इंदौर में VIP मूवमेंट पर हाईकोर्ट सख्त:प्रशासन से पूछा- किन्हें मिलता है जीरो ट्रैफिक का अधिकार, ऐसे वीआईपी की सूची दें

इंदौर में VIP मूवमेंट पर हाईकोर्ट सख्त:प्रशासन से पूछा- किन्हें मिलता है जीरो ट्रैफिक का अधिकार, ऐसे वीआईपी की सूची दें

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शहर में वीआईपी मूवमेंट के दौरान लागू किए जाने वाले जीरो ट्रैफिक प्रोटोकॉल पर बुधवार को सवाल उठाया है। कोर्ट ने प्रशासन से स्पष्ट जानकारी मांगी है। कलेक्टर इंदौर को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे सभी वीआईपी की सूची प्रस्तुत करें जिन्हें वास्तव में यह सुविधा देने का अधिकार है। कहा है कि जो इस श्रेणी में नहीं आते हैं, उन्हें ऐसी सुविधा नहीं दी जानी चाहिए। वीआईपी मूवमेंट के कारण आम नागरिकों को होने वाली परेशानी का मुद्दा भी अदालत में प्रमुखता से उठा। वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बगड़िया ने कहा कि कई बार वीआईपी मूवमेंट के दौरान लंबे समय तक ट्रैफिक रोका जाता है। जिससे लोगों को भारी असुविधा होती है। कई स्थानों पर स्ट्रीट लाइटें भी बंद कर दी जाती हैं और मूवमेंट खत्म होने के बाद अचानक ट्रैफिक खोलने से अव्यवस्था और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। वोट मांगने जाते हैं तब क्यों कोई खतरा नहीं इस पर न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी ने टिप्पणी की है कि प्रशासन के लिए यह केवल समय बचाने का नहीं बल्कि सुरक्षा का प्रश्न होता है। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता बगड़िया ने कहा कि यही जनप्रतिनिधि चुनाव के समय घर-घर जाकर लोगों से वोट मांगते हैं, तब उन्हें कोई खतरा नहीं लगता, लेकिन चुनाव जीतने के बाद उन्हीं सड़कों पर चलना सुरक्षा जोखिम बताया जाता है। बुधवार को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगल पीठ के समक्ष इंदौर शहर से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सुनवाई हुई। इनमें बीआरटीएस बस स्टॉपों को हटाने की प्रगति, फुटपाथों पर अतिक्रमण, अवैध धार्मिक संरचनाएं और ट्रैफिक जाम की समस्या शामिल रही। बीआरटीएस के 17 में से 3 बस स्टॉप पूरी तरह से हटाए नगर निगम की ओर से कोर्ट को बताया गया कि शहर में मौजूद 17 बीआरटीएस बस स्टॉपों में से 3 को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है और उनका मलबा भी हटा दिया गया है। शेष बस स्टॉपों को हटाने के लिए लगभग 40 दिन का समय लगेगा। निगम ने यह भी कहा कि अगले 7 से 8 दिनों में चार और बस स्टॉपों को हटाने का लक्ष्य रखा गया है। सुनवाई के दौरान फुटपाथों पर रेहड़ी-पटरी से होने वाले अतिक्रमण और अवैध धार्मिक संरचनाओं का मुद्दा भी उठा। इस पर कोर्ट ने कलेक्टर शिवम वर्मा को निर्देश दिए कि ऐसे सभी अवैध ढांचों और अतिक्रमणों का संज्ञान लेकर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने कलेक्टर इंदौर और नगर निगम आयुक्त को यह भी निर्देश दिए कि शहर में ट्रैफिक जाम, अतिक्रमण और अवरोध जैसी समस्याओं का समाधान करने के लिए क्षेत्रवार निरीक्षण कर कार्रवाई की जाए, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके।

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