प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल-2025 के विरोध में झारखंड सहित देशभर में मंगलवार को बिजली इंजीनियरों और कर्मचारियों ने हड़ताल कर प्रदर्शन किया। इस दौरान राज्य के ऊर्जा विकास मुख्यालय समेत सभी जीएम, सर्किल और डिवीजन स्तर के बिजली कार्यालयों में धरना, प्रदर्शन और विरोध सभाएं आयोजित की गईं। यह आंदोलन ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन और नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉयीज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर किया गया। धुर्वा स्थित ऊर्जा विकास मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में फेडरेशन के अपर महासचिव सह जीएम संजय सिंह प्रस्तावित कानून को कर्मचारी विरोधी बताते हुए सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। केंद्र सरकार पर निजीकरण को बढ़ावा देने का लगाया आरोप उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बिल का उद्देश्य बिजली वितरण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निजीकरण को बढ़ावा देना और सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कमजोर करना है। इसके गंभीर प्रभाव किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं और बिजली कर्मचारियों पर पड़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार पांच वर्षों के भीतर क्रॉस-सब्सिडी समाप्त करने की योजना है। इससे कृषि उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में भारी वृद्धि हो सकती है। वर्तमान में सिंचाई के लिए रियायती बिजली पाने वाले किसानों को अधिक शुल्क देना पड़ेगा, जिससे कृषि उत्पादन लागत बढ़ने और ग्रामीण संकट गहराने की आशंका है। प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल-2025 के विरोध में झारखंड सहित देशभर में मंगलवार को बिजली इंजीनियरों और कर्मचारियों ने हड़ताल कर प्रदर्शन किया। इस दौरान राज्य के ऊर्जा विकास मुख्यालय समेत सभी जीएम, सर्किल और डिवीजन स्तर के बिजली कार्यालयों में धरना, प्रदर्शन और विरोध सभाएं आयोजित की गईं। यह आंदोलन ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन और नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉयीज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर किया गया। धुर्वा स्थित ऊर्जा विकास मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में फेडरेशन के अपर महासचिव सह जीएम संजय सिंह प्रस्तावित कानून को कर्मचारी विरोधी बताते हुए सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। केंद्र सरकार पर निजीकरण को बढ़ावा देने का लगाया आरोप उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बिल का उद्देश्य बिजली वितरण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निजीकरण को बढ़ावा देना और सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कमजोर करना है। इसके गंभीर प्रभाव किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं और बिजली कर्मचारियों पर पड़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार पांच वर्षों के भीतर क्रॉस-सब्सिडी समाप्त करने की योजना है। इससे कृषि उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में भारी वृद्धि हो सकती है। वर्तमान में सिंचाई के लिए रियायती बिजली पाने वाले किसानों को अधिक शुल्क देना पड़ेगा, जिससे कृषि उत्पादन लागत बढ़ने और ग्रामीण संकट गहराने की आशंका है।


