वर्ष 2014 के लूट मामले में 11 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। वहीं गवाही के दौरान अपने बयान से मुकरने पर अदालत ने अब वादी के खिलाफ ही विधिक कार्यवाही चलाने के आदेश दिए हैं।
विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र विकास गोयल की अदालत में विचाराधीन इस मामले में विनोद पुत्र महेशचंद निवासी हरिनगर थाना इरादतनगर और अंकित पुत्र विजयपाल सिंह निवासी सेवला थाना सदर को आरोपों से मुक्त कर दिया गया। अदालत ने पाया कि मुख्य वादी बबलू कुशवाह ने अदालत में अपने पूर्व बयान से मुकरते हुए घटना की पुष्टि नहीं की, जबकि बरामदगी का कोई स्वतंत्र गवाह भी पेश नहीं किया गया। अभियोजन के अनुसार, बबलू कुशवाह ने थाना ताजगंज में तहरीर देकर बताया था कि 4 मई 2014 की रात करीब सात बजे वह कलाकृति चौराहे से अपने गांव इटोरा जा रहा था। बसई चौकी पार कर ताज व्यू तिराहे के पास बाइक सवार दो बदमाशों ने उसे धक्का देकर उसका कीमती मोबाइल लूट लिया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच के दौरान दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर कथित रूप से लूटा गया मोबाइल बरामद किया था और उन्हें जेल भेज दिया था।
मामले की सुनवाई के दौरान वादी बबलू कुशवाह, एसआई राजकुमार सिंह और पुलिसकर्मी ध्यानवीर सिंह की गवाही दर्ज हुई। लेकिन वादी के बयान से मुकरने और स्वतंत्र साक्ष्य के अभाव में आरोप सिद्ध नहीं हो सके। बचाव पक्ष के अधिवक्ता सोनवीर सिंह के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी करते हुए झूठी गवाही के मामले में वादी बबलू कुशवाह के खिलाफ विधिक कार्रवाई करने के आदेश दिए।


