ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से सूखे मेवे महंगे हो गए हैं। रमजान के पवित्र महीने में खजूर और काजू की कीमतों में विशेष वृद्धि दर्ज की गई है। काजू की कीमत लगभग ₹900 से बढ़कर ₹1000 प्रति किलो हो गई है, जबकि छुहारा ₹600 से ₹650 तक पहुंच गया है। यह मूल्य वृद्धि युद्ध के कारण माल ढुलाई (शिपिंग) में आ रही दिक्कतों और आयात लागत में बढ़ोतरी का परिणाम है। खजूर, काजू और अन्य सूखे मेवे मुख्य रूप से खाड़ी देशों से आयात किए जाते हैं, जिनकी आपूर्ति श्रृंखला इस भू-राजनीतिक तनाव से सीधे प्रभावित हुई है। यह मूल्य वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब रमजान के महीने में खजूर की खपत सर्वाधिक होती है। व्यापारियों का अनुमान है कि यदि युद्ध की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो अगले 10-15 दिनों में वर्तमान स्टॉक समाप्त होने के बाद कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
खजूर व्यापारी हांजी बिलाल ने बताया कि इराक, सऊदी अरब और ईरान से आने वाली खजूर के लिए भारत में हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली प्रमुख वितरण केंद्र हैं। उन्होंने जानकारी दी कि रमजान के लिए रखे गए बड़े स्टॉक को इन केंद्रों पर रोक दिया गया है, जिससे भविष्य में खजूर की कीमतें बढ़ने की आशंका है। बिलाल ने यह भी बताया कि ईरान पर हमले के बाद से उनके 15 दिनों से लगे ऑर्डर अभी तक नहीं आए हैं, क्योंकि आपूर्तिकर्ताओं ने माल भेजना बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि रमजान के दौरान वे अभी भी खजूर को पुराने दरों पर ही बेच रहे हैं। ईरान से आने वाली अच्छी गुणवत्ता वाली केमिया खजूर ₹140 से ₹280 प्रति आधा किलो के बॉक्स में उपलब्ध है।


