दिल्ली-मुंबई नहीं भोपाल में मिलेगा थायराइड कैंसर का इलाज:हाइपरथायरॉइडिज्म में नहीं खानी पड़ेगी सालों दवा, एम्स के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में रेडियो आयोडीन ट्रीटमेंट शुरू

दिल्ली-मुंबई नहीं भोपाल में मिलेगा थायराइड कैंसर का इलाज:हाइपरथायरॉइडिज्म में नहीं खानी पड़ेगी सालों दवा, एम्स के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में रेडियो आयोडीन ट्रीटमेंट शुरू

थायराइड और इससे जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और कई मरीजों को लंबे समय तक दवाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। खासकर हाइपरथायरॉइडिज्म और थायराइड कैंसर के मामलों में मरीजों को पहले बड़े शहरों या दूसरे राज्यों के अस्पतालों का रुख करना पड़ता था। अब राजधानी भोपाल में ही इन दोनों बीमारियों के लिए आधुनिक और प्रभावी इलाज उपलब्ध हो गया है। एम्स भोपाल के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में रेडियो आयोडीन ट्रीटमेंट की सुविधा शुरू होने से मरीजों को बड़ी राहत मिली है। इस तकनीक से हाइपरथायरॉइडिज्म के मरीजों में लंबे समय तक दवा लेने की जरूरत कम हो सकती है, वहीं डिफरेंशिएटेड थायराइड कैंसर के लगभग 90 प्रतिशत मामलों का जड़ से इलाज संभव हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और सही उपचार से थायराइड से जुड़ी इन गंभीर समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। थायराइड की दो प्रमुख बीमारियों पर खास फोकस एम्स भोपाल के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में थायराइड से जुड़ी दो प्रमुख बीमारियों हाइपरथायरॉइडिज्म और डिफरेंशिएटेड थायराइड कैंसर के इलाज के लिए विशेष सुविधा उपलब्ध है। इन दोनों बीमारियों में आधुनिक तकनीक और रेडियो आयोडीन ट्रीटमेंट की मदद से प्रभावी उपचार किया जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार सही समय पर जांच और इलाज मिलने से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। हाइपरथायरॉइडिज्म में रेडियो आयोडीन उपचार प्रभावी हाइपरथायरॉइडिज्म ऐसी स्थिति है जिसमें थायराइड ग्रंथि सामान्य से अधिक सक्रिय हो जाती है। इसके कारण शरीर में थायराइड हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इस बीमारी में मरीजों को अक्सर लंबे समय तक एंटी-थायरॉइड दवाएं लेनी पड़ती हैं, जिससे कई बार शारीरिक और मानसिक थकान महसूस होने लगती है। ऐसे मामलों में एम्स भोपाल के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में रेडियो आयोडीन ट्रीटमेंट एक प्रभावी विकल्प के रूप में उपलब्ध है। यह उपचार थायराइड ग्रंथि की अतिरिक्त सक्रियता को नियंत्रित करता है और कई मामलों में दवाओं पर निर्भरता कम कर देता है। थायराइड कैंसर के 90 प्रतिशत मामलों में संभव इलाज थायराइड कैंसर के मामलों में भी आधुनिक चिकित्सा पद्धति से बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। विशेष रूप से डिफरेंशिएटेड थायराइड कैंसर के लगभग 90 प्रतिशत मामलों का जड़ से इलाज संभव माना जाता है। इस बीमारी में आमतौर पर सर्जरी की जाती है, लेकिन केवल सर्जरी ही पर्याप्त नहीं होती। सर्जरी के बाद रेडियो आयोडीन ट्रीटमेंट भी दिया जाता है, जिससे शरीर में बची हुई कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जा सके। इससे बीमारी के दोबारा होने की संभावना भी काफी कम हो जाती है। मरीजों को अब बाहर जाने की जरूरत नहीं पहले इस तरह के उन्नत उपचार के लिए कई मरीजों को दिल्ली, मुंबई या अन्य बड़े शहरों के अस्पतालों में जाना पड़ता था। इससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाते थे। अब एम्स भोपाल में रेडियो आयोडीन ट्रीटमेंट की सुविधा उपलब्ध होने से प्रदेश के मरीजों को बड़ी राहत मिली है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में आधुनिक उपकरणों के जरिए इलाज किया जा रहा है।

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