पटना के 3000 हॉस्टल बंद होने की कगार पर:गैस क्राइसिस, 2.5 लाख बच्चों को जाना पड़ सकता है घर, होटलों में टल रहे ऑर्डर

पटना के 3000 हॉस्टल बंद होने की कगार पर:गैस क्राइसिस, 2.5 लाख बच्चों को जाना पड़ सकता है घर, होटलों में टल रहे ऑर्डर

‘बड़ी परेशानी झेलनी पड़ रही है। अभी तो स्टॉक में रखा गैस इस्तेमाल कर रही हूं। आगे क्या होगा? कैसे होगा? कह नहीं सकती। होटल-हॉस्टल बंद हो रहे हैं। लड़कियों को सुबह, दोपहर, रात 3 टाइम खाना देना होता है। उसे तो बंद या कम नहीं कर सकती।’ पल्लवी गर्ल्स हॉस्टल की मालकिन पल्लवी इतना कहकर कुछ पलों के लिए ठहरती हैं। फिर बोलती हैं, ‘मैंने गैस के लिए कुछ लोगों से बात की, लेकिन कोई पक्के तौर पर नहीं कह रहा है कि सिलेंडर मिल जाएगा।’ यह परेशानी सिर्फ पल्लवी की नहीं। गैस संकट के चलते पटना के हजारों होटल और हॉस्टल मालिक परेशान हैं। स्थिति यह है कि करीब 3000 हॉस्टल बंद होने की कगार पर हैं। खाना नहीं मिलने के चलते 2.5 लाख से ज्यादा बच्चों को पढ़ाई छोड़कर घर लौटना पड़ सकता है। पनाश और मौर्या जैसे बड़े होटलों के पास भी 2 से 3 दिन खाना बनाने लायक ही गैस बचा है। ऐसे में दैनिक भास्कर की टीम ने ग्राउंड रियलिटी चेक की। गैस संकट के चलते पटना के होटल, हॉस्टल और मैरिज हॉल को चलाने में किस तरह की परेशानी हो रही है? क्या तैयारी है? पढ़िए रिपोर्ट…। पहले जानिए हॉस्टलों की हालत, ब्लैक में खरीदना पड़ रहा गैस सिलेंडर गैस संकट से पटना के हॉस्टल किस तरह प्रभावित हो रहे हैं। बच्चों को खाना खिलाने के लिए उनकी क्या तैयारी है। यह जानने के लिए हम गांधी नगर, बोरिंग रोड व अन्य इलाकों के हॉस्टलों में गए। उनके संचालकों से बात की। सबसे पहले हम पटना के गांधी नगर स्थित इंपीरियल बॉयज हॉस्टल पहुंचे। हॉस्टल के मेस इंचार्ज बली कुमार से बात की। उन्होंने कहा, ‘गैस नहीं मिलने से बड़ी परेशानी हो रही है। बुकिंग नहीं हो रही है। सिलेंडर ब्लैक में बेचा जा रहा है।’ ‘एक कमर्शियल गैस सिलेंडर के लिए 2300 रुपए तक देना पड़ रहा है। घरेलू गैस सिलेंडर 1500 रुपए में मिल रहा है। मेरे यहां 50 बच्चे हैं। इन्हें खाना खिलाना जरूरी है। हमलोग किसी तरह गैस सिलेंडर का इंतजाम कर रहे हैं, नहीं तो बच्चों को खाना कैसे खिलाएंगे।’ गैस की किल्लत जारी रही तो इंडक्शन चूल्हे का करेंगे इस्तेमाल हमने बोरिंग रोड स्थित कोजी इन बॉयज हॉस्टल के मेस इंचार्ज आर्यन कुमार देव से बात की। उन्होंने कहा, ‘गैस की किल्लत तो है, लेकिन इसके लिए सरकार को दोष नहीं दे सकते। ईरान के पास के समुद्री रास्ते से गैस नहीं आ रहा है। सरकार कोशिश कर रही है कि गैस की किल्लत न हो। कुछ दिन दिक्कत होगी।’ बच्चियों को भूखा नहीं रख सकता, बाहर से खाने की करनी होगी व्यवस्था ब्लूम गर्ल्स हॉस्टल के इंचार्ज ऋषभ कुमार ने कहा, ‘गैस सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। काफी दिक्कत हो रही है। हॉस्टल बंद करने की नौबत दिख रही है, लेकिन मैं ऐसा नहीं करूंगा। यहां रह रही लड़कियों के खाने के लिए बाहर से व्यवस्था करनी होगी।’ उन्होंने कहा, ‘गैस नहीं मिलता है तो कोयला पर खाना बनाने का इंतजाम करना होगा। बच्चियों को भूखा तो नहीं रख सकते न।’ कोरोना महामारी के समय वाली हालत बनने का डर पल्लवी गर्ल्स हॉस्टल की मालकिन पल्लवी ने बताया, ‘अभी तो बहुत परेशानी है। स्टॉक में रखे सिलेंडर इस्तेमाल कर रही हूं। आने वाले दिनों में क्या होगा, पता नहीं। जो लोग सिलेंडर देते हैं, वे अभी पक्के तौर पर नहीं कह रहे कि गैस मिलेगा। मैंने गैस एजेंसी से बात की, उन्होंने कहा कि फिलहाल सिलेंडर नहीं मिलेगा। होटल, हॉस्टल और मेस के लिए सिलेंडर बंद हो गया है।’

सिलेंडर नहीं मिलेगा तो हॉस्टल बंद करना पड़ेगा मां साध्य गर्ल्स हॉस्टल के मैनेजर पवन सिंह ने बताया, ‘हमारे यहां हर महीने 20-22 सिलेंडर गैस लगता है। मैंने कल आर्डर लगाया था, लेकिन 4 सिलेंडर ही मिले। बोला गया कि अगली बार आएगा तो दिया जाएगा। गैस नहीं मिलने से बहुत परेशानी बढ़ गई है। कोयला से खाना बन नहीं सकता।’ ‘हम लोग सभी हॉस्टल के मालिक मिलकर सोच रहे हैं कि अगर सिलेंडर नहीं मिलेगा तो हॉस्टल बंद करना पड़ेगा। पहले जो सिलेंडर 1100 में लेते थे वह 1500 में मिल रहा है। एजेंसी वाले बता रहे हैं कि ऊपर से सिलेंडर नहीं आ रहा है तो हम लोग कहां से दें। एजेंसी के पास भी कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहा है। अभी फिलहाल 14 किलो वाला घरेलू सिलेंडर ही मिल रहा है।’ लकड़ी से खाना बनाने की तैयारी सावित्री गर्ल्स हॉस्टल के मालिक रमाकांत कुमार ने कहा, ‘बहुत दिक्कत हो रही है। मेरे पास एक्स्ट्रा गैस सिलेंडर था, जिससे काम चला रहे हैं। गैस एजेंसी बुकिंग नहीं ले रहे हैं। समझ में नहीं आ रहा कि आगे क्या होगा। आने वाले दिनों में अगर गैस नहीं मिलेगा तो लकड़ी से खाना बनाएंगे। हॉस्टल में 85 लड़कियां हैं। इसलिए विकल्प के रूप में लकड़ी वाले चूल्हे की व्यवस्था की है।’ अब जानिए, होटलों की स्थिति, टाले जा रहे नए ऑर्डर गैस संकट से पटना के होटल किस तरह प्रभावित हो रहे हैं? उनकी क्या तैयारी है? यह जानने के लिए हम मौर्या और पनाश जैसे बड़े होटलों में गए। कोयला का इस्तेमाल शुरू, गैस बचाने पर ध्यान

होटल पनास के किचन इंचार्ज अमित ने बताया, ‘हमें ऊपर से निर्देश मिला है कि जितना संभव हो गैस बचाकर रखना है। सिर्फ जरूरी काम ही गैस जलाकर किए जा रहे हैं। पहले जो बायलर जलाकर रखते थे, उसे बंद किया हुआ है। बिजली और कोयला के चूल्हे का इस्तेमाल कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘गैस का इस्तेमाल सिर्फ इमरजेंसी में कर रहे हैं। पार्टी और शादी जैसे बड़े आयोजन के लिए नया ऑर्डर नहीं ले रहे हैं। पहले के ऑर्डर ही पूरे कर रहे हैं। गैस की किल्लत पिछले 3 दिनों से शुरू हुई है। एजेंसी वाले फोन नहीं उठा रहे। अभी 2 दिन इस्तेमाल करने लायक गैस बचा है।’ अमित ने कहा, ‘जो गेस्ट हमारे होटल में हैं, उसके लिए सबसे पहले ध्यान दे रहे हैं। गैस बचा कर रखे हैं। उनके लिए खाना बनाकर दे रहे हैं। हम लोगों की प्लानिंग है कि ज्यादा से ज्यादा इंडक्शन चूल्हा उपयोग करें और बिजली से खाना बनाएं। बिजली से खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाली बड़ी-बड़ी हंडिया मंगा रहे हैं।’ होटल मौर्या में सिर्फ एक दिन का बैकअप बचा होटल मौर्या के स्टाफ के अनुसार कमर्शियल एलपीजी (LPG) की सप्लाई बाधित होने के कारण होटल के सामने गंभीर स्थिति बन गई है। उनके पास गैस का केवल एक दिन का बैकअप बचा है। जल्द गैस की आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो होटल की किचन सेवाओं को चलाना मुश्किल हो सकता है। पटना के अन्य बड़े होटल भी प्रभावित पटना के कई बड़े होटलों में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है। ताज और चाणक्य में भी कमर्शियल गैस की सप्लाई प्रभावित होने के कारण किचन चलाने में दिक्कत हो रही है। होटल मैनेजमेंट लगातार गैस एजेंसियों से संपर्क में है। फिलहाल सप्लाई सामान्य होने को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है। क्यों पैदा हुई गैस संकट?
अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई के चलते तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर और ईरान से तेल व गैस लेकर सामान ढोने वाले जहाज होर्मुज स्ट्रेट होकर निकलते हैं। होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। लड़ाई के चलते ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद करने कोशिश की। यहां से गुजर रहे कार्गो शिप पर हमला हुआ है। इसके चलते दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है। भारत पर भी असर पड़ा है। जिलाधिकारी ने कहा- एलपीजी गैस की कोई कमी नहीं पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम ने कहा कि एलपीजी गैस की कोई कमी नहीं है। सभी डिस्ट्रिब्यूटर्स एवं गैस कंपनियों के पास पर्याप्त मात्रा में एलपीजी उपलब्ध है। बुकिंग एवं डिलिवरी मिस्ड कॉल, एसएमएस/आईवीआरएस, व्हाट्सएप तथा ओटीपी के आधार पर होता है। यह प्रणाली अभी भी काम कर रही है। एलपीजी गैस की बुकिंग एवं इसके अगले बुकिंग के बीच 25 दिन का अंतर तय है। लोग पैनिक बुकिंग न करें। सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को एलपीजी गैस डीलर्स एवं वितरकों के यहां नियमित तौर पर निरीक्षण तथा छापामारी करने का निर्देश दिया गया है। ब्लैक मार्केटिंग तथा होर्डिंग को सख्ती से रोकने और ऐसा करने वालों के खिलाफ केस दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। ‘बड़ी परेशानी झेलनी पड़ रही है। अभी तो स्टॉक में रखा गैस इस्तेमाल कर रही हूं। आगे क्या होगा? कैसे होगा? कह नहीं सकती। होटल-हॉस्टल बंद हो रहे हैं। लड़कियों को सुबह, दोपहर, रात 3 टाइम खाना देना होता है। उसे तो बंद या कम नहीं कर सकती।’ पल्लवी गर्ल्स हॉस्टल की मालकिन पल्लवी इतना कहकर कुछ पलों के लिए ठहरती हैं। फिर बोलती हैं, ‘मैंने गैस के लिए कुछ लोगों से बात की, लेकिन कोई पक्के तौर पर नहीं कह रहा है कि सिलेंडर मिल जाएगा।’ यह परेशानी सिर्फ पल्लवी की नहीं। गैस संकट के चलते पटना के हजारों होटल और हॉस्टल मालिक परेशान हैं। स्थिति यह है कि करीब 3000 हॉस्टल बंद होने की कगार पर हैं। खाना नहीं मिलने के चलते 2.5 लाख से ज्यादा बच्चों को पढ़ाई छोड़कर घर लौटना पड़ सकता है। पनाश और मौर्या जैसे बड़े होटलों के पास भी 2 से 3 दिन खाना बनाने लायक ही गैस बचा है। ऐसे में दैनिक भास्कर की टीम ने ग्राउंड रियलिटी चेक की। गैस संकट के चलते पटना के होटल, हॉस्टल और मैरिज हॉल को चलाने में किस तरह की परेशानी हो रही है? क्या तैयारी है? पढ़िए रिपोर्ट…। पहले जानिए हॉस्टलों की हालत, ब्लैक में खरीदना पड़ रहा गैस सिलेंडर गैस संकट से पटना के हॉस्टल किस तरह प्रभावित हो रहे हैं। बच्चों को खाना खिलाने के लिए उनकी क्या तैयारी है। यह जानने के लिए हम गांधी नगर, बोरिंग रोड व अन्य इलाकों के हॉस्टलों में गए। उनके संचालकों से बात की। सबसे पहले हम पटना के गांधी नगर स्थित इंपीरियल बॉयज हॉस्टल पहुंचे। हॉस्टल के मेस इंचार्ज बली कुमार से बात की। उन्होंने कहा, ‘गैस नहीं मिलने से बड़ी परेशानी हो रही है। बुकिंग नहीं हो रही है। सिलेंडर ब्लैक में बेचा जा रहा है।’ ‘एक कमर्शियल गैस सिलेंडर के लिए 2300 रुपए तक देना पड़ रहा है। घरेलू गैस सिलेंडर 1500 रुपए में मिल रहा है। मेरे यहां 50 बच्चे हैं। इन्हें खाना खिलाना जरूरी है। हमलोग किसी तरह गैस सिलेंडर का इंतजाम कर रहे हैं, नहीं तो बच्चों को खाना कैसे खिलाएंगे।’ गैस की किल्लत जारी रही तो इंडक्शन चूल्हे का करेंगे इस्तेमाल हमने बोरिंग रोड स्थित कोजी इन बॉयज हॉस्टल के मेस इंचार्ज आर्यन कुमार देव से बात की। उन्होंने कहा, ‘गैस की किल्लत तो है, लेकिन इसके लिए सरकार को दोष नहीं दे सकते। ईरान के पास के समुद्री रास्ते से गैस नहीं आ रहा है। सरकार कोशिश कर रही है कि गैस की किल्लत न हो। कुछ दिन दिक्कत होगी।’ बच्चियों को भूखा नहीं रख सकता, बाहर से खाने की करनी होगी व्यवस्था ब्लूम गर्ल्स हॉस्टल के इंचार्ज ऋषभ कुमार ने कहा, ‘गैस सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। काफी दिक्कत हो रही है। हॉस्टल बंद करने की नौबत दिख रही है, लेकिन मैं ऐसा नहीं करूंगा। यहां रह रही लड़कियों के खाने के लिए बाहर से व्यवस्था करनी होगी।’ उन्होंने कहा, ‘गैस नहीं मिलता है तो कोयला पर खाना बनाने का इंतजाम करना होगा। बच्चियों को भूखा तो नहीं रख सकते न।’ कोरोना महामारी के समय वाली हालत बनने का डर पल्लवी गर्ल्स हॉस्टल की मालकिन पल्लवी ने बताया, ‘अभी तो बहुत परेशानी है। स्टॉक में रखे सिलेंडर इस्तेमाल कर रही हूं। आने वाले दिनों में क्या होगा, पता नहीं। जो लोग सिलेंडर देते हैं, वे अभी पक्के तौर पर नहीं कह रहे कि गैस मिलेगा। मैंने गैस एजेंसी से बात की, उन्होंने कहा कि फिलहाल सिलेंडर नहीं मिलेगा। होटल, हॉस्टल और मेस के लिए सिलेंडर बंद हो गया है।’

सिलेंडर नहीं मिलेगा तो हॉस्टल बंद करना पड़ेगा मां साध्य गर्ल्स हॉस्टल के मैनेजर पवन सिंह ने बताया, ‘हमारे यहां हर महीने 20-22 सिलेंडर गैस लगता है। मैंने कल आर्डर लगाया था, लेकिन 4 सिलेंडर ही मिले। बोला गया कि अगली बार आएगा तो दिया जाएगा। गैस नहीं मिलने से बहुत परेशानी बढ़ गई है। कोयला से खाना बन नहीं सकता।’ ‘हम लोग सभी हॉस्टल के मालिक मिलकर सोच रहे हैं कि अगर सिलेंडर नहीं मिलेगा तो हॉस्टल बंद करना पड़ेगा। पहले जो सिलेंडर 1100 में लेते थे वह 1500 में मिल रहा है। एजेंसी वाले बता रहे हैं कि ऊपर से सिलेंडर नहीं आ रहा है तो हम लोग कहां से दें। एजेंसी के पास भी कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहा है। अभी फिलहाल 14 किलो वाला घरेलू सिलेंडर ही मिल रहा है।’ लकड़ी से खाना बनाने की तैयारी सावित्री गर्ल्स हॉस्टल के मालिक रमाकांत कुमार ने कहा, ‘बहुत दिक्कत हो रही है। मेरे पास एक्स्ट्रा गैस सिलेंडर था, जिससे काम चला रहे हैं। गैस एजेंसी बुकिंग नहीं ले रहे हैं। समझ में नहीं आ रहा कि आगे क्या होगा। आने वाले दिनों में अगर गैस नहीं मिलेगा तो लकड़ी से खाना बनाएंगे। हॉस्टल में 85 लड़कियां हैं। इसलिए विकल्प के रूप में लकड़ी वाले चूल्हे की व्यवस्था की है।’ अब जानिए, होटलों की स्थिति, टाले जा रहे नए ऑर्डर गैस संकट से पटना के होटल किस तरह प्रभावित हो रहे हैं? उनकी क्या तैयारी है? यह जानने के लिए हम मौर्या और पनाश जैसे बड़े होटलों में गए। कोयला का इस्तेमाल शुरू, गैस बचाने पर ध्यान

होटल पनास के किचन इंचार्ज अमित ने बताया, ‘हमें ऊपर से निर्देश मिला है कि जितना संभव हो गैस बचाकर रखना है। सिर्फ जरूरी काम ही गैस जलाकर किए जा रहे हैं। पहले जो बायलर जलाकर रखते थे, उसे बंद किया हुआ है। बिजली और कोयला के चूल्हे का इस्तेमाल कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘गैस का इस्तेमाल सिर्फ इमरजेंसी में कर रहे हैं। पार्टी और शादी जैसे बड़े आयोजन के लिए नया ऑर्डर नहीं ले रहे हैं। पहले के ऑर्डर ही पूरे कर रहे हैं। गैस की किल्लत पिछले 3 दिनों से शुरू हुई है। एजेंसी वाले फोन नहीं उठा रहे। अभी 2 दिन इस्तेमाल करने लायक गैस बचा है।’ अमित ने कहा, ‘जो गेस्ट हमारे होटल में हैं, उसके लिए सबसे पहले ध्यान दे रहे हैं। गैस बचा कर रखे हैं। उनके लिए खाना बनाकर दे रहे हैं। हम लोगों की प्लानिंग है कि ज्यादा से ज्यादा इंडक्शन चूल्हा उपयोग करें और बिजली से खाना बनाएं। बिजली से खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाली बड़ी-बड़ी हंडिया मंगा रहे हैं।’ होटल मौर्या में सिर्फ एक दिन का बैकअप बचा होटल मौर्या के स्टाफ के अनुसार कमर्शियल एलपीजी (LPG) की सप्लाई बाधित होने के कारण होटल के सामने गंभीर स्थिति बन गई है। उनके पास गैस का केवल एक दिन का बैकअप बचा है। जल्द गैस की आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो होटल की किचन सेवाओं को चलाना मुश्किल हो सकता है। पटना के अन्य बड़े होटल भी प्रभावित पटना के कई बड़े होटलों में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है। ताज और चाणक्य में भी कमर्शियल गैस की सप्लाई प्रभावित होने के कारण किचन चलाने में दिक्कत हो रही है। होटल मैनेजमेंट लगातार गैस एजेंसियों से संपर्क में है। फिलहाल सप्लाई सामान्य होने को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है। क्यों पैदा हुई गैस संकट?
अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई के चलते तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर और ईरान से तेल व गैस लेकर सामान ढोने वाले जहाज होर्मुज स्ट्रेट होकर निकलते हैं। होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। लड़ाई के चलते ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद करने कोशिश की। यहां से गुजर रहे कार्गो शिप पर हमला हुआ है। इसके चलते दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है। भारत पर भी असर पड़ा है। जिलाधिकारी ने कहा- एलपीजी गैस की कोई कमी नहीं पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम ने कहा कि एलपीजी गैस की कोई कमी नहीं है। सभी डिस्ट्रिब्यूटर्स एवं गैस कंपनियों के पास पर्याप्त मात्रा में एलपीजी उपलब्ध है। बुकिंग एवं डिलिवरी मिस्ड कॉल, एसएमएस/आईवीआरएस, व्हाट्सएप तथा ओटीपी के आधार पर होता है। यह प्रणाली अभी भी काम कर रही है। एलपीजी गैस की बुकिंग एवं इसके अगले बुकिंग के बीच 25 दिन का अंतर तय है। लोग पैनिक बुकिंग न करें। सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को एलपीजी गैस डीलर्स एवं वितरकों के यहां नियमित तौर पर निरीक्षण तथा छापामारी करने का निर्देश दिया गया है। ब्लैक मार्केटिंग तथा होर्डिंग को सख्ती से रोकने और ऐसा करने वालों के खिलाफ केस दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।  

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