अनचाहा गर्भ गिराने के मामले में सीएमओ लापरवाह व असहाय:मेडिकल बोर्ड गठित करें, शारीरिक मानसिक व गर्भ रिपोर्ट मांगी

अनचाहा गर्भ गिराने के मामले में सीएमओ लापरवाह व असहाय:मेडिकल बोर्ड गठित करें, शारीरिक मानसिक व गर्भ रिपोर्ट मांगी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की की अनचाहा गर्भ गिराने की अनुमति की मांग में दाखिल याचिका की सुनवाई करते हुए सी एम ओ हाथरस की नासमझी पर नाराजगी जताई है और कहा कि सी एम् ओ को मेडिकल बोर्ड गठित कर लडकी की शारीरिक, मानसिक व गर्भ की स्थिति पर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था।
सीएमओ के हलफनामे में बताया गया कि दो विभाग के डाक्टरों का मेडिकल बोर्ड बनेगा। किंतु किसी डाक्टर का नाम नहीं है, दोनों को ही चेयरमैन रखा है।समझ से परे एक बोर्ड के दो चेयरमैन कैसे काम करेंगे।जब पूछा तो बताया जिले में सक्षम डाक्टर नहीं है ,पड़ोसी जिलों से डाक्टर मागा गया है। किंतु कोई जवाब नहीं आया है। कोर्ट ने कहा-सीएमओ लापरवाह और असहाय नजर आए कोर्ट ने टिप्पणी की सीएमओ लापरवाह व असहाय दिखाई दे रहा। अनचाहे गर्भ के समापन की संवेदनशीलता को समझ नहीं पा रहा। कोर्ट ने कहा डाक्टर अपना दायित्व अब समझेंगे, कोर्ट आदेश पर ही काम करेंगे,या अपनी मर्जी से कार्यवाही करेंगे। कोर्ट ने सी एम् ओ हाथरस को तुरंत मेडिकल बोर्ड गठित कर पीड़िता की जाच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया।साथ ही सचिव हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति को याचिका में पक्षकार बनाते हैं कानूनी अधीक्षण के लिए किसी अधिवक्ता को रखने को कहा।और याचिका की सुनवाई शुक्रवार 13मार्च को साढ़े 12बजे दोपहर दुबारा करने का आदेश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने पीड़िता नाबालिग लड़की की तरफ से दाखिल याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। आदेश के बाद भी मेडिकल बोर्ड गठित नहीं इससे पहले 27 फरवरी को कोर्ट ने सी एम् ओ को 29 दिन के गर्भ समापन के लिए मेडिकल बोर्ड गठित कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। 10 मार्च को बताया गया कि मेडिकल बोर्ड गठित नहीं हो सका तो कोर्ट ने सी एम् ओ को 12मार्च को तलब किया। उम्मीद जताई कि 18मार्च तक रिपोर्ट आ जाएगी। सी एम् ओ हाथरस हाजिर हुए और हलफनामा दाखिल कर बिना डाक्टर के नाम के बोर्ड बनाने की समझ से परे जानकारी दी। पूछने पर कहा जिले में सक्षम डाक्टर नहीं तो पड़ोसी जिलों को पत्र लिखा है। सरकारी वकील ने कहा कि पीड़िता गर्भ गिरायेगी या बच्चे को जन्म देगी,तो उसे गोद कौन लेगा, स्थिति साफ नहीं है।यह राज्य की जिम्मेदारी है। 24घंटे का समय दिया जाय बोर्ड गठित कर पीड़िता की जांच रिपोर्ट दी जायेगी।जिसपर कोर्ट ने सी एम् ओ को मेडिकल बोर्ड गठित कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। सुनवाई आज शुक्रवार को भी होगी।

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