मुख्यमंत्री युवा उद्यमी रोजगार योजना के तहत ऋण दिलाने के नाम पर कथित रिश्वत मांगने के आरोप में बहुजन समाज पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेश चौधरी को एंटी करप्शन टीम ने मंगलवार शाम गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई इतनी अचानक हुई कि समर्थकों के बीच चल रही बैठक अफरा-तफरी में बदल गई। यह गिरफ्तारी न सिर्फ प्रशासनिक हलकों में, बल्कि स्थानीय राजनीति में भी चर्चा का केंद्र बन गई है। मामले की शुरुआत बघौली थाना क्षेत्र के अछरामऊ गांव निवासी सीमा (परिवर्तित नाम) की शिकायत से हुई। आरोप है कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी रोजगार योजना के तहत 5 लाख रुपये का लोन पास कराने के बदले सुरेश चौधरी ने 50 हजार रुपये की मांग की। बताया जा रहा है कि चौधरी कछौना क्षेत्र में बैंक ऑफ बड़ौदा का बीसी (बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट) केंद्र संचालित करते हैं। युवती ने कथित रूप से बातचीत और मांग के प्रमाण जुटाकर एंटी करप्शन टीम से संपर्क किया। इसके बाद टीम ने ट्रैप की योजना बनाई और कार्रवाई की रणनीति तय की। मंगलवार शाम एंटी करप्शन टीम ने मुसलमानाबाद सपहिया गांव में दबिश दी। उस समय सुरेश चौधरी अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे थे। टीम ने मौके पर ही उन्हें हिरासत में लिया। अचानक हुई कार्रवाई से वहां मौजूद लोगों में हलचल मच गई। कुछ देर तक समर्थकों ने स्थिति समझने की कोशिश की, लेकिन टीम उन्हें अपने साथ ले गई। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी की खबर इलाके में तेजी से फैल गई।
7 घंटे पूछताछ, दस्तावेज जब्त; देर रात लखनऊ रवाना हिरासत में लेने के बाद टीम उन्हें कछौना रेलवे स्टेशन के गार्ड रूम ले गई, जहां करीब सात घंटे तक पूछताछ की गई। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान उनके पास से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और लेन-देन से जुड़े कागजात जब्त किए गए। देर रात एंटी करप्शन टीम उन्हें आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए लखनऊ लेकर रवाना हो गई। अधिकारियों की ओर से औपचारिक बयान आने का इंतजार है। राजनीतिक साजिश’ का दावा, जिले में तेज हुई चर्चा सुरेश चौधरी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया है। उनका कहना है कि उन्हें बदनाम करने के उद्देश्य से फंसाया गया है। हालांकि एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई के बाद जिले में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस मामले का असर स्थानीय सियासत पर भी पड़ सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं।


