नालंदा से दिल्ली-मुंबई की ट्रेनें फुल:श्रमजीवी के स्लीपर कोच में 5 अप्रैल तक लंबी वेटिंग, मगध एक्सप्रेस में भी 30 मार्च तक जगह नहीं

नालंदा से दिल्ली-मुंबई की ट्रेनें फुल:श्रमजीवी के स्लीपर कोच में 5 अप्रैल तक लंबी वेटिंग, मगध एक्सप्रेस में भी 30 मार्च तक जगह नहीं

होली के बाद काम पर लौटने वाले यात्रियों की परेशानियां बढ़ गई है। नालंदा से देश के 2 बड़े महानगरों, दिल्ली-मुंबई जाने वाली तमाम प्रमुख ट्रेनें पूरी तरह से फुल है। आरक्षण काउंटरों से लकेर ऑनलाइन पॉर्टल तक लंबी वेटिंग लिस्ट है। राजगीर रेलवे स्टेशन से नई दिल्ली जाने वाली जिले की लाइफलाइन मानी जाने वाली श्रमजीवी एक्सप्रेस की स्थिति सबसे खराब है। इस ट्रेन के स्लीपर कोच में 5 अप्रैल तक लंबी वेटिंग चल रही है। वहीं, इस्लामपुर से नई दिल्ली जाने वाली मगध एक्सप्रेस में भी 30 मार्च तक पैर रखने की जगह नहीं है। दिल्ली के साथ-साथ मुंबई जाने वालों को भी राहत नहीं मिल रही है। राजगीर से लोकमान्य तिलक टर्मिनस (मुंबई) जाने वाली जनता एक्सप्रेस में 29 मार्च तक सभी सीटें फुल हैं और वेटिंग का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। एसी कोच की भी यही स्थिति है।
जनरल जैसा हुआ स्लीपर और थर्ड एसी का हाल पर्व-त्योहारों के मौके पर यात्रियों का दबाव इतना अधिक है कि ट्रेनों के स्लीपर और थर्ड एसी कोच की स्थिति भी जनरल कोच जैसी हो गई है। जनरल बोगी तो साल भर अपनी क्षमता से अधिक भरी रहती ही हैं, लेकिन फिलहाल आरक्षित कोचों में भी गैलरी और गेट के पास बैठकर यात्रा करने की मजबूरी दिख रही है।
स्पेशल ट्रेनों का ही सहारा
रेल प्रशासन की ओर से यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए पटना से महानगरों के लिए कई स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। हालांकि, जिला मुख्यालय और आसपास के यात्रियों का कहना है कि इन स्पेशल ट्रेनों में भी मारामारी कम नहीं है। स्थानीय लोगों की मांग है कि भीड़ को देखते हुए प्रमुख ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़े जाएं ताकि आम जनता को कुछ राहत मिल सके। फिलहाल, जो यात्री पहले से टिकट बुक नहीं करा पाए थे, वे अब तत्काल टिकट या स्पेशल ट्रेनों के भरोसे अपनी यात्रा की योजना बना रहे हैं। होली के बाद काम पर लौटने वाले यात्रियों की परेशानियां बढ़ गई है। नालंदा से देश के 2 बड़े महानगरों, दिल्ली-मुंबई जाने वाली तमाम प्रमुख ट्रेनें पूरी तरह से फुल है। आरक्षण काउंटरों से लकेर ऑनलाइन पॉर्टल तक लंबी वेटिंग लिस्ट है। राजगीर रेलवे स्टेशन से नई दिल्ली जाने वाली जिले की लाइफलाइन मानी जाने वाली श्रमजीवी एक्सप्रेस की स्थिति सबसे खराब है। इस ट्रेन के स्लीपर कोच में 5 अप्रैल तक लंबी वेटिंग चल रही है। वहीं, इस्लामपुर से नई दिल्ली जाने वाली मगध एक्सप्रेस में भी 30 मार्च तक पैर रखने की जगह नहीं है। दिल्ली के साथ-साथ मुंबई जाने वालों को भी राहत नहीं मिल रही है। राजगीर से लोकमान्य तिलक टर्मिनस (मुंबई) जाने वाली जनता एक्सप्रेस में 29 मार्च तक सभी सीटें फुल हैं और वेटिंग का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। एसी कोच की भी यही स्थिति है।
जनरल जैसा हुआ स्लीपर और थर्ड एसी का हाल पर्व-त्योहारों के मौके पर यात्रियों का दबाव इतना अधिक है कि ट्रेनों के स्लीपर और थर्ड एसी कोच की स्थिति भी जनरल कोच जैसी हो गई है। जनरल बोगी तो साल भर अपनी क्षमता से अधिक भरी रहती ही हैं, लेकिन फिलहाल आरक्षित कोचों में भी गैलरी और गेट के पास बैठकर यात्रा करने की मजबूरी दिख रही है।
स्पेशल ट्रेनों का ही सहारा
रेल प्रशासन की ओर से यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए पटना से महानगरों के लिए कई स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। हालांकि, जिला मुख्यालय और आसपास के यात्रियों का कहना है कि इन स्पेशल ट्रेनों में भी मारामारी कम नहीं है। स्थानीय लोगों की मांग है कि भीड़ को देखते हुए प्रमुख ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़े जाएं ताकि आम जनता को कुछ राहत मिल सके। फिलहाल, जो यात्री पहले से टिकट बुक नहीं करा पाए थे, वे अब तत्काल टिकट या स्पेशल ट्रेनों के भरोसे अपनी यात्रा की योजना बना रहे हैं।  

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