भगवान ऋषभदेव जयंती पर भव्य भक्तामर महामंडल विधान आयोजित:आचार्य विमर्श सागर महाराज ने दिया निस्वार्थ भाव से जीवन जीने का संदेश

भगवान ऋषभदेव जयंती पर भव्य भक्तामर महामंडल विधान आयोजित:आचार्य विमर्श सागर महाराज ने दिया निस्वार्थ भाव से जीवन जीने का संदेश

भगवान ऋषभदेव की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में मेरठ के रजदर जैन मंदिर में श्री 1008 भक्तामर महामंडल विधान का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन दिगंबर जैनाचार्य आचार्य विमर्श सागर महाराज के मंगल सानिध्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम में आचार्य श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य को निस्वार्थ भाव से जीवन जीना चाहिए। स्वार्थ केवल संसार की उलझनों को बढ़ाता है, जबकि निस्वार्थ वृत्ति ही सच्चे सुख का मार्ग है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करना चाहिए, जिसमें उसका कोई व्यक्तिगत स्वार्थ न हो। परोपकार से बड़ा कोई धर्म नहीं है।
आचार्य विमर्श सागर का अपने विशाल चतुर्विध संघ के साथ पहली बार मेरठ आगमन हुआ है। दिगंबर जैन परंपरा में मुनिराज त्याग और तपस्या के सर्वोच्च आदर्श माने जाते हैं। वे धन-वैभव, परिवार और सांसारिक सुखों का त्याग कर पैदल ही साधना करते हुए देशभर में भ्रमण करते हैं। करीब 30 वर्षों की अपनी दीर्घ साधना अवधि में आचार्य विमर्श सागर द्वारा लगभग 70 हजार किलोमीटर की पदयात्रा की जा चुकी है। उन्होंने देश के करीब 12 राज्यों में ‘जिनागम पंथ प्रभावना यात्रा’ के माध्यम से व्यसन मुक्ति, नारी शिक्षा, जैन एकता और शाकाहार का संदेश दिया है। कार्यक्रम के दौरान भक्तामर विधान की पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान पूरे विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुए। श्रद्धालुओं ने भगवान ऋषभदेव के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए धर्मलाभ प्राप्त किया

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