भीलवाड़ा में निकली ‘मुर्दे की सवारी’, अर्थी पर लेटे युवक ने मांगा पानी, बचाता रहा रंगों से अपनी आंखें

भीलवाड़ा में निकली ‘मुर्दे की सवारी’, अर्थी पर लेटे युवक ने मांगा पानी, बचाता रहा रंगों से अपनी आंखें

भीलवाड़ा. वस्त्र नगरी में बुधवार को शीतला अष्टमी पर लोक संस्कृति और हास्य-ठिठोली का अनूठा संगम देखने को मिला। चित्तौड़ वालों की हवेली से जब ‘मुर्दे की सवारी’ (नकली शवयात्रा) निकली, तो देखने वाले ठिठक गए। एक ओर जहां माहौल गमगीन होने के बजाय हंसी-मजाक से सराबोर था, वहीं दूसरी ओर मुर्दे को कांधा देने के लिए युवाओं में खासी प्रतिस्पर्धा नजर आई। हालांकि अर्थी पर लेटा एक युवक नीचे गिरने व सिर पर चोट लगने से दूसरे युवक को लेटाया गया।

रंगों की बौछार

दोपहर पौने तीन बजे जब शवयात्रा शुरू हुई, तो पूरा मार्ग गुलाल के बादलों से ढंक गया। सनैती पर सोए युवक प्रहलाद को युवकों ने नीचे गिरा दिया। इसके उसके सिर पर चोट लगने से दूसरे व्यक्ति की तलाश की गई। बाद में रामस्वरूप शर्मा अर्थी पर लेटा। लेकिन उसे भी दो बार नीचे गिराने का प्रयास किया। इसके कारण युवकों में झगड़ा भी हो गया था बाद में पुलिस की मदद से मामले को शांत करवाकर अर्थी को आगे के लिए रवाना किया। इस दौरान एक मजेदार नजारा तब दिखा जब ‘मुर्दा’ बना युवक बार-बार अपनी आंखें गुलाल से बचाता नजर आया। वही युवक भी कई बार बैठा होकर नाचने लगा। युवाओं की टोली डीजे की थाप पर नाचते-गाते हुए इस यात्रा को आगे बढ़ा रही थी।

2000 हजार किलोग्राम गुलाल से रंगीन हुई सड़कें

आयोजन समिति के संयोजक लादूलाल भांड ने बताया कि इस आयोजन के लिए करीब 200 कट्टों में भरी 2000 हजार किलोग्राम गुलाल का उपयोग किया गया। चित्तौड़ वालों की हवेली से शुरू होकर यह यात्रा शहर के प्रमुख बाजारों गोल प्याऊ चौराहा, गुलमंडी और सराफा बाजार से होती हुई बहाला पहुंची। रास्ते भर लोग व महिलाएं शवयात्रा के मार्ग पर खड़ी रही। गुलाल से भरी पिकअप में रखा इलोजी का पुतला आकर्षण का केंद्र रहा। यात्रा के आगे युवक हांडी (अग्नि) लेकर चल रहा था। बाहला में यात्रा संपन्न हुई, जहां सनैती पर सोए युवक ने उठकर भाग गया। सनैती का दहन किया गया।

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