बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग में सिर्फ 5 दिन बाकी है। NDA और महागठबंधन ने अपनी-अपनी चालें चलनी शुरू कर दी है। RJD कैंडिडेट अमरेंद्रधारी सिंह को जिताने के लिए बिहार कांग्रेस के बड़े नेता एक्टिव हो गए हैं तो दूसरी तरफ उपेंद्र कुशवाहा के पीछे BJP की रणनीति है। वहीं, नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाने की खबर ने महागठबंधन की राह के रोड़े को कम कर दिया है। कांग्रेस की रणनीति असदुद्दीन ओवैसी को तेजस्वी यादव को सपोर्ट करने के लिए राह बना रही है। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…ओवैसी क्यों महागठबंधन को वोट कर सकते हैं। पहले जानिए, वोटिंग कब है और प्रत्याशी कौन-कौन हैं… बिहार में राज्यसभा की 5 सीटें अप्रैल में खाली हो रही हैं। 16 मार्च की सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच वोटिंग होगी और उसी दिन शाम 5 बजे वोटों की गिनती की जाएगी। चुने हुए नए सांसदों का कार्यकाल उनके शपथ ग्रहण की तिथि से अगले 6 साल, यानी 2032 तक रहेगा। राज्यसभा चुनाव में खाली सीट+1 का फॉर्मूला चलता है। जैसे- बिहार में 5 सीट खाली है तो 5+1 फॉर्मूला चलेगा। इसके तहत एक राज्यसभा सांसद को जिताने के लिए 41 वोट चाहिए। महागठबंधन (RJD+कांग्रेस+लेफ्ट+IIP) के पास 35 विधायक हैं। 5 विधायक असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और 1 BSP के विधायक हैं। सबको जोड़ने पर 41 विधायक होते हैं। इस तरह अगर सब ठीक रहा तो तेजस्वी लीड महागठबंधन प्रत्याशी जीत सकते हैं। 2025 विधानसभा चुनाव में NDA को 243 में से 202 सीटें मिली हैं। 41 वोटों के लिहाज से BJP और JDU के 2-2 कैंडिडेट आराम से चुनाव जीत जाएंगे। 5वीं सीट जीतने के लिए उसके पास 38 विधायक बचेंगे। उसे 3 और विधायकों की जरूरत होगी। 2 पॉइंट में तेजस्वी को क्यों समर्थन दे सकते हैं ओवैसी 1. तेलंगाना में सरकार का सहयोग चाहिए, कांग्रेस ओवैसी को साध रही RJD प्रत्याशी एडी सिंह को जिताने के लिए कांग्रेस के एक बड़े और लालू परिवार के करीबी नेता एक्टिव हो गए हैं। उन्होंने ओवैसी को साधने का प्रयास तेज कर दिया है। दरअसल, ओवैसी हैदराबाद से आते हैं। वह उनका घर है। वहां कांग्रेस की सरकार है। ओवैसी की राजनीतिक को देखें तो वह तेलंगाना में जिसकी सरकार रहती है, उससे वह संबंध ठीक रखते हैं। 2. भाजपा CM बना रही, वोट बैंक बचाने बचाना जरूरी नीतीश कुमार ने राज्यसभा का नामांकन कर दिया है। इसके साथ ही तय हो गया है कि वह मुख्यमंत्री पद छोड़ रहे हैं। अगला मुख्यमंत्री भाजपा का होगा। हालांकि, अब तक आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। NDA 243 में से 202 सीटों पर जीत कर सत्ता में आई है। ओवैसी को सीमांचल की उन सीटों पर जीत मिली है, जहां मुस्लिम जिताने में सक्षम थे। 2020 में भी उनकी पार्टी इसी 5 सीटों बायसी, अमौर, कोचाधामन, बहादुरगंज और जोकीहाट पर जीती थी, इस बार भी यहीं जीती है। ओवैसी ने मुस्लिम वोटरों में की है सेंधमारी ओवैसी के साथ वोटिंग से बाहर रहने का भी ऑप्शन चूंकि, राज्यसभा चुनाव में नोटा का ऑप्शन नहीं होता है। हां, यह जरूर हो सकता है कि विधायक चाहे तो वोटिंग से दूर रह सकता है। ओवैसी की पार्टी के पास एक ऑप्शन वोटिंग से अलग रहने का भी हो सकता है। पार्टी चाहे तो NDA या महागठबंधन में से किसी भी पार्टी को वोट नहीं करे। वोटिंग से ही बाहर हो जाए। अगर ऐसा होगा तब… इसे ऐसे समझिए… 243-5=238 कुल वैध वोट तब Q= 238/ (5+1)= 39.6 मतलब 40 38 विधायक NDA के पास पहले से ही हैं। अनंत सिंह के वोट नहीं डालने से बिगड़ सकता है कुशवाहा का समीकरण बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग में सिर्फ 5 दिन बाकी है। NDA और महागठबंधन ने अपनी-अपनी चालें चलनी शुरू कर दी है। RJD कैंडिडेट अमरेंद्रधारी सिंह को जिताने के लिए बिहार कांग्रेस के बड़े नेता एक्टिव हो गए हैं तो दूसरी तरफ उपेंद्र कुशवाहा के पीछे BJP की रणनीति है। वहीं, नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाने की खबर ने महागठबंधन की राह के रोड़े को कम कर दिया है। कांग्रेस की रणनीति असदुद्दीन ओवैसी को तेजस्वी यादव को सपोर्ट करने के लिए राह बना रही है। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…ओवैसी क्यों महागठबंधन को वोट कर सकते हैं। पहले जानिए, वोटिंग कब है और प्रत्याशी कौन-कौन हैं… बिहार में राज्यसभा की 5 सीटें अप्रैल में खाली हो रही हैं। 16 मार्च की सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच वोटिंग होगी और उसी दिन शाम 5 बजे वोटों की गिनती की जाएगी। चुने हुए नए सांसदों का कार्यकाल उनके शपथ ग्रहण की तिथि से अगले 6 साल, यानी 2032 तक रहेगा। राज्यसभा चुनाव में खाली सीट+1 का फॉर्मूला चलता है। जैसे- बिहार में 5 सीट खाली है तो 5+1 फॉर्मूला चलेगा। इसके तहत एक राज्यसभा सांसद को जिताने के लिए 41 वोट चाहिए। महागठबंधन (RJD+कांग्रेस+लेफ्ट+IIP) के पास 35 विधायक हैं। 5 विधायक असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और 1 BSP के विधायक हैं। सबको जोड़ने पर 41 विधायक होते हैं। इस तरह अगर सब ठीक रहा तो तेजस्वी लीड महागठबंधन प्रत्याशी जीत सकते हैं। 2025 विधानसभा चुनाव में NDA को 243 में से 202 सीटें मिली हैं। 41 वोटों के लिहाज से BJP और JDU के 2-2 कैंडिडेट आराम से चुनाव जीत जाएंगे। 5वीं सीट जीतने के लिए उसके पास 38 विधायक बचेंगे। उसे 3 और विधायकों की जरूरत होगी। 2 पॉइंट में तेजस्वी को क्यों समर्थन दे सकते हैं ओवैसी 1. तेलंगाना में सरकार का सहयोग चाहिए, कांग्रेस ओवैसी को साध रही RJD प्रत्याशी एडी सिंह को जिताने के लिए कांग्रेस के एक बड़े और लालू परिवार के करीबी नेता एक्टिव हो गए हैं। उन्होंने ओवैसी को साधने का प्रयास तेज कर दिया है। दरअसल, ओवैसी हैदराबाद से आते हैं। वह उनका घर है। वहां कांग्रेस की सरकार है। ओवैसी की राजनीतिक को देखें तो वह तेलंगाना में जिसकी सरकार रहती है, उससे वह संबंध ठीक रखते हैं। 2. भाजपा CM बना रही, वोट बैंक बचाने बचाना जरूरी नीतीश कुमार ने राज्यसभा का नामांकन कर दिया है। इसके साथ ही तय हो गया है कि वह मुख्यमंत्री पद छोड़ रहे हैं। अगला मुख्यमंत्री भाजपा का होगा। हालांकि, अब तक आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। NDA 243 में से 202 सीटों पर जीत कर सत्ता में आई है। ओवैसी को सीमांचल की उन सीटों पर जीत मिली है, जहां मुस्लिम जिताने में सक्षम थे। 2020 में भी उनकी पार्टी इसी 5 सीटों बायसी, अमौर, कोचाधामन, बहादुरगंज और जोकीहाट पर जीती थी, इस बार भी यहीं जीती है। ओवैसी ने मुस्लिम वोटरों में की है सेंधमारी ओवैसी के साथ वोटिंग से बाहर रहने का भी ऑप्शन चूंकि, राज्यसभा चुनाव में नोटा का ऑप्शन नहीं होता है। हां, यह जरूर हो सकता है कि विधायक चाहे तो वोटिंग से दूर रह सकता है। ओवैसी की पार्टी के पास एक ऑप्शन वोटिंग से अलग रहने का भी हो सकता है। पार्टी चाहे तो NDA या महागठबंधन में से किसी भी पार्टी को वोट नहीं करे। वोटिंग से ही बाहर हो जाए। अगर ऐसा होगा तब… इसे ऐसे समझिए… 243-5=238 कुल वैध वोट तब Q= 238/ (5+1)= 39.6 मतलब 40 38 विधायक NDA के पास पहले से ही हैं। अनंत सिंह के वोट नहीं डालने से बिगड़ सकता है कुशवाहा का समीकरण


