इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कोर्ट ऐसे मामलों से परेशान है, जिनमें याचिकाकर्ताओं ने वैकल्पिक उपाय का लाभ उठाया है—जो कि सिविल अदालतों द्वारा प्रदान किया गया था, और अवमानना के मामले भी दायर किए गए हैं; फिर भी राज्य की संस्थाओं द्वारा अदालत के आदेशों का बेशर्मी से उल्लंघन किया जाता है। जिससे वैकल्पिक उपाय की उपलब्धता ही व्यर्थ हो जाती है। इस कोर्ट का मानना है कि सिविल अदालत के आदेशों का उल्लंघन करने के लिए राज्य के अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। कोर्ट के पास सिविल अदालत के आदेशों के ऐसे उल्लंघनों का स्वतः संज्ञान लेने का पर्याप्त आधार है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कानून का शासन कायम रहे। अफसरों को दंडित किया जाना जरूरी कोर्ट ने कहा राज्य को यह समझना चाहिए और ध्यान में रखना चाहिए कि एक बार सक्षम क्षेत्राधिकार वाली अदालत द्वारा कोई न्यायिक आदेश पारित कर दिया जाता है, तो उसका पालन किया जाना अनिवार्य है, या फिर उसे किसी उच्च अदालत के आदेश द्वारा स्थगित किया जाना चाहिए।
यदि राज्य आदेशों का पालन नहीं करता है और न ही उन्हें स्थगित करवाने के लिए कोई कदम उठाता है, तो यह घोर उल्लंघन माना जाएगा। ऐसी परिस्थितियों में, राज्य के अधिकारियों को अवमानना के लिए दंडित किया जाना चाहिए। एसडीएम मधुबन राजेश हाजिर हों कोर्ट ने सिविल कोर्ट मऊ की यथास्थिति कायम रखने व अदालत की अवमानना नोटिस के बावजूद आदेश की अवहेलना जारी रखने को गंभीरता से लिया है और एसडीएम मधुबन राजेश अग्रवाल को व्यवस्थित हलफनामे के साथ 13 मार्च को हाजिर होने का निर्देश दिया है।और पूछा है कि उनके खिलाफ 30 अक्टूबर 24 के सिविल अदालत के आदेश की अवहेलना के लिए क्यों न अवमानना कार्यवाही की जाय। कोर्ट ने कहा यदि वह हाजिर नहीं होंगे तो उन्हें पेश करने के लिए जमानती व तत्पश्चात गैर जमानती वारंट जारी किया जाएगा। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को याची की जमीन पर सड़क निर्माण पर रोकने का भी आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने श्रीमती आशा त्रिपाठी की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। याची को आदेश का पालन कराने के लिए हाईकोर्ट में दो बार याचिका दायर करनी पड़ी। अधिकारी अदालत के आदेश का उल्लघंन कर रहे शुरू में जमीन विवाद को लेकर याची ने प्राइवेट विपक्षियों के खिलाफ सिविल वाद दायर किया। सिविल कोर्ट ने यथास्थिति कायम रखने का निर्देश दिया। इसके विपरीत सरकार ने याची की विवादित जमीन पर सड़क का निर्माण जारी रखा।तो रोकने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। कोर्ट ने कहा सिविल कोर्ट में आदेश 39 नियम 4 ए के अंतर्गत वैकल्पिक उपचार के तहत अवमानना अर्जी दायर करें। याची की अर्जी पर सिविल कोर्ट ने अवमानना नोटिस जारी की है। इसका कोई असर नहीं पड़ा। निर्माण जारी रखा तो दुबारा यह याचिका दायर कर याची की जमीन पर सड़क निर्माण पर रोक लगाने की मांग की। कोर्ट ने कहा राज्य के अधिकारी अदालत के आदेश का उल्लघंन कर रहे हैं। ऐसे में हाईकोर्ट को स्वयं कार्यवाही करने की शक्ति प्राप्त है।और ऐसे अधिकारियों को दंडित करना चाहिए।जिसपर कोर्ट ने एस डी एम को तलब किया है।


