US Fraud: अमेरिका में 2 भारतीय भाइयों ने किया 32 मिलियन डॉलर का महाघोटाला, 400 साल की सज़ा!

US Fraud: अमेरिका में 2 भारतीय भाइयों ने किया 32 मिलियन डॉलर का महाघोटाला, 400 साल की सज़ा!

Medicaid Fraud: अमेरिका के पेन्सिल्वेनिया में एक बहुत बड़े और बहु-राज्यीय धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश (US Visa Fraud) हुआ है, जिसमें भारतीय मूल (Indian Origin Dentists) के दो सगे भाई, 60 वर्षीय भास्कर सवानी और 58 वर्षीय अरुण सवानी (Savani Brothers), मुख्य रूप से दोषी करार दिए गए हैं। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इन दोनों भाइयों को करोड़ों डॉलर के घपले (Medicaid Scam) के आरोप में 400 साल तक के कारावास की सजा सुनाई जा सकती है। इस व्यापक अपराध में मनी लॉन्ड्रिंग, कर चोरी, स्वास्थ्य सेवा में धोखाधड़ी और वीजा नियमों का उल्लंघन जैसी कई गैर-कानूनी गतिविधियां शामिल हैं। ‘सवानी ग्रुप’ के नाम से इन्होंने व्यवसायों का एक ऐसा जाल बिछाया था, जिसके जरिए सालों तक लाखों-करोड़ों डॉलर की अवैध कमाई की गई। अकेले मेडिकेड (Medicaid) कार्यक्रम में ही इन्होंने 32 मिलियन डॉलर (3 करोड़ 20 लाख डॉलर) से ज्यादा का चूना लगाया।

आपराधिक साम्राज्य और चिकित्सा धोखाधड़ी (US Healthcare Fraud)

भास्कर सवानी, जो कि स्वयं पेशे से एक डेंटिस्ट (दंत चिकित्सक) हैं, इस पूरे नेटवर्क में मेडिकल से जुड़ी धोखाधड़ी का सीधा संचालन कर रहे थे। अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, दोनों भाइयों ने अपनी विभिन्न कंपनियों और सहयोगी संस्थाओं की आड़ में इन फर्जीवाड़ों को अंजाम दिया। सरकारी कार्यक्रमों का गलत इस्तेमाल करके और धोखाधड़ी के जरिये अपनी निजी संपत्ति बढ़ाना ही इस लंबे समय तक चलने वाले आपराधिक गिरोह का मुख्य मकसद था।

धोखाधड़ी के प्रमुख तरीके और घोटालों का जाल

एच-1बी वीजा (H-1B Visa) का दुरुपयोग: सवानी समूह पर आरोप सिद्ध हुआ है कि उन्होंने विदेशी कर्मचारियों (जिनमें से अधिकतर भारत से थे) को बुलाने के लिए फर्जी याचिकाओं और वीजा आवेदनों का सहारा लिया। नौकरी पर रखने के बाद इन कामगारों का शोषण किया जाता था। उन्हें अलग-अलग तरह के शुल्क चुकाने के साथ-साथ अपने वेतन का एक हिस्सा वापस सवानी ग्रुप को देने के लिए मजबूर किया जाता था, क्योंकि ये कर्मचारी अपने आव्रजन (इमिग्रेशन) स्टेटस के लिए पूरी तरह से कंपनी पर ही निर्भर थे।

मेडिकेड के साथ साजिश (Medicaid)

दोनों भाइयों ने मेडिकेड प्रोग्राम को अपने बड़े स्वास्थ्य घोटाले का निशाना बनाया। जांच में सामने आया कि जब सवानी ग्रुप के डेंटल क्लीनिकों का मेडिकेड बीमा अनुबंध रद्द कर दिया गया था, उसके बाद भी वे अवैध रूप से इसके भुगतान प्राप्त करते रहे। इसके लिए उन्होंने नॉमिनी के नाम पर चल रहे दंत चिकित्सालयों का इस्तेमाल किया, जो सवानी समूह की तरफ से मेडिकेड को बिल भेजते थे। इस पूरी साजिश के चलते 30 मिलियन डॉलर से अधिक के जाली मेडिकेड दावे पेश किए गए।

फर्जी बिलिंग, कर चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग(Money Laundering)

जाली बिल और बिना लाइसेंस के इलाज: अधिकारियों की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि इस समूह ने ऐसे दंत चिकित्सकों के राष्ट्रीय प्रदाता पहचानकर्ता (NPI) नंबरों का इस्तेमाल करके भी फर्जी बिल पास करवाए, जो बिलिंग की तारीखों पर असल में अमेरिका में मौजूद ही नहीं थे। इसके अतिरिक्त, कई बार ऐसे डेंटिस्ट्स से मरीजों का इलाज करवाया गया, जिनके पास उचित प्रमाण पत्र (सर्टिफिकेट) ही नहीं थे, जो कि स्वास्थ्य नियमों का एक बहुत बड़ा उल्लंघन था।

काले धन को वैध बनाना ( Money Laundering)

स्वास्थ्य सेवा से जुड़े इन घोटालों से जो अवैध पैसा आता था, उसे छिपाने और ठिकाने लगाने के लिए सवानी भाइयों ने सवानी ग्रुप की कंपनियों से जुड़े कॉरपोरेट बैंक खातों का एक बहुत ही जटिल नेटवर्क तैयार किया था, जिसके जरिए बड़े पैमाने पर धन शोधन किया गया।

टैक्स और वायर फ्रॉड (Tax and Wire Fraud)

इस मामले की गहराई से जांच करने पर वायर फ्रॉड और कर चोरी की परतें भी खुलीं। अधिकारियों ने बताया कि इन भाइयों ने अपनी 1.6 मिलियन डॉलर की व्यक्तिगत आय और 1.1 मिलियन डॉलर की कर्मचारियों की अघोषित आय पर कोई टैक्स नहीं भरा। हद तो तब हो गई जब इन्होंने अपने घरों की मरम्मत, प्रॉपर्टी टैक्स और कॉलेज की फीस जैसे पूरी तरह से निजी खर्चों को भी कंपनी के व्यावसायिक खर्चों के तौर पर दिखा दिया।

मरीजों की जान से खिलवाड़ और रसूख का प्रदर्शन

अवैध चिकित्सा उपकरणों का प्रयोग: एक बेहद ही खौफनाक खुलासे में जांचकर्ताओं को पता चला कि सवानी ग्रुप ने ऐसे प्रोटोटाइप डेंटल इम्प्लांट्स का इस्तेमाल किया जिन पर साफ तौर पर “मानव उपयोग के लिए नहीं” (Not for human use) लिखा हुआ था। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) से इन उपकरणों को कोई मंजूरी नहीं मिली थी, फिर भी मरीजों की सहमति या जानकारी के बिना ही इन्हें उनके शरीर में प्रत्यारोपित कर दिया गया।

सोशल मीडिया पर दिखावा किया (Social Media)

इस पूरी कहानी का एक दिलचस्प और हैरान करने वाला पहलू यह भी है कि साल 2023 में जांच के घेरे में आने और आरोप तय होने के बावजूद, इन भाइयों ने एफबीआई (FBI) के निदेशक काश पटेल से मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से साझा की थीं और उनकी नियुक्ति का जश्न भी मनाया था।

दोषियों के लिए संभावित सजा का प्रावधान

अदालत की ओर से दोषी ठहराए जाने के बाद अब इन अपराधियों को ये सजा मिल सकती हैं:

भास्कर सवानी: अमेरिकी कानून के तहत इन्हें अधिकतम 420 साल के कारावास की सजा सुनाई जा सकती है।

अरुण सवानी: इन पर सिद्ध हुए अपराधों के लिए कानूनन अधिकतम 415 वर्ष की जेल का प्रावधान है।

एलेक्जेंड्रा राडोमियाक: इन दोनों भाइयों के साथ काम करने वाली इनकी एक सहयोगी एलेक्जेंड्रा को भी अदालत ने दोषी माना है। उन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और साथ ही 40 साल तक की जेल की सजा भी हो सकती है।

सजा की तारीख: अदालत की ओर से दोनों भाइयों को जुलाई 2026 के महीने में सजा सुनाई जाएगी। भास्कर सवानी को 8 जुलाई और अरुण सवानी को 9 जुलाई को सजा सुनाई जानी तय हुई है।

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