कोर्ट ने आईओ से पूछा-हॉस्टल मालिक को जेल में रखने का आधार क्या, क्यों न आप पर केस दर्ज हो

कोर्ट ने आईओ से पूछा-हॉस्टल मालिक को जेल में रखने का आधार क्या, क्यों न आप पर केस दर्ज हो

नीट छात्रा की मौत के मामले में बेउर जेल में बंद हॉस्टल मालिक मनीष रंजन की जमानत पर बुधवार को पॉक्सो कोर्ट में सुनवाई हुई। तीन घंटे तक सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सीबीआई के आईओ को कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा-मनीष को किस आधार पर जेल पर रखे हुए हैं? इसका क्या आधार है? क्यों नहीं आप पर केस दर्ज हो? जब वह गैरकानूनी रूप से जेल में बंद है तो इसका मुआवजा कौन देगा? इस पर आईओ ने कोई जवाब नहीं दिया। पटना सिविल कोर्ट के एक वकील का निधन होने से जमानत पर सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। गुरुवार को भी सुनवाई होगी। पॉक्सो कोर्ट इस बात से भी नाराज दिखा कि सीबीआई ने पॉक्सो एक्ट तो लगा दिया पर केस को ट्रांसफर नहीं किया। परिजन बोले-केस को सीबीआई और एसआईटी ने किल कर दिया छात्रा के परिजन के वकील ने कोर्ट से कहा-सीबीआई और एसआईटी ने इस गंभीर केस को किल कर दिया। उन्होंने धमकी संबंधी ऑडियो भी अदालत को सुनाया। जांच एजेंसी कुछ नहीं कर सकी। अदालत ने मनीष रंजन से पूछा-5 और 6 जनवरी को आप कहां थे? मनीष ने पहले कहा कि हॉस्टल में थे, फिर बयान बदलते हुए कहा-लखीसराय में थे। स्पेशल पीपी सुरेश चंद्र प्रसाद ने सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कहा-सीबीआई ने केस को पॉक्सो कोर्ट में ट्रांसफर नहीं किया। इसी कोर्ट में संज्ञान लेने के बाद फिर दूसरे कोर्ट में सुनवाई संभव है। आज कोर्ट सुना सकता है फैसला मनीष की जमानत पर चार तारीख पर बहस हो चुकी है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान दो बातें हो सकती हैं। 12 मार्च को अदालत फैसला सुना सकती है। छात्रा के पिता के बयान पर 9 जनवरी को चित्रगुप्तनगर थाने में केस दर्ज किया गया था। उन्होंने छात्रा के शरीर पर चोट के निशान होने और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने का प्रयास किए जाने का भी शक जाहिर किया था। 11 जनवरी को अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हुई। एफएसएल रिपोर्ट में उसके कपड़े पर स्पर्म मिला। बिहार सरकार ने 31 जनवरी को मामले की जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा की थी। 12 फरवरी को सीबीआई ने केस टेकआेवर किया था। नीट छात्रा की मौत के मामले में बेउर जेल में बंद हॉस्टल मालिक मनीष रंजन की जमानत पर बुधवार को पॉक्सो कोर्ट में सुनवाई हुई। तीन घंटे तक सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सीबीआई के आईओ को कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा-मनीष को किस आधार पर जेल पर रखे हुए हैं? इसका क्या आधार है? क्यों नहीं आप पर केस दर्ज हो? जब वह गैरकानूनी रूप से जेल में बंद है तो इसका मुआवजा कौन देगा? इस पर आईओ ने कोई जवाब नहीं दिया। पटना सिविल कोर्ट के एक वकील का निधन होने से जमानत पर सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। गुरुवार को भी सुनवाई होगी। पॉक्सो कोर्ट इस बात से भी नाराज दिखा कि सीबीआई ने पॉक्सो एक्ट तो लगा दिया पर केस को ट्रांसफर नहीं किया। परिजन बोले-केस को सीबीआई और एसआईटी ने किल कर दिया छात्रा के परिजन के वकील ने कोर्ट से कहा-सीबीआई और एसआईटी ने इस गंभीर केस को किल कर दिया। उन्होंने धमकी संबंधी ऑडियो भी अदालत को सुनाया। जांच एजेंसी कुछ नहीं कर सकी। अदालत ने मनीष रंजन से पूछा-5 और 6 जनवरी को आप कहां थे? मनीष ने पहले कहा कि हॉस्टल में थे, फिर बयान बदलते हुए कहा-लखीसराय में थे। स्पेशल पीपी सुरेश चंद्र प्रसाद ने सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कहा-सीबीआई ने केस को पॉक्सो कोर्ट में ट्रांसफर नहीं किया। इसी कोर्ट में संज्ञान लेने के बाद फिर दूसरे कोर्ट में सुनवाई संभव है। आज कोर्ट सुना सकता है फैसला मनीष की जमानत पर चार तारीख पर बहस हो चुकी है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान दो बातें हो सकती हैं। 12 मार्च को अदालत फैसला सुना सकती है। छात्रा के पिता के बयान पर 9 जनवरी को चित्रगुप्तनगर थाने में केस दर्ज किया गया था। उन्होंने छात्रा के शरीर पर चोट के निशान होने और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने का प्रयास किए जाने का भी शक जाहिर किया था। 11 जनवरी को अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हुई। एफएसएल रिपोर्ट में उसके कपड़े पर स्पर्म मिला। बिहार सरकार ने 31 जनवरी को मामले की जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा की थी। 12 फरवरी को सीबीआई ने केस टेकआेवर किया था।  

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