पटना के नीट छात्रा रेप-मौत मामले में जेल में बंद शंभू गर्ल्स हॉस्टल बिल्डिंग मालिक मनीष रंजन की जमानत याचिका पर आज सुनवाई होगी। पॉक्सो कोर्ट में ये हियरिंग होनी है। इसके पहले सुनवाई में मनीष का पक्ष रखते हुए इनके वकील ने कोर्ट से जमानत देने की अपील की थी। इस पर पीड़ित परिवार के वकील एसके पांडेय ने कड़ा विरोध जताया था। दूसरी तरफ, पटना पुलिस और वर्तमान में केस की जांच कर रही CBI कोर्ट में कह चुकी है कि उन्हें मनीष रंजन की जरूरत नहीं है। इस पर कोर्ट ने सवाल उठाते हुए इन दोनों से पूछा था कि फिर मनीष जेल में क्यों बंद है? बता दें कि इस मामले में पिछली सुनवाई 2 मार्च को हुई थी। उस दिन ही अगली सुनवाई के लिए 11 मार्च की तारीख तय की गई। इस कारण मनीष रंजन को अपनी होली इस बार बेउर जेल में ही मनानी पड़ी। बाद में जोड़ी गई थी पॉक्सो की धारा जब CBI ने इस केस को टेक ओवर किया, तब उसमें पोक्सो एक्ट की धारा को जोड़ा नहीं गया था। इसे लेकर भी कोर्ट की तरफ से कड़ी टिप्पणी की गई थी। इसके बाद पिछले सप्ताह सरकार की तरफ से एक नोटिफिकेशन जारी किया गया। इसके आधार पर ही CBI ने भी अपने यहां दर्ज केस में पोक्सो एक्ट की धारा को जोड़ा है। मनीष की जमानत याचिका के साथ ही नीट छात्रा से रेप-मौत के मामले की सुनवाई भी पोक्सो कोर्ट में ही होगी। एजेंसी को नहीं मिले सबूत अपने हाथ में केस लेने के बाद CBI ने जिस तरीके से इसकी जांच की। पटना और जहानाबाद जिले में जिन लोगों से पूछताछ की। हॉस्टल समेत कुछ जगहों को खंगाला। सूत्र बताते हैं कि उसके बाद भी इस केस को लेकर कोई ठोस सबूत उनके हाथ नहीं लगे हैं। इनकी जांच की दिशा भी अब तक पटना पुलिस की SIT के तर्ज पर ही रही है। यही वजह है कि पीड़ित परिवार और उनके वकील बार-बार CBI के उपर केस में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते रहे हैं। सुनवाई के दौरान जांच में खामियां सामने आने पर कोर्ट ने भी सख्त टिप्पणी की थी। पटना के नीट छात्रा रेप-मौत मामले में जेल में बंद शंभू गर्ल्स हॉस्टल बिल्डिंग मालिक मनीष रंजन की जमानत याचिका पर आज सुनवाई होगी। पॉक्सो कोर्ट में ये हियरिंग होनी है। इसके पहले सुनवाई में मनीष का पक्ष रखते हुए इनके वकील ने कोर्ट से जमानत देने की अपील की थी। इस पर पीड़ित परिवार के वकील एसके पांडेय ने कड़ा विरोध जताया था। दूसरी तरफ, पटना पुलिस और वर्तमान में केस की जांच कर रही CBI कोर्ट में कह चुकी है कि उन्हें मनीष रंजन की जरूरत नहीं है। इस पर कोर्ट ने सवाल उठाते हुए इन दोनों से पूछा था कि फिर मनीष जेल में क्यों बंद है? बता दें कि इस मामले में पिछली सुनवाई 2 मार्च को हुई थी। उस दिन ही अगली सुनवाई के लिए 11 मार्च की तारीख तय की गई। इस कारण मनीष रंजन को अपनी होली इस बार बेउर जेल में ही मनानी पड़ी। बाद में जोड़ी गई थी पॉक्सो की धारा जब CBI ने इस केस को टेक ओवर किया, तब उसमें पोक्सो एक्ट की धारा को जोड़ा नहीं गया था। इसे लेकर भी कोर्ट की तरफ से कड़ी टिप्पणी की गई थी। इसके बाद पिछले सप्ताह सरकार की तरफ से एक नोटिफिकेशन जारी किया गया। इसके आधार पर ही CBI ने भी अपने यहां दर्ज केस में पोक्सो एक्ट की धारा को जोड़ा है। मनीष की जमानत याचिका के साथ ही नीट छात्रा से रेप-मौत के मामले की सुनवाई भी पोक्सो कोर्ट में ही होगी। एजेंसी को नहीं मिले सबूत अपने हाथ में केस लेने के बाद CBI ने जिस तरीके से इसकी जांच की। पटना और जहानाबाद जिले में जिन लोगों से पूछताछ की। हॉस्टल समेत कुछ जगहों को खंगाला। सूत्र बताते हैं कि उसके बाद भी इस केस को लेकर कोई ठोस सबूत उनके हाथ नहीं लगे हैं। इनकी जांच की दिशा भी अब तक पटना पुलिस की SIT के तर्ज पर ही रही है। यही वजह है कि पीड़ित परिवार और उनके वकील बार-बार CBI के उपर केस में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते रहे हैं। सुनवाई के दौरान जांच में खामियां सामने आने पर कोर्ट ने भी सख्त टिप्पणी की थी।


