पंजाब में 1158 असिस्टेंट प्रोफेसर और लाइब्रेरियन की भर्ती को लेकर विवाद एक बार फिर गरमा गया है। लुधियाना के जगराओं में बुधवार को 1158 असिस्टेंट प्रोफेसर और लाइब्रेरियन फ्रंट पंजाब के नेतृत्व में असिस्टेंट प्रोफेसरों और लाइब्रेरियन्स ने रोष मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने बस स्टैंड चौक पर पंजाब सरकार और शिक्षा मंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुतला फूंका। प्रदर्शनकारी परमजीत सिंह और करमजीत सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 14 जुलाई 2025 को भर्ती रद्द करने के फैसले से उन्हें गहरी चिंता है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल भर्ती हुए उम्मीदवारों और उनके परिवारों के लिए, बल्कि पंजाब की उच्च शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के भविष्य के लिए भी हानिकारक हो सकता है। फ्रंट के प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी है। ऐसे में पहले से कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसरों और लाइब्रेरियनों की सेवाएं समाप्त करना उचित नहीं है। उन्होंने पंजाब सरकार से मांग की कि 1158 भर्ती के तहत नियुक्त सभी असिस्टेंट प्रोफेसरों और लाइब्रेरियनों की नौकरी को स्थायी किया जाए। हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट द्वारा जारी लेटर रद्द करने की मांग इसके अतिरिक्त, फ्रंट ने हायर एजुकेशन विभाग द्वारा 4 नवंबर 2025 को जारी किए गए पत्र को तत्काल रद्द करने की मांग की। उन्होंने इन कर्मचारियों की नियमित छुट्टियां बहाल करने और दूरस्थ स्टेशनों पर कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसरों व लाइब्रेरियनों के लिए नजदीकी स्टेशनों पर तबादले हेतु ट्रांसफर पोर्टल खोलने की भी अपील की। फ्रंट के नेताओं ने पंजाब के मुख्यमंत्री से सार्वजनिक बयान जारी कर यह आश्वासन देने की मांग की कि भर्ती किए गए 1158 प्रोफेसरों और लाइब्रेरियनों की नौकरी सुरक्षित रहेगी। साथ ही, उन्होंने कॉलेजों में प्रिंसिपल और प्रशासन द्वारा इन कर्मचारियों के साथ हो रहे भेदभाव को तुरंत बंद करने की भी अपील की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लेती है, तो वे अपने संघर्ष को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे।


