Bhilwara textile hub: भारत को ग्लोबल टेक्सटाइल हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा दांव खेला है। केंद्रीय बजट में घोषित ‘समर्थ 2.0’ योजना के जरिए देश के टेक्सटाइल सेक्टर का पूरी तरह कायाकल्प होने जा रहा है।
‘स्पिनिंग से लेकर फैशन’ तक पूरी वैल्यू चेन को आधुनिक बनाने के लिए सरकार अगले पांच वर्षों 2026-31 में 2940 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य 15 लाख लोगों को प्रशिक्षित कर उन्हें हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए तैयार करना है।
एकेडमिक और इंडस्ट्री का परफेक्ट मैच
वित्त मंत्री ने साफ किया है कि समर्थ 2.0 केवल एक ट्रेनिंग प्रोग्राम नहीं, बल्कि एक आधुनिक इकोसिस्टम है। इसमें पहली बार आईआईटी दिल्ली जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों और शाही एक्सपोर्ट्स व अरविंद मिल लिमिटेड जैसे बड़े औद्योगिक घरानों को एक मंच पर लाया गया है।
योजना के तहत कॉलेजों में डिजिटल क्लासरूम और एडवांस मशीनरी वाली लैब स्थापित की जाएंगी, ताकि छात्र किताबी ज्ञान के साथ-साथ सीधे फैक्ट्री की मशीनों पर काम सीख सकें।
योजना को प्रभावी बनाने के लिए टेक्सटाइल कमिश्नर, केंद्रीय रेशम बोर्ड, जूट आयुक्त, आईआईटी दिल्ली, और तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन सहित 27 प्रमुख संस्थानों व विशेषज्ञों से राय मशविरा किया गया है।
खास बातें जो बदल देंगी तस्वीर
हर साल 3 लाख को ट्रेनिंग: योजना के तहत प्रति वर्ष 3 लाख युवाओं को स्किलिंग, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग दी जाएगी।
महिलाओं का दबदबा: पिछली योजना की सफलता 88 प्रतिशत महिला भागीदारी को देखते हुए, इस बार भी महिलाओं और एस्पिरेशनल जिलों पर विशेष फोकस रहेगा।
परंपरा को तकनीक का साथ: राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों के पारंपरिक हथकरघा और हस्तशिल्प कारीगरों को अब डिजिटल मार्केटिंग और एंटरप्रेन्योरशिप सिखाई जाएगी।
हाई-टेक मॉनिटरिंग: फर्जीवाड़े को रोकने के लिए आइरिस-बेस्ड बायोमेट्रिक हाजिरी और एआई आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग होगी।
क्यों पड़ी जरूरत
भारत का लक्ष्य 2030 तक 100 बिलियन डॉलर का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट करना है। पीएम मित्रा पार्क और पीएलआई स्कीम के आने से भारी निवेश की उम्मीद है, लेकिन इस निवेश को संभालने के लिए कुशल वर्कफोर्स की कमी है। समर्थ 2.0 इसी गैप को भरेगा।
समर्थ 2.0 योजना: बजट और लाभार्थियों का वार्षिक विवरण
| वित्तीय वर्ष | कुल बजट (करोड़ ₹ में) | लक्षित लाभार्थी (संख्या) |
| 2026-27 | 406 | 2 लाख |
| 2027-28 | 574 | 3 लाख |
| 2028-29 | 642 | 3.50 लाख |
| 2029-30 | 634 | 3.50 लाख |
| 2030-31 | 544 | 3 लाख |
| कुल योग | 2,940 | 15 लाख |


