चंडीगढ़ के IDFC फर्स्ट बैंक शाखा में हुए ₹590 करोड़ के घोटाले की जांच अब ED ने भी तेज कर दी है। ED की ओर से मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है केस में रिभव ऋषि, नरेश कुमार व विक्रम वधवा को भी नामजद किया गया है। चंडीगढ़ जोन-2 की ED टीम ने करीब 10 दिन पहले ही एसीबी टीम ने रिकॉर्ड शेयर करने को लेकर पत्र लिखा था। पत्र के आधार पर एसीबी टीम ने रिकॉर्ड ईडी को भेजा। रिकॉर्ड जांचने के बाद 11 मार्च को दिन भर ईडी की टीम ने 10 आरोपियों के 19 ठिकानों पर एक साथ रेड की। रेड में ईडी की टीम को कैश, प्रॉपर्टी दस्तावेज व गोल्ड ज्वेलरी हाथ लगी है। ईडी की टीम अब जब्त किए गए डॉक्यूमेंट के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। शैल कंपनियों के माध्यम से रकम ट्रांसफर बैंक फ्रॉड की रकम को ट्रांसफर करने के लिए आरोपियों ने फर्जी शैल कंपनियों का सहारा लिया है। जिसमें मास्टर माइंड रिभव की मां 50 प्रतिशत की पार्टनर व एक कंपनी में रिलेशनशिप मैनेजर अभय की पत्नी स्वाति सिंगला 75 प्रतिशत की पार्टनर मिली हैं। ऐसे में आरोपियों ने घोटाले में खुद नहीं बल्कि परिवारों को भी शामिल किया है। अभय ने अपने साले अभिषेक को भी घोटाले का पार्टनर बनाया है। मर्सिडीज और फॉर्च्यूनर कार बरामद
ACB ने अब तक 16 स्थानों पर गहन छापेमारी की गई है।इस मामले में कुछ स्थानों से वीडियो फुटेज भी ली गई है। इस दौरान संपत्तियों की खरीद से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। साथ ही 25 से अधिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप आदि जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच साइबर फॉरेंसिक लैब की सहायता से की जा रही है। इसके अतिरिक्त 3 फॉर्च्यूनर, 2 इनोवा और 1 मर्सिडीज सहित 6 वाहन भी जब्त किए गए हैं, जिन्हें अपराध की आय से खरीदे जाने का तार्किक तौर पर संदेह है। शैल कंपनियों के मार्फत मनी लॉन्ड्रिंग फ्रॉड का माध्यम बनने वाली कपंनियों में आरएस ट्रेडर्स, कैप कंपनी फिनटैक, एसएसआर, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट शामिल हैं। इसके अलावा भी कुछ और कंपनियां हैं, जिनके माध्यम से पूरे घोटाले को अंजाम दिया गया है। IPS चारू बाली के अनुसार घोटाले को अंजाम देने के लिए शामिल 6 बैंक कर्मचारी, 4 प्राइवेट व्यक्ति और सरकारी विभाग का एक कर्मचारी अभी तक अरेस्ट किए गए हैं।


