राजधानी लखनऊ में साहित्य और कविता का खूबसूरत संगम देखने को मिला, जब काव्यांगन साहित्यिक मंच की लखनऊ इकाई की ओर से साहित्यिक संध्या और प्रत्यक्ष काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, कवियों और रचनाकारों का जमावड़ा लगा, जहां सभी ने अपनी प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ कर साहित्यिक माहौल को जीवंत बना दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार मनोरमा लाल ने की। वहीं मुख्य अतिथि के रूप में रश्मि शरद और विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. रीमा सिन्हा की गरिमामयी उपस्थिति रही। दोनों अतिथियों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियों से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कवियों ने हास्य- व्यंग्य रचनाएँ सुनाई कार्यक्रम का शुभारंभ गिरिराज किशोर द्वारा प्रस्तुत वाणी वंदना से हुआ। उनकी प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को साहित्यिक और आध्यात्मिक ऊष्मा से भर दिया। इसके बाद एक के बाद एक कवियों ने मंच संभाला और अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।कार्यक्रम का संचालन पूर्णिमा भसीन और संदीपिका दीक्षित ने किया। उनकी सधी हुई शब्द शैली और आत्मीय अंदाज ने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाए रखा। कार्यक्रम के अंतिम चरण में अंतरराष्ट्रीय हास्य कवि सर्वेश अस्थाना की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा में चार चांद लगा दिए।अंत में अध्यक्ष मनोरमा लाल ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में साहित्य की महत्ता के बारे में बताया। संचालन समिति की ओर से पूर्णिमा भसीन ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। ये लोग शामिल हुए काव्य पाठ करने वाले रचनाकारों में पंकज सिंह, रश्मि सिंह, संध्या सिंह, गिरिराज किशोर शर्मा, नेहा सक्सेना, मंजूषा श्रीवास्तव, गरिमा लखनवी, मीनाक्षी शुक्ला, ललिता सेंगर, पूजा श्रीवास्तव, रीता जैन, मधु जैन और डॉ. अंजना मिश्रा शामिल रहे। सभी रचनाकारों ने अपनी सृजनात्मक प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया और सभागार में तालियों की गूंज सुनाई देती रही।


