एसीबी की सुस्त जांच के बीच ईडी ने तेज की कार्रवाई; उत्पाद विभाग के अधिकारियों को समन, 12 से 15 मार्च तक पूछताछ

एसीबी की सुस्त जांच के बीच ईडी ने तेज की कार्रवाई; उत्पाद विभाग के अधिकारियों को समन, 12 से 15 मार्च तक पूछताछ

झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में जहां भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की जांच धीमी पड़ती नजर आ रही है, वहीं अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कार्रवाई तेज कर दी है। ईडी ने पहली बार उत्पाद विभाग के अधिकारियों और कर्मियों को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है। एजेंसी इनसे 12 से 15 मार्च के बीच अलग-अलग पूछताछ करेगी। इन सभी के खिलाफ एसीबी ने मई 2025 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17(ए) के तहत मामला (कांड संख्या 9/2025) दर्ज किया था। इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने ईसीआईआर संख्या 10/2025 दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की है। इससे साफ है कि अब जांच का दायरा उत्पाद विभाग के अंदर तक पहुंच सकता है। दरअसल, एसीबी ने मई 2025 से जनवरी 2026 के बीच इस मामले में 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। हालांकि अब तक किसी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल नहीं किया जा सका। इसी वजह से सभी आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिल गई। एसीबी जांच के बिंदुओं पर ईडी करेगा पूछताछ एसीबी की जांचके मुताबिक छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट ने झारखंड के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया। इसमें कई प्लेसमेंट एजेंसियों (विजन हॉस्पिटैलिटी और मार्शन सिक्योरिटी) का नाम सामने आया। इन एजेंसियों ने शराब दुकानों में मैनपॉवर उपलब्ध कराने के लिए फर्जी बैंक गारंटी जमा कर ठेका हासिल किया। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने आरबीआई के मानकों का पालन किए बिना इन गारंटियों का भौतिक सत्यापन तक नहीं कराया। शुरुआती जांच में राज्य को करीब 38 करोड़ रुपए के नुकसान की आशंका जताई गई थी, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर यह आंकड़ा 150 करोड़ रुपए से अधिक बताया गया। इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारियों ने घटिया गुणवत्ता की देसी शराब की आपूर्ति की, जिससे राज्य सरकार को करीब 136 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। ईडी अब इन्हीं बिंदुओं पर उत्पाद विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से विस्तृत पूछताछ करेगा। ईडी ने इन अधिकारियों को भेजा समन झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में जहां भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की जांच धीमी पड़ती नजर आ रही है, वहीं अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कार्रवाई तेज कर दी है। ईडी ने पहली बार उत्पाद विभाग के अधिकारियों और कर्मियों को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है। एजेंसी इनसे 12 से 15 मार्च के बीच अलग-अलग पूछताछ करेगी। इन सभी के खिलाफ एसीबी ने मई 2025 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17(ए) के तहत मामला (कांड संख्या 9/2025) दर्ज किया था। इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने ईसीआईआर संख्या 10/2025 दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की है। इससे साफ है कि अब जांच का दायरा उत्पाद विभाग के अंदर तक पहुंच सकता है। दरअसल, एसीबी ने मई 2025 से जनवरी 2026 के बीच इस मामले में 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। हालांकि अब तक किसी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल नहीं किया जा सका। इसी वजह से सभी आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिल गई। एसीबी जांच के बिंदुओं पर ईडी करेगा पूछताछ एसीबी की जांचके मुताबिक छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट ने झारखंड के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया। इसमें कई प्लेसमेंट एजेंसियों (विजन हॉस्पिटैलिटी और मार्शन सिक्योरिटी) का नाम सामने आया। इन एजेंसियों ने शराब दुकानों में मैनपॉवर उपलब्ध कराने के लिए फर्जी बैंक गारंटी जमा कर ठेका हासिल किया। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने आरबीआई के मानकों का पालन किए बिना इन गारंटियों का भौतिक सत्यापन तक नहीं कराया। शुरुआती जांच में राज्य को करीब 38 करोड़ रुपए के नुकसान की आशंका जताई गई थी, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर यह आंकड़ा 150 करोड़ रुपए से अधिक बताया गया। इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारियों ने घटिया गुणवत्ता की देसी शराब की आपूर्ति की, जिससे राज्य सरकार को करीब 136 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। ईडी अब इन्हीं बिंदुओं पर उत्पाद विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से विस्तृत पूछताछ करेगा। ईडी ने इन अधिकारियों को भेजा समन  

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