वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है झारखंड में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) खर्च को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य में स्पष्ट और प्रभावी सीएसआर नीति नहीं होने के कारण कई कंपनियां अपने सामाजिक दायित्व को सही तरीके से पूरा नहीं कर रही हैं। राज्य सरकार ने हाल ही में सीएसआर के दायरे में आने वाली 52 कंपनियों से पिछले तीन वर्षों में किए गए खर्च का विवरण मांगा है, लेकिन अधिकांश कंपनियों ने बार-बार मांगने के बावजूद जानकारी नहीं दी। जानकारी के अनुसार, सिर्फ 11 कंपनियों ने ही झारखंड में किए गए सीएसआर खर्च का ब्योरा उपलब्ध कराया है। इनमें से भी दो कंपनियों ने देशभर में हुए खर्च का आंकड़ा दिया है। तीन साल में कंपनियों का सीएसआर खर्च अदाणी — 16.0 करोड़
आधुनिक — 6.5 करोड़
टाटा कुमिंस — 20.0 करोड़
इनलैंड पावर — 2.50 करोड़
मैथन पावर — 7.0 करोड़
मेकॉन — 2.5 करोड़
डीवीसी — 19.0 करोड़
बोकारो स्टील — 20.0 करोड़
ग्रासिम इंडस्ट्रीज — 5.5 करोड़ अभी झारखंड में 2020 की नीति लागू, इसमें संशोधन नहीं फिलहाल झारखंड में झारखंड कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी पॉलिसी 2020 लागू है। अगस्त 2021 में केंद्र सरकार ने इस नीति को वापस लेने को कहा था। हालांकि अब तक इसमें संशोधन नहीं किया गया है और यह उसी रूप में लागू है। वर्ष 2020 से पहले झारखंड में केंद्रीय नीति के तहत ही सीएसआर के काम किए जाते थे। नई राज्य नीति में कंपनियों से कहा गया था कि वे सीएसआर की राशि सीधे खर्च करने के बजाय राज्य के पास जमा करें। इसके बाद इस राशि से सरकारी योजनाओं में मौजूद क्रिटिकल गैप को भरने की व्यवस्था की गई थी। केंद्र सरकार ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई थी। क्या होता है सीएसआर सीएसआर एक कानूनी व्यवस्था है, जिसके तहत कंपनियों को अपने मुनाफे का एक हिस्सा सामाजिक कार्यों पर खर्च करना होता है। इसका उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में समाज के कमजोर वर्गों की मदद करना है। बिहार में बना सीएसआर पोर्टल बिहार सरकार ने सीएसआर नीति के तहत ऑनलाइन सीएसआर पोर्टल शुरू किया है। कंपनियों को सीएसआर से जुड़ी जानकारी इसी पोर्टल पर देनी होती है। पिछले साल अगस्त से यह व्यवस्था लागू है। सरकार ने 500 करोड़ रुपए का सीएसआर फंड जुटाने का लक्ष्य रखा है। इस पोर्टल पर यह भी देखा जा सकता है कि कौन-सी कंपनी किस जिले में कितनी राशि खर्च कर रही है। टाटा मोटर्स — 26 करोड़ टाटा स्टील — 1000 करोड़ (देशभर का खर्च) केंद्र ने 5 साल पहले ही जताई थी आपत्ति झारखंड की सीएसआर नीति पर करीब पांच साल पहले ही केंद्र सरकार ने आपत्ति जताई थी। कहा गया था कि राज्य की नीति कंपनी अधिनियम की धारा 135 की मूल भावना के विपरीत है और इसमें संशोधन किया जाना चाहिए। इसके बावजूद अब तक नई नीति नहीं बन सकी है और पुरानी व्यवस्था ही लागू है। तीन साल पहले चतरा के तत्कालीन डीसी ने भी सीएसआर कार्यों में आ रही बाधाओं को लेकर राज्य सरकार को पत्र लिखा था। वे एनटीपीसी नॉर्थ कर्णपुरा के सीएसआर फंड से टंडवा प्रखंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का नवीनीकरण कराना चाहते थे, लेकिन नीति के प्रावधानों को लेकर भ्रम की स्थिति के कारण यह मामला आगे नहीं बढ़ सका। डीसी ने सरकार से पूछा था कि यह कार्य किस स्तर की स्वीकृति के तहत आएगा। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है झारखंड में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) खर्च को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य में स्पष्ट और प्रभावी सीएसआर नीति नहीं होने के कारण कई कंपनियां अपने सामाजिक दायित्व को सही तरीके से पूरा नहीं कर रही हैं। राज्य सरकार ने हाल ही में सीएसआर के दायरे में आने वाली 52 कंपनियों से पिछले तीन वर्षों में किए गए खर्च का विवरण मांगा है, लेकिन अधिकांश कंपनियों ने बार-बार मांगने के बावजूद जानकारी नहीं दी। जानकारी के अनुसार, सिर्फ 11 कंपनियों ने ही झारखंड में किए गए सीएसआर खर्च का ब्योरा उपलब्ध कराया है। इनमें से भी दो कंपनियों ने देशभर में हुए खर्च का आंकड़ा दिया है। तीन साल में कंपनियों का सीएसआर खर्च अदाणी — 16.0 करोड़
आधुनिक — 6.5 करोड़
टाटा कुमिंस — 20.0 करोड़
इनलैंड पावर — 2.50 करोड़
मैथन पावर — 7.0 करोड़
मेकॉन — 2.5 करोड़
डीवीसी — 19.0 करोड़
बोकारो स्टील — 20.0 करोड़
ग्रासिम इंडस्ट्रीज — 5.5 करोड़ अभी झारखंड में 2020 की नीति लागू, इसमें संशोधन नहीं फिलहाल झारखंड में झारखंड कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी पॉलिसी 2020 लागू है। अगस्त 2021 में केंद्र सरकार ने इस नीति को वापस लेने को कहा था। हालांकि अब तक इसमें संशोधन नहीं किया गया है और यह उसी रूप में लागू है। वर्ष 2020 से पहले झारखंड में केंद्रीय नीति के तहत ही सीएसआर के काम किए जाते थे। नई राज्य नीति में कंपनियों से कहा गया था कि वे सीएसआर की राशि सीधे खर्च करने के बजाय राज्य के पास जमा करें। इसके बाद इस राशि से सरकारी योजनाओं में मौजूद क्रिटिकल गैप को भरने की व्यवस्था की गई थी। केंद्र सरकार ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई थी। क्या होता है सीएसआर सीएसआर एक कानूनी व्यवस्था है, जिसके तहत कंपनियों को अपने मुनाफे का एक हिस्सा सामाजिक कार्यों पर खर्च करना होता है। इसका उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में समाज के कमजोर वर्गों की मदद करना है। बिहार में बना सीएसआर पोर्टल बिहार सरकार ने सीएसआर नीति के तहत ऑनलाइन सीएसआर पोर्टल शुरू किया है। कंपनियों को सीएसआर से जुड़ी जानकारी इसी पोर्टल पर देनी होती है। पिछले साल अगस्त से यह व्यवस्था लागू है। सरकार ने 500 करोड़ रुपए का सीएसआर फंड जुटाने का लक्ष्य रखा है। इस पोर्टल पर यह भी देखा जा सकता है कि कौन-सी कंपनी किस जिले में कितनी राशि खर्च कर रही है। टाटा मोटर्स — 26 करोड़ टाटा स्टील — 1000 करोड़ (देशभर का खर्च) केंद्र ने 5 साल पहले ही जताई थी आपत्ति झारखंड की सीएसआर नीति पर करीब पांच साल पहले ही केंद्र सरकार ने आपत्ति जताई थी। कहा गया था कि राज्य की नीति कंपनी अधिनियम की धारा 135 की मूल भावना के विपरीत है और इसमें संशोधन किया जाना चाहिए। इसके बावजूद अब तक नई नीति नहीं बन सकी है और पुरानी व्यवस्था ही लागू है। तीन साल पहले चतरा के तत्कालीन डीसी ने भी सीएसआर कार्यों में आ रही बाधाओं को लेकर राज्य सरकार को पत्र लिखा था। वे एनटीपीसी नॉर्थ कर्णपुरा के सीएसआर फंड से टंडवा प्रखंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का नवीनीकरण कराना चाहते थे, लेकिन नीति के प्रावधानों को लेकर भ्रम की स्थिति के कारण यह मामला आगे नहीं बढ़ सका। डीसी ने सरकार से पूछा था कि यह कार्य किस स्तर की स्वीकृति के तहत आएगा।


