‘जानवरों की तरह रखते हैं, खाना नहीं देते, हमें बचाइए’:42 दिनों से कंबोडिया में फंसे भोजपुर के 2 युवक, साइबर ठगी से इनकार पर पासपोर्ट-वीजा जब्त

‘जानवरों की तरह रखते हैं, खाना नहीं देते, हमें बचाइए’:42 दिनों से कंबोडिया में फंसे भोजपुर के 2 युवक, साइबर ठगी से इनकार पर पासपोर्ट-वीजा जब्त

‘बेटे को विदेश भेजने के लिए अपने घर की भैंस, दो बीघा में लगी धान की फसल को बेच दिया। इसके बाद भी पैसे कम पड़े तो सूद पक पैसे लेकर ढाई लाख पूरा किया और बेटे को कमाने के लिए कंबोडिया भेजा। अब 5 लाख रुपए कहां से दूं, मर भी जाऊंगा तो इतनी बड़ी रकम नहीं दे पाऊंगा। रिश्तेदारों, पड़ोसियों और सेठ से कुछ-कुछ पैसे जुगाड़कर बेटे को कमाने के लिए कंबोडिया भेजा था। मुझे क्या पता था कि मेरा बेटा वहां जाने के बाद जालसाजों के चंगुल में फंस जाएगा। अब जालसाजों ने झूठे केस में मेरे बेटे को जेल भिजवा दिया है, रिहाई के लिए 5 लाख रुपए मांग रहा है।’ भोजपुर के जगदीशपुर के अमरजीत और पीरो प्रखंड के मनीष के परिजन ने ये बातें दैनिक भास्कर से बातचीत में कही है। दरअसल, अमरजीत और मनीष एक एजेंट के जरिए काम के लिए 41 दिन पहले यानी 28 जनवरी को कंबोडिया गए थे। परिजन का कहना है कि हमारे बेटों को कंबोडिया में जेल भेज दिया गया है। अमरजीत और मनीष किस एजेंट के जरिए कंबोडिया गए थे? 41 दिनों में उनके साथ क्या-क्या हुआ? आखिर उन्हें जेल क्यों भेज दिया गया? अमरजीत और मनीष के परिजन का क्या कहना है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए अमरजीत और मनीष की पूरी कहानी दरअसल, मुंबई के एक एजेंट ने अमरजीत और मनीष को होटल में जॉब का झांसा देकर कंबोडिया के नामपेन्ह शहर में भेजा था। लेकिन 29 जनवरी को कंबोडिया पहुंचते ही एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह ने अमरजीत और मनीष को अपने कब्जे में ले लिया। दोनों पर साइबर ठगी करने का दबाव बनाया जाने लगा। अमरजीत और मनीष ने जब इसका विरोध किया तो जालसाजों के गिरोह ने दोनों का पासपोर्ट और अन्य कागजात जब्त कर लिया। मुंबई के एजेंट की मिलीभगत से दोनों को झूठे आरोप में जेल भिजवा दिया। हालांंकि, जेल भेजे जाने से पहले अमरजीत और मनीष ने अपने-अपने घर कॉल कर पूरी बात बताई थी। दोनों ने बताया था कि हम लोगों को यहां जानवरों की तरह रखा जा रहा है, खाना नहीं दिया जा रहा है और साइबर ठगी से इनकार करने पर मारपीट की जाती है। अमरजीत और मनीष ने परिजन से अपनी जान बचाने की गुहार लगाई। दोनों युवकों के परिजन के मुताबिक, हाल ही में अमरजीत और मनीष का कॉल आया था। दोनों ने बताया था कि हम लोग घर लौट रहे हैं, लेकिन इसके बाद जालसाजों ने उन्हें जेल भिजवा दिया। अब जालसाजों की ओर से अमरजीत और मनीष के परिजन को लगातार कॉल आ रहे हैं। जालसाजों की ओर से अमरजीत और मनीष की रिहाई के लिए 5 से 6 लाख रुपए मांगे जा रहे हैं। धमकी दी जा रही है कि दो सप्ताह के अंदर पैसे नहीं मिले तो अंजाम बहुत बुरा होगा। अब जानिए, अमरजीत के कंबोडिया जाने की पूरी कहानी 25 साल के अमरजीत कुमार जगदीशपुर प्रखंड के अरैला गांव के रहने वाले हृदयानंद राम के बेटे हैं। अमरजीत के पिता मजदूरी करते हैं। अमरजीत की शादी 2023 में पिंकी देवी से हुई थी। अमरजीत और पिंकी का बेटा अय्यांश 11 मार्च को ही एक साल का हुआ है। पिंकी देवी ने कहा कि जाते वक्त अमरजीत बेटे से बोलकर गए थे, जल्दी आऊंगा, तुम्हारे जन्मदिन पर खिलौने भिजवा दूंगा। अमरजीत की मां प्रभावती देवी ने बताया कि जनवरी में मेरे बेटे ने मुझसे कहा था कि मां मैं जॉब करने कंबोडिया जाऊंगा। आप बिल्कुल किसी बात की चिंता मत करना। अपनी बहू पिंकी और पोते अय्यांश का ख्याल रखना। मैं विदेश में जॉब करूंगा तो धीरे-धीरे घर के सारे हालात ठीक करूंगा। प्रभावती देवी ने बताया कि 28 जनवरी को अपने एक रिश्तेदार मनीष कुमार के साथ कंबोडिया के लिए निकल गया। 29 जनवरी को कोलकाता से फ्लाइट लिया और कंबोडिया पहुंचा और फोन कर इसकी जानकारी दी। प्रभावती देवी ने बताया कि मुंबई के रहने वाले संजय चौपगार उर्फ लक्की ने मेरे बेटे को कंबोडिया में होटल में काम और फूड पैकिंग की जॉब दिलाने की बात कही थी। उसने कहा था कि हर महीने तुम्हें 800 डॉलर मिलेंगे। मेरा बेटा संजय चौपगार के झांसे में आ गया। मैं भी बेटे की बातों का विरोध नहीं कर पाई, ज्यादा सवाल नहीं पूछ पाई, क्योंकि घर की हालत ठीक नहीं है। 19 फरवरी को फोन पर बात हुई थी। बेटे ने कहा कि यहां कुछ ठीक नहीं है। मैं 21 फरवरी को गांव आ जाऊंगा, लेकिन इसके ठेकेदार ने उसके साथ मारपीट करते हुए सभी कागजातों को छीन लिया। पिंकी देवी बोली- अलग-अलग नंबरों से लगातार कॉल कर पैसे मांगे जा रहे अमरजीत की पत्नी पिंकी कुमारी ने बताया कि 19 फरवरी के बाद से पति से बात नहीं हो पाई है। 21 फरवरी के बाद से अलग–अलग नंबर से फोन आ रहे हैं। फोन करने वालों का कहना है कि अगर 5 लाख रुपए नहीं दोगे, तो तुम्हारे पति को जिंदा नहीं छोड़ेंगे। वकील और पुलिस के नाम पर पैसा मांगा जा रहा है। पिंकी ने बताया कि इससे पहले मेरे पति नासिक और दमन जाकर काम कर चुके हैं। बेटा अय्यांश जब पैदा हुआ था, तो अमरजीत गांव आए थे। अमरजीत घर के कमाने वाले इकलौते सदस्य हैं। अब उनके साथ बुरा हो रहा है, घर में कई दिनों से चूल्हा तक नहीं जला है। वहीं, गांव के वार्ड सदस्य दिनेश राम ने बताया कि अमरजीत का परिवार बहुत गरीब है, ये लोग इतना पैसा किसी भी हालत में नहीं दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि मैंने आरा के जिलाधिकारी को लिखित आवेदन दिया है। इसके बाद आरा के सांसद सुदामा प्रसाद से भी मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी है। अब जानिए, मनीष के कंबोडिया जाने की कहानी 28 साल के मनीष अगिआंव बाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत बड़की खननी कला गांव के रहने वाले हैं। मनीष की मां रामकुमारी देवी के मुताबिक, मेरे बेटे ने साइंस से ग्रेजुएशन किया है। पढ़ाई के बाद वो जॉब के लिए ओमान गया था, लेकिन कोरोना के वक्त गांव आ गया था। मनीष का बड़ा भाई उमाशंकर पत्नी और बच्चों के साथ पंजाब में रहता है। इसलिए घर की जिम्मेदारी मनीष पर ही थी। रामकुमारी देवी ने बताया कि घर में मनीष की पत्नी सुमन कुमारी, दो बेटी रिया और गोल्डी, एक बेटा हरीश है। तीनों बच्चों की बेहतर पढ़ाई के लिए मेरा बेटा कमाने कंबोडिया गया था। मुंबई के संतोष ने फेसबुक पर मनीष को दिया था अपना नंबर रामकुमारी देवी ने बताया कि मुंबई के रहने वाले संतोष ने फेसबुक पर मेरे बेटे मनीष को अपना नंबर दिया था। कहा था कि एक अच्छा काम दिलवा देंगे, जिसमें खूब पैसा मिलेगा। मेरे बेटे ने पता नहीं कैसे संतोष पर भरोसा कर लिया और उसके कहने पर 28 जनवरी को कंबोडिया चला गया। ‘मना किया था, लेकिन मेरा बेटा एजेंट के बहकावे में आकर फंस गया’ रामकुमारी ने कहा कि मैंने बेटे को कहा था कि किसी अनजान के कहने पर भरोसा मत करो, लेकिन मनीष एजेंट संतोष के बहकावे और लालच में आ गया। उन्होंने कहा कि एजेंट संतोष ने मुझसे भी बात की थी। उसने मुझसे कहा था कि माताजी आप बिल्कुल मत डरिए, कुछ नहीं होगा। मनीष मेरे भाई जैसा है। हम आपके बेटे को एक बड़े होटल में जॉब दिलाएंगे। रामकुमारी देवी ने बताया कि बेटे को कंबोडिया भेजने में ढाई लाख रुपए का खर्च आया था। मेरा बेटा डेढ़ महीने से कंबोडिया में फंसा है, पता नहीं किस हाल में होगा। अब जालसाजों की ओर से लगातार कॉल कर पैसे की डिमांड की जा रही है। मैं भारत सरकार से से हाथ जोड़कर विनती करती हूं कि मेरे बेटे को जल्द से जल्द गांव वापस लाया जाए। वहीं, आरा के सांसद सुदामा प्रसाद ने विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। सांसद ने इसे आपात स्थिति बताते हुए भारत सरकार से कंबोडिया की सरकार के साथ राजनीतिक स्तर पर बात कर अमरजीत और मनीष की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने की अपील की है। ‘बेटे को विदेश भेजने के लिए अपने घर की भैंस, दो बीघा में लगी धान की फसल को बेच दिया। इसके बाद भी पैसे कम पड़े तो सूद पक पैसे लेकर ढाई लाख पूरा किया और बेटे को कमाने के लिए कंबोडिया भेजा। अब 5 लाख रुपए कहां से दूं, मर भी जाऊंगा तो इतनी बड़ी रकम नहीं दे पाऊंगा। रिश्तेदारों, पड़ोसियों और सेठ से कुछ-कुछ पैसे जुगाड़कर बेटे को कमाने के लिए कंबोडिया भेजा था। मुझे क्या पता था कि मेरा बेटा वहां जाने के बाद जालसाजों के चंगुल में फंस जाएगा। अब जालसाजों ने झूठे केस में मेरे बेटे को जेल भिजवा दिया है, रिहाई के लिए 5 लाख रुपए मांग रहा है।’ भोजपुर के जगदीशपुर के अमरजीत और पीरो प्रखंड के मनीष के परिजन ने ये बातें दैनिक भास्कर से बातचीत में कही है। दरअसल, अमरजीत और मनीष एक एजेंट के जरिए काम के लिए 41 दिन पहले यानी 28 जनवरी को कंबोडिया गए थे। परिजन का कहना है कि हमारे बेटों को कंबोडिया में जेल भेज दिया गया है। अमरजीत और मनीष किस एजेंट के जरिए कंबोडिया गए थे? 41 दिनों में उनके साथ क्या-क्या हुआ? आखिर उन्हें जेल क्यों भेज दिया गया? अमरजीत और मनीष के परिजन का क्या कहना है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए अमरजीत और मनीष की पूरी कहानी दरअसल, मुंबई के एक एजेंट ने अमरजीत और मनीष को होटल में जॉब का झांसा देकर कंबोडिया के नामपेन्ह शहर में भेजा था। लेकिन 29 जनवरी को कंबोडिया पहुंचते ही एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह ने अमरजीत और मनीष को अपने कब्जे में ले लिया। दोनों पर साइबर ठगी करने का दबाव बनाया जाने लगा। अमरजीत और मनीष ने जब इसका विरोध किया तो जालसाजों के गिरोह ने दोनों का पासपोर्ट और अन्य कागजात जब्त कर लिया। मुंबई के एजेंट की मिलीभगत से दोनों को झूठे आरोप में जेल भिजवा दिया। हालांंकि, जेल भेजे जाने से पहले अमरजीत और मनीष ने अपने-अपने घर कॉल कर पूरी बात बताई थी। दोनों ने बताया था कि हम लोगों को यहां जानवरों की तरह रखा जा रहा है, खाना नहीं दिया जा रहा है और साइबर ठगी से इनकार करने पर मारपीट की जाती है। अमरजीत और मनीष ने परिजन से अपनी जान बचाने की गुहार लगाई। दोनों युवकों के परिजन के मुताबिक, हाल ही में अमरजीत और मनीष का कॉल आया था। दोनों ने बताया था कि हम लोग घर लौट रहे हैं, लेकिन इसके बाद जालसाजों ने उन्हें जेल भिजवा दिया। अब जालसाजों की ओर से अमरजीत और मनीष के परिजन को लगातार कॉल आ रहे हैं। जालसाजों की ओर से अमरजीत और मनीष की रिहाई के लिए 5 से 6 लाख रुपए मांगे जा रहे हैं। धमकी दी जा रही है कि दो सप्ताह के अंदर पैसे नहीं मिले तो अंजाम बहुत बुरा होगा। अब जानिए, अमरजीत के कंबोडिया जाने की पूरी कहानी 25 साल के अमरजीत कुमार जगदीशपुर प्रखंड के अरैला गांव के रहने वाले हृदयानंद राम के बेटे हैं। अमरजीत के पिता मजदूरी करते हैं। अमरजीत की शादी 2023 में पिंकी देवी से हुई थी। अमरजीत और पिंकी का बेटा अय्यांश 11 मार्च को ही एक साल का हुआ है। पिंकी देवी ने कहा कि जाते वक्त अमरजीत बेटे से बोलकर गए थे, जल्दी आऊंगा, तुम्हारे जन्मदिन पर खिलौने भिजवा दूंगा। अमरजीत की मां प्रभावती देवी ने बताया कि जनवरी में मेरे बेटे ने मुझसे कहा था कि मां मैं जॉब करने कंबोडिया जाऊंगा। आप बिल्कुल किसी बात की चिंता मत करना। अपनी बहू पिंकी और पोते अय्यांश का ख्याल रखना। मैं विदेश में जॉब करूंगा तो धीरे-धीरे घर के सारे हालात ठीक करूंगा। प्रभावती देवी ने बताया कि 28 जनवरी को अपने एक रिश्तेदार मनीष कुमार के साथ कंबोडिया के लिए निकल गया। 29 जनवरी को कोलकाता से फ्लाइट लिया और कंबोडिया पहुंचा और फोन कर इसकी जानकारी दी। प्रभावती देवी ने बताया कि मुंबई के रहने वाले संजय चौपगार उर्फ लक्की ने मेरे बेटे को कंबोडिया में होटल में काम और फूड पैकिंग की जॉब दिलाने की बात कही थी। उसने कहा था कि हर महीने तुम्हें 800 डॉलर मिलेंगे। मेरा बेटा संजय चौपगार के झांसे में आ गया। मैं भी बेटे की बातों का विरोध नहीं कर पाई, ज्यादा सवाल नहीं पूछ पाई, क्योंकि घर की हालत ठीक नहीं है। 19 फरवरी को फोन पर बात हुई थी। बेटे ने कहा कि यहां कुछ ठीक नहीं है। मैं 21 फरवरी को गांव आ जाऊंगा, लेकिन इसके ठेकेदार ने उसके साथ मारपीट करते हुए सभी कागजातों को छीन लिया। पिंकी देवी बोली- अलग-अलग नंबरों से लगातार कॉल कर पैसे मांगे जा रहे अमरजीत की पत्नी पिंकी कुमारी ने बताया कि 19 फरवरी के बाद से पति से बात नहीं हो पाई है। 21 फरवरी के बाद से अलग–अलग नंबर से फोन आ रहे हैं। फोन करने वालों का कहना है कि अगर 5 लाख रुपए नहीं दोगे, तो तुम्हारे पति को जिंदा नहीं छोड़ेंगे। वकील और पुलिस के नाम पर पैसा मांगा जा रहा है। पिंकी ने बताया कि इससे पहले मेरे पति नासिक और दमन जाकर काम कर चुके हैं। बेटा अय्यांश जब पैदा हुआ था, तो अमरजीत गांव आए थे। अमरजीत घर के कमाने वाले इकलौते सदस्य हैं। अब उनके साथ बुरा हो रहा है, घर में कई दिनों से चूल्हा तक नहीं जला है। वहीं, गांव के वार्ड सदस्य दिनेश राम ने बताया कि अमरजीत का परिवार बहुत गरीब है, ये लोग इतना पैसा किसी भी हालत में नहीं दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि मैंने आरा के जिलाधिकारी को लिखित आवेदन दिया है। इसके बाद आरा के सांसद सुदामा प्रसाद से भी मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी है। अब जानिए, मनीष के कंबोडिया जाने की कहानी 28 साल के मनीष अगिआंव बाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत बड़की खननी कला गांव के रहने वाले हैं। मनीष की मां रामकुमारी देवी के मुताबिक, मेरे बेटे ने साइंस से ग्रेजुएशन किया है। पढ़ाई के बाद वो जॉब के लिए ओमान गया था, लेकिन कोरोना के वक्त गांव आ गया था। मनीष का बड़ा भाई उमाशंकर पत्नी और बच्चों के साथ पंजाब में रहता है। इसलिए घर की जिम्मेदारी मनीष पर ही थी। रामकुमारी देवी ने बताया कि घर में मनीष की पत्नी सुमन कुमारी, दो बेटी रिया और गोल्डी, एक बेटा हरीश है। तीनों बच्चों की बेहतर पढ़ाई के लिए मेरा बेटा कमाने कंबोडिया गया था। मुंबई के संतोष ने फेसबुक पर मनीष को दिया था अपना नंबर रामकुमारी देवी ने बताया कि मुंबई के रहने वाले संतोष ने फेसबुक पर मेरे बेटे मनीष को अपना नंबर दिया था। कहा था कि एक अच्छा काम दिलवा देंगे, जिसमें खूब पैसा मिलेगा। मेरे बेटे ने पता नहीं कैसे संतोष पर भरोसा कर लिया और उसके कहने पर 28 जनवरी को कंबोडिया चला गया। ‘मना किया था, लेकिन मेरा बेटा एजेंट के बहकावे में आकर फंस गया’ रामकुमारी ने कहा कि मैंने बेटे को कहा था कि किसी अनजान के कहने पर भरोसा मत करो, लेकिन मनीष एजेंट संतोष के बहकावे और लालच में आ गया। उन्होंने कहा कि एजेंट संतोष ने मुझसे भी बात की थी। उसने मुझसे कहा था कि माताजी आप बिल्कुल मत डरिए, कुछ नहीं होगा। मनीष मेरे भाई जैसा है। हम आपके बेटे को एक बड़े होटल में जॉब दिलाएंगे। रामकुमारी देवी ने बताया कि बेटे को कंबोडिया भेजने में ढाई लाख रुपए का खर्च आया था। मेरा बेटा डेढ़ महीने से कंबोडिया में फंसा है, पता नहीं किस हाल में होगा। अब जालसाजों की ओर से लगातार कॉल कर पैसे की डिमांड की जा रही है। मैं भारत सरकार से से हाथ जोड़कर विनती करती हूं कि मेरे बेटे को जल्द से जल्द गांव वापस लाया जाए। वहीं, आरा के सांसद सुदामा प्रसाद ने विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। सांसद ने इसे आपात स्थिति बताते हुए भारत सरकार से कंबोडिया की सरकार के साथ राजनीतिक स्तर पर बात कर अमरजीत और मनीष की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने की अपील की है।  

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