॉस्टल की बिल्डिंग का मालिक मनीष रंजन को जमानत मिलेगी या उसे अभी जेल में ही रहना पड़ेगा। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। मनीष रंजन को सुनवाई के लिए जेल से कोर्ट में लाया गया था। जमानत याचिका पर करीब 4 घंटे सुनवाई चली। इसमें करीब दो घंटे की सुनवाई जज के चेंबर में हुई। सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष के वकील ने पटना हाईकोर्ट के फूल बेंच जजमेंट हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया। इस पर मनीष रंजन के वकील ने आपत्ति जताई। हालांकि, कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मनीष रंजन की जमानत पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। वहीं, NEET छात्रा की मां ने आरोप लगाया कि CBI और SIT सभी मिलकर लीपापोती कर रहे हैं। मनीष रंजन का कोई नाम तक नहीं ले रहा है। सिर्फ हमें झूठा बनाया जा रहा है। कोर्ट ने तत्कालीन थानेदार रौशनी कुमारी कई सवाल पूछे कोर्ट ने सबसे पहले केस की पहली IO रही चित्रगुप्त नगर की तत्कालीन थानेदार रौशनी कुमारी कई सवाल पूछे। कोर्ट ने पूछा, मुख्य गवाह और मेड के साथ नीट छात्रा के कमरे में जाने वाली उसकी सहपाठी से आपने पूछताछ की तो कैमरे पर उसका रिकॉर्डिंग क्यों नहीं किया? मनीष रंजन आपके पास कब आया? रौशनी ने बताया कि 10 जनवरी को थाने पर आया था। कोर्ट ने पूछा वो क्यों आया था? आपने उससे पूछताछ की? रौशनी ने जवाब दिया, ‘नहीं।’ कोर्ट ने पूछा- आपने किस अपराध में मनीष को गिरफ्तार किया? उस टाइम पर क्या रिकॉर्ड किया? पूछताछ में उसने क्या बताया? पूछताछ के दौरान आप वहां थीं? आपने गिरफ्तार किया, लेकिन केस में इसका क्या रोल है, आपने जांच नहीं किया। कोर्ट के कानूनी सवालों का संतोषजनक जवाब रौशनी के पास नहीं था। फिर कोर्ट ने स्पेशल पीपी से पूछा पुलिस ने क्या जांच की? मनीष का क्या रोल है? पीपी ने बताया कि ये केस का मास्टरमाइंड है। हॉस्टल बिल्डिंग का मालिक होने के साथ ही शम्भू गर्ल्स हॉस्टल का सह संचालक है। कोर्ट ने CBI से पूछा- पीड़िता की मोबाइल की जांच क्यों नहीं की इसके बाद कोर्ट ने CBI के ASP पवन श्रीवास्तव से पूछा- पीड़िता का मोबाइल कहां है। इसके जवाब में CBI ने कहा कि SIT से मिला तो सीज कर दिया। फिर कोर्ट ने पूछा आपने उसके मोबाइल की जांच की? CBI ने कहा, ‘नहीं।’ कोर्ट ने पूछा कि आपने मनीष के मोबाइल की जांच की? CBI ने कहा, ‘नहीं।’ तब कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि, ‘जब मोबाइल की जांच नहीं की तो उसे सीज क्यों किया? कोर्ट ने CBI अधिकारी से सवाल किया कि अब तक आपने कितने लोगों के मोबाइल को सीज किया? CBI ने बताया कि 8 लोगों का। कोर्ट ने पूछा- इनमें कितने की जांच की? CBI ने बताया कि अभी जांच नहीं की है। मालखाना में जमा है। कोर्ट ने सवाल किया कि आपने अटेम्प्ट टू मर्डर का केस दर्ज किया है, क्या ये मर्डर में कन्वर्ट होगा? आपने इस बारे में पता किया? CBI ने कहा ‘नहीं।’ कोर्ट ने फिर पूछा कि आपने मौत का कारण पता लगाया? CBI ने कहा ‘नहीं।’ कोर्ट ने पूछा- आपने मर्डर का केस दर्ज क्यों नहीं किया? कोर्ट ने पूछा कि आपने केस दर्ज किया, तब तक लड़की मर चुकी थी, तब आपने मर्डर का केस दर्ज क्यों नहीं किया? इस बारे में क्यों नहीं पता किया? आपने जो जांच किया, वही बता दीजिए। हॉस्टल में जो व्यक्ति रहता था, आपने उसकी जांच क्यों नहीं की? कोर्ट के इन सवालों का CBI जवाब नहीं दे पाई। कोर्ट ने पूछा आपने मनीष का स्टेटमेंट रिकॉर्ड नहीं किया, फिर भी लगता है कि आपको उसकी जरूरत नहीं है। CBI के अधिकारी ने इस पर सिर्फ सिर हिलाया। CBI से कोर्ट ने पूछा कि आपने वार्डेन का स्टेटमेंट लिया तो पीड़िता के रूम में 6 जनवरी के बाद कौन-कौन गया? इसका जवाब देते हुए CBI ने बताया कि एक सफाई कर्मचारी, एक वार्डन और एक फ्रेंड गई थी। तब कोर्ट ने पूछा कि वार्डन का नाम बताइए? यहां पर CBI वार्डन का नाम गलत बताया। कोर्ट ने पूछा आपने मेड का बयान लिया? CBI ने कहा कि नहीं, वो अनपढ़ है। तब कोर्ट ने कहा वो बोल भी नहीं सकती है? आप उसके बयान को रिकॉर्ड कर सकते थे? इसके बाद CBI की महिला वकील ने आपत्ति जताई। कोर्ट से कहा कि मामला अतिसंवेदनशील है। ओपन कोर्ट में जांच की जानकारी नहीं दे सकते हैं। इसके बाद आगे की सुनवाई जज के चेंबर हुई। पीड़िता की मां बोली- सरकार में गरीबों की सुनाई नहीं, पुलिस मिली हुई है कोर्ट के बाहर मीडिया से बात करते हुए पीड़िता की मां रो पड़ी। मां ने कहा, ‘बिहार पुलिस मामले में लीपापोती कर रही है। मनीष रंजन को कहीं केस में नाम नहीं लिया गया है। मेरी बेटी तो चली गई, वैसी कितनी बेटियां हैं जो अब भी ऐसे दरिंदों के हाथों में है। मुझे कोर्ट पर पूरा भरोसा है, इसलिए मैं यहां खड़ी हूं। हॉस्टल में बेटी को विश्वास के साथ भेजा था। वहां बड़े-बड़े मंत्री और विधायकों के बेटे आते थे। बड़ी-बड़ी गाड़ियां लगती थीं। उन लोगों ने मेरी बेटी को मार डाला। पुलिस ने एक मां को झूठा बना दिया है। सरकार बोलती है बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ। गरीब की बेटी नहीं पढ़ेगी क्या। सरकार सोई है। नीतीश कुमार सोए हुए हैं। गरीब की कहीं कोई सुनवाई नहीं है।’ ये कहते हुए पीड़िता की मां बेहोश हो गई। एक दिन पहले ढाई घंटे चली कोर्ट की हियरिंग दरअसल, पॉक्सो कोर्ट में बुधवार को CBI 4 बंडलों में अपनी जांच रिपोर्ट और केस से जुड़े दस्तावेज लेकर पहुंची थी। करीब ढाई घंटे चली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने फिर CBI को फटकार लगाते हुए पूछा, 20 दिनों से CBI मूकदर्शक बनी है। इस दौरान कोर्ट ने पटना पुलिस की SIT और CBI से कई सवाल पूछे। जवाबों से संतुष्ट नहीं होने पर कोर्ट ने अपनी नाराजगी भी जाहिर की। फिर से कोर्ट ने पहले CBI और बाद में SIT से पूछा कि क्या आपको मनीष रंजन की जरूरत है? इस पर दोनों के अधिकारियों ने कहा- नहीं, अभी इनकी कोई जरूरत नहीं है। जब आपको केस हैंडओवर किया गया, तब आपको इसकी जानकारी थी या नहीं कि मनीष कस्टडी में है? ये क्यों नहीं माना जाए कि आपकी लापरवाही की वजह से वो 14 फरवरी से 11 मार्च तक गैरकानूनी तरीके से जेल में है? इसका कॉम्पनसेशन कौन देगा? कोर्ट ने मनीष से पूछा- घटना की जानकारी किसने दी? कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा, लड़की के मौत को दो महीने हो गए हैं और अब तक कारण पता नहीं है। केस की पहली IO रौशनी का बयान SIT से मैच नहीं कर रहा है। इन दोनों का बयान CBI से मैच नहीं कर रहा है। 5-6 जनवरी को मनीष कहां था? जांच एजेंसी की जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर कोर्ट ने सीधे मनीष रंजन से पूछ लिया कि आपको घटना की जानकारी किसने दी? इसके जवाब में मनीष ने बताया कि 5 जनवरी की सुबह 10 बजे मैं बेटी को लेकर पावापुरी मेडिकल कॉलेज गया था। फिर उसी दिन रात के 8 बजे वापस लौटा। 6 जनवरी की सुबह 10:30 बजे अपने ऑफिस के लिए निकल गया। 7 जनवरी की सुबह उसे हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल ने घटना की जानकारी दी थी। दूसरी तरफ SIT ने नीलम का बयान पढ़ा और बताया कि मनीष को वार्डन से जानकारी हुई होगी। हमने नहीं बताया है। कोर्ट ने पटना पुलिस से पूछा कि मनीष रंजन को कस्टडी में लेने के बाद उससे पूछताछ हुई या नहीं? इसपर SIT ने बताया कि 4 फरवरी को जेल में उससे पूछताछ हुई थी। फिर पूछताछ में क्या मिला? आज कोर्ट में पीड़िता के वकील ने एक ऑडियो सुनाया। उन्होंने दावा किया कि गवाहों को धमकाया जा रहा है। कोर्ट ने CBI से पूछा- मनीष को बेल दे दी जाए, कोई दिक्कत? कोर्ट ने फिर CBI से पूछा कि, चित्रगुप्त नगर थाना का केस नंबर 14/2026 की जांच आप कर रहे हैं या नहीं? मनीष रंजन से आपको कोई मतलब है या नहीं? मनीष को बेल दे दी जाए, आपको कोई दिक्कत? इस पर CBI के ASP ने कहा कि नहीं, अभी कोई मतलब नहीं है। कोर्ट ने SIT इंचार्च से किया सवाल कोर्ट ने पटना पुलिस के SIT इंचार्ज और SDPO सचिवालय डॉ. अन्नु कुमारी से सवाल किया। आप इस केस की जांच कर रही हैं या नहीं? मनीष को बेल देने से आपको कोई फर्क पड़ेगा? तब SIT ने जवाब दिया- नहीं। कोर्ट ने मेडिसिन स्ट्रिप के बारे में पूछा, जो शुरुआती जांच में SIT को मिले थे। एविडेंस में 3 स्ट्रिप ही दिखाया गया। इस पर सवाल पूछा कि जब 6 स्ट्रिप मिले तो एविडेंस में 3 ही क्यों है? ये किस तारीख को मिला था? इस पर SIT ने जवाब दिया कि 6 जनवरी को छात्रा के कमरे में मिला था। फिर वापस कमरे में ही रख दिया और 7 जनवरी को वहां से उठाया। स्पेशल पीपी ने मनीष रंजन की जमानत का विरोध किया सुनवाई के दौरान स्पेशल पीपी सुरेश चंद्र प्रसाद ने मनीष रंजन की जमानत का विरोध किया। कहा कि मनीष ही इस केस का मास्टरमाइंड है। इसके कस्टडी में रहने पर बहुत सारी बातें सामने आएंगी। इसपर कोर्ट ने पूछा कि हम किस ग्राउंड पर रखेंगे? इसके बाद पीड़िता के वकील एसके पांडेय ने अपना पक्ष रखते हुए महाराष्ट्र और कर्नाटक हाइकोर्ट के पोक्सो केस में दिए गए गाइडलाइन का हवाला दिया। स्पेशल पीपी के अनुसार, इस केस में पीड़िता की मां, पिता और एक नर्स की BNSS की धारा-183 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज करवाने के लिए आवेदन दिया गया है। इसे केस के IO ही करवाएंगे। जांच एजेंसियां केस में लिपापोती कर रही हैं पीड़ित परिवार के वकील एसके पांडेय ने कहा, ‘ये लिपापोती है। सोची समझी सुनियोजित साजिश है। किसी के बयान मैच नहीं हो रहे हैं। इस केस में फांसी तक की सजा है, लेकिन इस मामले में इंवेस्टिगेशन को मार दिया गया है।’ उन्होंने आगे कहा कि, ‘सीबीआई ने दूसरी FIR की, लेकिन पॉक्सो नहीं लगाई। ये कैसे संभव है। 2 माह में भी मौत का कारण पता नहीं चला है, ये लोग पता लगाने की कोशिश ही नहीं किए।’ जिन डॉक्टर ने अटॉप्सी की, उनकी पेपरर्स नहीं दिखाए गए। प्रभात हॉस्पिटल की डॉ ने कहा, बच्ची के साथ कोई सेक्सुअल असॉल्ट नहीं हुआ, जबकि अटॉप्सी में इसकी पुष्टि हुई। ये केस रहस्य बना दिया गया। इस केस में जानबूझकर SIT, CBI, CID सबने मिलकर लिपापोती की है। मनीष रंजन प्रभावसाली आदमी है, ये एक हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट चलाता है। लड़कियां को नशा खिलाया जाता है और रसूखदारों के पास भेजा जाता है। जांच एजेंसी ने कहा, लड़की ने खाना नहीं खाया था, जबकि उसने घर पर बताया था कि रात में खाना खाया है। सारे बयान एक दूसरे के विरोधाभासी हैं। सरासर झूठ बोला जा रहा है।


